अयोध्या स्थित राम मंदिर में आने वाले दान की राशि में कथित गबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसको लेकर समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी से लेकर स्थानीय नेताओं ने भी सवाल खड़े किए हैं। इस पूरे मामले को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के शिष्य महंत कमल नयन दास ने जांच की मांग की है।

महंत कमलनयन दास ने कहा कि भगवान के न्याय से कोई नहीं बच सकता। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो। वहीं, राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने भी आरोपों की जांच की मांग कर इस मामले को और हवा दे दी।

विनय कटियार ने कहा कि करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़े राम मंदिर के मामले में लग रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। फिलहाल मेरे पास कोई जानकारी नहीं है की चोरी हुई है कि नहीं हुई है, लेकिन अगर आरोप लग रहे हैं तो उसकी जांच होनी चाहिए।

भाजपा नेता रजनीश सिंह ने जांच के लिए प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

वहीं, दान राशि की हेराफेरी का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। भाजपा नेता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को इस संबंध में एक शिकायती पत्र भेजा था। जिसके बाद इस प्रकरण ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र सोमवार को अचानक अयोध्या पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बंद कमरे में ट्रस्ट के अधिकारियों के साथ एक बैठक की, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट और कलेक्शन एजेंसी से जुड़े करीब छह लोगों से ‘गायब धनराशि’ के संबंध में पूछताछ की जा रही है, लेकिन पुलिस और ट्रस्ट ने इन खबरों की पुष्टि नहीं की है।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि चल रही आंतरिक ऑडिट के दौरान यह पाया गया कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या की तुलना में दान की राशि कम थी। संदेह है कि कई दिनों की अवधि में धनराशि का गबन किया गया था।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया था कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त करोड़ों रुपये ‘लापता’ होने की खबरें हैं और उन्होंने अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया था।

क्या है मामला?

विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव के बयान से हुई। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया ‘X’ के माध्यम से आरोप लगाया कि मंदिर से करोड़ों रुपये का चढ़ावा गायब है। आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह ने भी दान-पात्रों की गिनती और चढ़ावे को लेकर गंभीर आरोप लगाए। यूपी की सपा सरकार में मंत्री रहे पवन पांडे ने दान की गई रकम में 7.5 करोड़ रुपये तक गायब होने की आशंका जताई थी। हालांकि इस समय चंपत राय ने उन आरोपों को खारिज कर दिया था।

अखिलेश यादव समेत किसने क्या कहा?

राम मंदिर में दान के पैसों को लेकर अखिलेश यादव ने एक्स पर 7 जून, 2026 को एक पोस्ट में लिखा, “समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है।”

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफ़ाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है। न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की माँग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है। सरकार की चुप्पी संदिग्ध है।

7 जून को ही एक अन्य पोस्ट में अखिलेश ने कहा, “स्पष्टीकरण ही स्पष्ट नहीं है। लगता है ये इनके लिए हर हफ़्ते की साधारण बात है, और इतनी अधिक साधारण है कि ये इसे अब ‘उल्लेखनीय’ भी नहीं मानते हैं। चेहरे के भाव और देह की भाषा हताशा और निराशा से भरी है।”

अखिलेश यादव ने कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों को एक साथ बैठाकर स्पष्टीकरण दिया जाए और आंकडों के मिलान के लिए सीसीटीवी के साक्ष्य का सहारा लिया जाए। जैसे ही सारे ट्रस्टी एक साथ बैठेंगे तो सच तत्काल बाहर आ जाएगा क्योंकि उनमें हर कोई एक जैसा नहीं है। इस हेराफेरी की शंका के केंद्र में जब कोई एक व्यक्ति विशेष है ही नहीं तो फिर किसी एक के स्पष्टीकरण का क्या महत्व है।

सपा प्रमुख ने कहा कि ये भी स्पष्ट किया जाए कि 40 सेकंड का स्पष्टीकरण आने में इतने घंटे क्यों लगे और स्पष्टीकरण के नाम पर 1 मिनट बोलना भी भारी क्यों पड़ रहा है। प्रदेश सरकार की चुप्पी की तरह ये सफ़ाई भी संदिग्ध है। ऐसा लग रहा है जैसे स्पष्टीकरण के नाम पर शाब्दिक औपचारिकता निभाई जा रही है। संपूर्ण विश्व का सनातन समाज, इस बेहद कमज़ोर स्पष्टीकरण से और भी अधिक शंकित और आहत हुआ है।

इसके बाद अखिलेश यादव ने 9 जून को एक अन्य पोस्ट में बिंदुवार सवालों की झड़ी लगा दी। अखिलेश ने इस प्रकरण की शुरूआत चढ़ावा चोरी कांड कहते हुए सवाल दागे-

⁠ट्रस्टी कहना क्या चाहते हैं किसी को समझ नहीं आ रहा है।
हेराफेरी में संलिप्त लोगों को हिरासत में लेने की ख़बरें अख़बारों, टीवी चैनलों, मीडिया पोर्टल और यूट्यूबर द्वारा प्रसारित की जा रही हैं।
पहले पुलिस कुछ नहीं कहती लेकिन बाद में न जाने किसके दबाव में खंडन करती है।
जनता के आक्रोश को देखकर ⁠पूरे देश के भाजपाइयों की घिग्घी बंध गई है।
भाजपा के संगी-साथी इस मसले की आपराधिक गतिविधि से पल्ला छुड़ाने के लिए सदैव की तरह भूमिगत हो गये हैं।
लखनऊ की सरकार ने अपने मुँह पर ताला लगा लिया है।
दिल्ली की सरकार का ड्रोन और दूरबीन पता नहीं कहाँ हैं।

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि इन अस्पष्टता भरे हालातों में विश्वभर में सनातनी समाज के बीच आशंकाएं और भी अधिक बलवती हो गईं हैं।

ये ख़ुलासा होना ही चाहिए कि-

कौन है इन सबके पीछे, जो देश की सनातनी आस्था से खिलवाड़ कर रहा है?
चढ़ावे में चोरी का पाप करनेवालों को कौन बचा रहा है?
इस अपराध के तार किन-किन लोगों से जुड़े हैं और कितनी दूर तक जाते हैं?
कौन ऐसा अधर्मी है, जिसके हाथ में इस पूरे कांड की लगाम है?
इस घपले का सरगना कहाँ छिपा बैठा है?
इस घोटाले में किस-किस की हिस्सेदारी है?
इस कांड के खुलने के पीछे चोरी के पैसों के बँटवारे की लड़ाई मुख्य कारण है या कुछ प्रभावशाली लोगों की आपसी प्रतिस्पर्धा?
पैसे गिनने जैसे संवेदनशील कार्य में ट्रस्ट व सरकारी बैंक के बीच निजी कंपनियों का खेल किसने खेला और उसका छिपा मंसूबा क्या है?
सीसीटीवी का प्रमाण सार्वजनिक करके मामले की सच्चाई बताने में क्या परेशानी है?
डबल इंजन अब कहाँ हैं?
डबल इंजन क्या सिर्फ़ डबल ईंधन का उपभोग करने के लिए हैं या उनकी कोई ज़िम्मेदारी भी है?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने दान की राशि के घोटाले के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट नियमित रूप से स्टेट बैंक के साथ आंतरिक ऑडिट करता है। इसमें अभी तक ऐसी कोई हेराफेरी सामने नहीं आई है।

कैसरगंज से पूर्व भाजपा सांसद और सीनियर नेता बृजभूषण शरण सिंह ने इस मामले में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर वह इस मामले की पूरी सच्चाई सामने रखेंगे, तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। वह विवादों में घिर जाएंगे। उन्होंने कहा कि मामले में बहुत ताकतवर लोग शामिल हैं। समय आने पर बोलेंगे।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चंदा विवाद पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया है कि जब चोर को ही रखवाला बना दिया जाएगा, तो ऐसी घटनाओं की उम्मीद ही की जा सकती है। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव का नाम लिए बिना ‘चंपत’ शब्द का अर्थ ‘लेकर भाग जाना’ बताया। साथ ही, भूमि घोटाले का भी जिक्र किय।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कहा कि इस दान विवाद की असली जांच भगवान करेंगे। गलत काम करने वालों को आखिरकार अपने कर्मों का फल मिलेगा। उन्होंने कहा वर्तमान समय में जांच करने वालों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। इससे लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है। महंत दिनेंद्र दास ने भी कहा कि मामले में किसी ने गलत किया है तो भगवान राम उसे स्वयं दंडित करेंगे।

भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर संपूर्ण दान एवं चढ़ावे की पारदर्शी और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। मामले के सामने आने के आद ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र सोमवार को अचानक अयोध्या पहुंचे। उन्होंने बंद कमरे में एक बैठक की। जिसको लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने चंपत राय को चुनौती दी कि वे भगवान राम की मूर्ति पर हाथ रखकर सौगंध खाएं कि कोई चंदा चोरी नहीं हुआ। बृजभूषण शरण सिंह के बयान का हवाला देते हुए संजय सिंह ने कहा कि सत्ता के रसूख वाले लोग ही इस चोरी में शामिल हैं।

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे और पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार ने कहा कि राम मंदिर से करोड़ों भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर दान पात्र के गबन को लेकर लग रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, कटियार ने कहा कि मेरे पास अभी कोई जानकारी नहीं है कि चोरी हुई है या नहीं हुई है। अगर आरोप लग रहे हैं तो उसके बारे में पता किया जाना चाहिए। अयोध्या के प्राचीन पीठ दांतधावन कुंड आचारी मंदिर के महंत विवेक आचारी ने इस पूरे विवाद पर कहा कि मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। यह करोड़ों भक्तों की आस्था का सवाल है। इसकी पूरी सच्चाई राम मंदिर ट्रस्ट को जनता के सामने लाना चाहिए।

राम मंदिर को दान किए गए किसी भी चीज की गिनती कैसे होती है?

राम मंदिर को दान की गई किसी चीज जैस- पैसे, सोना, चांदी आदि के लिए अलग-अलग दान पात्र बनाए गए हैं। 20 दान पात्र गर्भगृह ‘दर्शन पथ’ के पास रखे गए हैं। पांच कंम्प्यूटराइज्ड काउंटर हैं। जहां रशीद कटवाकर दान जमा होता है। दान पात्रों की गिनती के लिए 11 बैंक कर्मचारियों को शामिल किया गया है। जबकि मंदिर ट्रस्ट की ओर से तीन ट्रस्ट के सदस्य शामिल हैं। यह टीम पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संयुक्त रूप से दान गिनती करती है।

राम मंदिर चंदा विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा दावा, बोले- ‘सच बोलूंगा तो बहुत चोट लगेगी’

भारतीय जनता पार्टी के नेता बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चंदे के विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर वह इस मामले में सच बोलेंगे तो कई लोगों को ठेस पहुंचेगी और वह स्वयं विवादों में घिर सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर।