वेनेजुएला में दो ताकतवर भूकंप आए हैं। इन भूकंप में 32 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, 700 से ज्यादा घायल बताए जा रहे हैं। पूरे देश में आपातकाल लगा दिया गया है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति के मुताबिक मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है। कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं जहां तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है।
यहां समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर बार-बार भूकंप आते क्यों है। इस सवाल का जवाब भी खोजेंगे कि कौन सा भूकंप कितना ताकतवर माना जाता है। भारत ऐसे भूकंप के लिए कितना तैयार है, इसका जवाब भी देंगे-
क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं जो लगातार घूम रही हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। इन्हें टेक्टॉनिक प्लेट कहते हैं। इसके कारण भूकंप के अलावा ज्वालामुखी विस्फोट की आशंका भी रहती है।
फॉल्ट को लेकर कई परिभाषाएं दी गई हैं। इनमें नॉर्मल फॉल्ट, थ्रस्ट फॉल्ट, स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट, लेफ्ट लेटरल स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट और राइट लेटरल स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट प्रमुख हैं। इनके कारण धरती कांपने लगती है। मालूम हो कि प्रशांत महासगरीय क्षेत्र के अलावा हिंद महासगर के कुछ क्षेत्र भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माने जाते हैं।
कितनी तबाही ला सकते हैं भूकंप?
कितनी तबाही लाता है भूकंप रिक्टर स्केल असर 0 से 1.9 सिर्फ सिस्मोग्राफ से ही पता चलता है। 2 से 2.9 हल्का कंपन। 3 से 3.9 कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर। 4 से 4.9 खिड़कियां टूट सकती हैं। दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकती हैं। 5 से 5.9 फर्नीचर हिल सकता है। 6 से 6.9 इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है। 7 से 7.9 इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं। 8 से 8.9 इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं। 9 और उससे ज्यादा पूरी तबाही। कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समंदर नजदीक हो तो सुनामी। भूकंप में रिक्टर पैमाने का हर स्केल पिछले स्केल के मुकाबले 10 गुना ज्यादा ताकतवर होता है।
भूकंप से निपटने के लिए क्या कदम?
अब भारत की तमाम सरकारों को इस बात का अहसास है कि देश में एक तेज तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है। ऐसे में कई कदम उठाए गए हैं। उदाहरण के लिए 2014 तक अगर सिर्फ 80 Seismic Observatories रहती थीं, 2025 तक वो आंकड़ा बढ़कर 168 हो चुका है। इसी तरह पूरे देश में Earthquake Early Warning System शुरू करने की तैयारी है। उत्तराखंड में तो साल 2021 में ही Earthquake Early Warning System आ चुका है। जो भी इसकी फाइडिंग होती है, उसे BhuDEV (Bhukamp Disaster Early Vigilante) ऐप पर भेजा जाता है।
अब एक तरफ तकनीक के सहारे भूकंप के खतरों से बचने की कोशिश है तो वहीं दूसरी तरफ लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है। इसी वजह से NDMA ने इस साल मार्च में ही ‘आपदा का सामना’ नाम से एक जागरूकता अभियान शुरू किया था। इसे दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया। इसी तरह साल 2016 में पीएम मोदी ने भी भूकंप की गंभीरता को समझा था और एक 10 प्वाइंट एजेंडा तैयार किया था। तब 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए इन कदमो को जरूरी माना गया था। इस लिस्ट में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम शुरू करने से लेकर बीमा पॉलिसी में बड़े बदलाव करना तक शामिल था।
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