COVID-19 के खिलाफ कैसे काम करती है Sputnik V और है कितनी प्रभावशाली? जानें

भारत में स्पुतनिक-V की डोज तैयार करने के लिए रूसी डायरेक्ट इनवेस्ट फेंड (RDIF) ने हैदराबाद की डॉक्टर रेड्डी लेबोरेट्रीज के साथ पिछले साल सितंबर में साझेदारी की है। इसके तहत भारत में क्लीनिकल ट्रायल किए जाने थे।

Author Edited By shailendra gautam April 13, 2021 9:37 AM
Coronavirus, Sputnik V, Moscow, Dr Reddy’s Laboratories, Indian Governmentरूसी वैक्सीन स्पूतनिक-v को भारत में इस्तेमाल करने की अनुमति मिली (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

रूस में कोविड-19 के खिलाफ तैयार वैक्सीन स्पुतनिक-V के आपात इस्तेमाल को भारत ने मंजूरी दे दी है। देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामलों के मद्देनजर ये फैसला लिया गया है। कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बाद यह तीसरी वैक्सीन है, जिसे भारत में आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी गई है।

मॉस्को स्थित Gamaleya National Research Institute द्वारा तैयार स्पुतनिक-V,साधारण सर्दी और जुखाम देने वाले adenovirus को केंद्र में रखकर तैयार की गयी है। ये वायरस कमजोर प्रकृति के होते हैं और मनुष्य के शरीर में कोई बीमारी पैदा नहीं कर सकते। दो डोज में लगने वाली ये वैक्सीन दो अलग अलग vectors का इस्तेमाल करती है। इससे ये हमारी इम्यूनिटी को लम्बे समय तक मजबूत बनाए रखती है। दोनों डोज 21 दिनों के अंतराल में दी जाती हैं।

वैश्विक बाजार में इस वैक्सीन के प्रत्येक डोज की कीमत लगभग 10 डॉलर है। इसके इस्तेमाल को 55 देशों में अनुमति मिल चुकी है। इन देशों में 15 करोड़ की आबादी है। इसके ड्राई फॉर्म को से 2 से 8 डिग्री के तापमान के बीच रखा जाता है। तरल रूप में इसे -18 डिग्री के तापमान पर रखा जाता है। ये वैक्सीन कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में और तेजी देने का काम करेगी।

भारत में स्पुतनिक-V की डोज तैयार करने के लिए रूसी डायरेक्ट इनवेस्ट फेंड (RDIF) ने हैदराबाद की डॉक्टर रेड्डी लेबोरेट्रीज के साथ पिछले साल सितंबर में साझेदारी की है। इसके तहत भारत में क्लीनिकल ट्रायल किए जाने थे। रेड्डी लेबोरेट्रीज के अलावा इस साझेदारी में Gland Pharma,Hetero Biopharma, Vichrow Biotech,Panacea Biotec और Stelis Biopharma भी शामिल है।

रूस ने पिछले साल अगस्त में ही इस वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी। क्लिनिकल ट्रायल करने से पहले ही इसके इस्तेमाल को मंजूरी देने के फैसले की कई विशेषज्ञों ने तीखी आलोचना भी की थी। हालांकि बाद में इसे कोविड-19 से लड़ने के लिए पूरी तरह सुरक्षित और असरदार बताया गया है। Lancet में प्रकाशित डेटा के मुताबिक कोरोना वायरस के खिलाफ 91.6 फीसदी तक असरकारक है।

सोमवार को सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) ने इस वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर ये फैसला लिया है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से मंजूरी मिलने के साथ ही ये देश में कोविड-19 खिलाफ इस्तेमाल में आने वाली टेस्सरी वैक्सीन बन जाएगी।

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