दिल्ली जिमखाना क्लब इन दिनों सुर्खियों में छाया हुआ है। हो भी क्यों न लुटियंस दिल्ली में 2,सफदरजंग रोड पर स्थित 27.3 एकड़ में बना यह जिमखाना 100 साल से भी अधिक पुराना है, साथ ही बेहद लग्जरी भी है। सरकार की नोटिस के बाद यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया, जहां केंद्र सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि क्लब को जबरन खाली नहीं कराया जाएगा।

साथ ही केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से यह भी कहा कि अगर वे 5 जून तक क्लब को खाली नहीं करते हैं तो सरकार कानून के तहत उचित प्रकिया का पालन करेगी

इससे पहले केंद्र सरकार की दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर बनाई गई जनरल कमेटी ने सोमवार को सरकार से अपील की कि क्लब का कामकाज प्रभावित न किया जाए। साथ ही कमेटी ने सरकार से कहा कि अगर कब्जे की कार्रवाई आगे की जाती है तो क्लब को दूसरी जगह जमीन उपलब्ध कराई जाए।

कैसे सुर्खियों में आया यह क्लब?

दरअसल लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक क्लब पर करीब 48 करोड़ रुपये का ग्राउंड रेंट बाकी है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) ने सितंबर 2025, मार्च 2026 और अप्रैल 2026 में क्लब मैनेजमेंट को नोटिस भेजा। आखिरी नोटिस में L&DO ने एक हफ्ते के भीतर बकाया राशि जमा करने को कहा। साथ ही कहा कि अगर बकाया राशि जमा नहीं की गई तो क्लब की 27.3 एकड़ जमीन वापस ले ली जाएगी।

पिछले हफ्ते 22 मई को, L&DO ने दिल्ली जिमखाना क्लब को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें उससे 5 जून तक सफदरजंग रोड पर अपनी लीज पर ली गई जगह खाली करने को कहा गया।

विभाग ने बताया कि सरकार को यह जमीन रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए वापस चाहिए, लेकिन 100 साल से भी अधिक पुराने इस क्लब को हटाने के फैसले से एक विवाद खड़ा हो गया है और दिल्ली हाई कोर्ट में इसे चुनौती दी गई।

मंगलवार को, हाईकोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस बयान को रिकॉर्ड किया कि जगह खाली कराने के लिए कानून की सही प्रक्रिया का पालन किया जाएगा, और आगे कोई भी अन्य निर्देश देने से मना कर दिया।

कब हुई दिल्ली जिमखाना क्लब की शुरुआत?

इस क्लब की शुरुआत अंग्रेजों के शासन के दौरान जुलाई 1913 में हुई थी, जब 1911 में ब्रिटिश भारतीय सरकार ने देश की राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करने का निर्णय लिया तो इस क्लब को भी दिल्ली स्थापित किया गया। फरवरी 1928 में सरकार ने यह जमीन इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब को लीज पर दी, जिसके बाद 1930 के दशक में यहाँ बिल्डिंग्स का निर्माण किया गया।

सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, यह लीज हमेशा के लिए थी, हालाँकि इसमें कुछ दूसरी शर्तें भी थीं। लेकिन इसके लिए कोई तय समय-सीमा नहीं रखी गई थी। उस समय यह क्लब खास तौर पर ब्रिटिश अधिकारियों के लिए था, लेकिन आजादी के बाद यह भारतीय नौकरशाही, न्यायपालिका और सेना के सदस्यों के साथ-साथ अन्य अमीर लोगों के लिए भी यह एक लग्जरी जगह बन गया।

क्लब की वेबसाइट के अनुसार, इस इमारत को आर्किटेक्ट रॉबर्ट टी. रसेल ने डिजाइन किया था। उन्होंने ही कनॉट प्लेस और कमांडर-इन-चीफ के आवास को भी डिजाइन किया था, जो बाद में ‘तीन मूर्ति’ बना यानी प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का आवास। आजादी के बाद, 2, सफदरजंग रोड पर स्थित इस क्लब का नाम बदलकर ‘दिल्ली जिमखाना क्लब’ कर दिया गया।

सरकार के पास दिल्ली में जमीन का मालिकाना हक कैसे?

1947 के बाद, केंद्र सरकार ने अपने L&DO के जरिए दिल्ली में जमीन के मालिकाना हक को अपने हाथों में ले लिया। जिसके जरिए वह रिहायशी कॉलोनियों, संस्थानों, क्लबों, राजनीतिक पार्टियों वगैरह के विकास के लिए जमीन आवंटित करती है, और लीज पर देती है। ये लीज एक तय समय के लिए हो सकती हैं जो 99 साल या यह हमेशा के लिए भी हो सकती हैं।

लीज पर दी गई जमीन के लिए एक तय किराया देना होता है, जिसे पट्टे की शर्तों के अनुसार, समय-समय पर बदला जा सकता है। रिहायशी संपत्तियों के मामले में, पिछले कुछ सालों में आधे से अधिक संपत्तियों को L&DO द्वारा फ़्रीहोल्ड का दर्जा दे दिया गया है; इसका मतलब है कि मालिकाना हक बदल दिया गया और मालिक (सरकार) को पूरा अधिकार मिल गया। CAG की 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार, L&DO की जमीन पर मौजूद लगभग 60,000 संपत्तियों में से लगभग 35,000 प्रॉपर्टीज़ को लीजहोल्ड से फ़्रीहोल्ड में बदल दिया गया।

आखिर अभी का विवाद क्या है?

क्लब को 22 मई को लिखे अपने पत्र में, L&DO ने कहा कि उसे रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 27.3 एकड़ ज़मीन की जरूरत है। L&DO के पत्र में लीज के क्लॉज़ 4 का जिक्र किया गया था, जो सरकार को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जमीन पर फिर से कब्जा करने की अनुमति देता है।

L&DO ने कहा, “चूंकि, यह तय किया गया है कि दिल्ली के एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक इलाके में स्थित यह जगह, रक्षा ढांचे को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए और सार्वजनिक सुरक्षा के अन्य जरूरी मकसदों के लिए बेहद जरूरी है। यह जमीन संस्थागत जरूरतों, शासन के ढांचे और जनहित के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए अहम है, जिसे आस-पास की सरकारी जमीनों को वापस लेने के साथ जोड़ा गया है।”

यह जमीन लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री के आवास के ठीक बगल में स्थित है। रेस कोर्स रोड पर बनी झुग्गियाँ-जिनका जिक्र पत्र में आस-पास की सरकारी जमीनों के तौर पर किया गया है- उन्हें भी इस समय L&DO द्वारा अतिक्रमण से मुक्त कराया जा रहा है; यह इस बात का संकेत है कि इस पूरे इलाके को किसी अन्य उद्देश्य के लिए खाली कराने की कोई बड़ी योजना चल रही है।

L&DO ने कहा, “चूंकि, लीज डीड के क्लॉज 4 के तहत, यह साफ तौर पर कहा गया है, ‘यदि लीज पर दी गई जगह या उसका कोई भी हिस्सा किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जरूरी हो, तो ऐसे मामले में लीज देने वाले (Lessor) के पास यह कानूनी अधिकार होगा कि वह उस जगह पर दोबारा कब्जा कर ले और ऐसा होने पर यह लीज और इसमें शामिल सभी चीजें खत्म हो जाएंगी इसलिए, अब लीज डीड के क्लॉज 4 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए भारत के राष्ट्रपति, भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) के ज़रिए, इस लीज को खत्म करते हैं और ऊपर बताई गई जगह पर तुरंत प्रभाव से दोबारा कब्जा करने का आदेश देते हैं।” L&DO ने कहा कि वह जगह उसे 5 जून को वापस सौंप दी जाए।

अब आगे क्या होगा?

क्लब की जनरल कमेटी की बैठक 23 मई को हुई और उसने L&DO को एक चिट्ठी लिखने का फैसला किया। क्लब के कार्यवाहक सचिव की ओर से भेजी गई चिट्ठी के अनुसार, इस चिट्ठी में L&DO से यह विचार करने को कहा गया है किक्लब के काम-काज में कोई रुकावट न आए। कमेटी ने कहा कि क्लब के 14000 सदस्य, जो नियमित रूप से फीस जमा करते हैं और 500 कर्मचारी L&DO के इस फैसले से प्रभावित होंगे।

इसके बाद क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों की ओर दायर की गई कई याचिकाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

यह भी पढ़ें: साल 2023 तक 27.3 एकड़ में फैले जिमखाना क्लब का सालाना किराया 409.50 रुपये था, जानिए केंद्र और क्लब के बीच क्या है विवाद

दिल्ली जिमखाना क्लब के एक सदस्य ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की। केंद्र सरकार ने इस खास संस्था को रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए 5 जून तक लुटियंस दिल्ली में अपनी 27.3 एकड़ की जगह खाली करने का निर्देश दिया गया था। सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने हाई कोर्ट में इस मामले का ज़िक्र करते हुए इसे तुरंत लिस्ट करने की मांग की और इस पर 26 मई को जस्टिस अवनीश झिंगन सुनवाई करेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें