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जानें-समझें, किसानों की कमाई दोगुनी: कितनी हकीकत कितना फसाना

रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआइ) ने अपनी सालाना रिपोर्ट में उम्मीद जताई है कि देश में कृषि पैदावार बढ़ी है, इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के आंदोलन के संदर्भ में रिजर्व बैंक की इस रिपोर्ट को लेकर खासी चर्चा है।

(बाएं) अशोक दलवाई, प्रमुख, विशेषज्ञ समिति (किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य)। (दाएं) सिराज हुसैन, पूर्व कृषि सचिव।

किसान नए कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी की मांग पर अड़े हैं। सरकार ने किसानों के हित में कई योजनाएं गिनाना शुरू कर दिया है। सरकार ने 2022 तक किसानों की कमाई दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, जब सरकार के ही संस्थान नेशनल सैंपल सर्वे आॅर्गनाइजेशन (एनएसएसओ) के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि यह लक्ष्य अभी कोसों दूर है।

जानकार कह रहे हैं कि नए कानूनों के कारण आमदनी पर नए सिरे से कुठाराघात की आशंका है। एक सर्वे के मुताबिक भारतीय किसान की औसत कमाई सालाना 77,124 रुपए है। यह एक महीने में महज 6,427 रुपए बनता है। जबकि, किसान का औसत मासिक खर्च करीब 6,227 रुपए है। बचत नहीं है, इस कारण किसानों पर इलाज, या बीज-खाद जैसे काम के लिए कर्ज बढ़ता जा रहा है।

क्या है एनएसएसओ के आंकड़े

केंद्र सरकार के संगठन नेशनल सैंपल सर्वे आॅर्गनाइजेशन (एनएसएसओ) के मुताबिक 0.1 हेक्टेयर से कम जमीन रखने वाले किसान औसतन अब भी महीने के 7300 रुपए तक कमा पा रहे हैं। जिन किसानों के पास एक से दो हेक्टेयर जमीन है, उनके परिवारों की आय 11 हजार 810 रुपए है। चार से 10 हेक्टेयर जमीन वाले बड़े किसानों की आय 31 हजार 560 रुपए है।

औसत आय देखें तो छह साल में किसान परिवारों की कमाई सिर्फ चार हजार रुपए बढ़ी है। केंद्र सरकार हर छोटे किसान परिवार को सालाना छह हजार रुपए पीएम-किसान निधि देती है। यह उनकी सालाना आय का महज फीसद है। 10 में से दो किसान गरीबी रेखा के नीचे हैं। 10 में से छह किसान की आय सालाना दो लाख रुपए भी नहीं है। देश के 22.5 फीसद किसान गरीबी रेखा से नीचे आते हैं, यानी हर 10 में से 2 किसान। इनमें सबसे ज्यादा 45.3 फीसद किसान झारखंड के हैं। पंजाब के 0.5 फीसद किसान ही गरीबी रेखा से नीचे हैं, जबकि हरियाणा में ये आंकड़ा 4.3 फीसद है।

कितनी कमाई और कितना खर्च

नाबार्ड के मुताबिक, किसान परिवारों की हर महीने की कमाई औसतन आठ हजार 931 रुपए थी। यानी, सालाना एक लाख सात हजार 172 रुपए। सबसे ज्यादा कमाई पंजाब और हरियाणा के किसान परिवारों की होती रही है। पंजाब में एक किसान हर महीने 23 हजार 133 रुपए और हरियाणा में 18 हजार 496 रुपए कमाई करता है। कमाई में पंजाब सबसे आगे और बिहार सबसे पीछे है।

किसानों की कमाई के मामले में तीसरा स्थान जम्मू-कश्मीर का है, जहां किसानों की सालाना औसतन कमाई 1,52,196 रुपए की है। कश्मीर के किसानों की आमदनी गुजरात, महाराष्ट्र जैसे संपन्न राज्यों से भी काफी
ज्यादा है।

केरल में किसानों की औसत सालाना कमाई 1,42,668 रुपए की है। इसी तरह, राजस्थान में 88,188 रुपए, मध्य प्रदेश में 74,508 रुपए, छत्तीसगढ़ में सालाना कमाई 62,124 रुपए। ओड़ीशा में औसत सालाना आमदनी 59,712 रुपए और बंगाल में 47,760 रुपए है। झारखंड के किसानों की सालाना औसत आय 56,652 रुपए है। उत्तर प्रदेश और बिहार सूची में सबसे नीचे रहने वाले उन राज्यों में शामिल हैं, जहां किसानों की औसत आमदनी सबसे कम है। उत्तर प्रदेश के किसानों की औसत सालाना आय सिर्फ 58,944 रुपए और बिहार में 42,684 रुपए है।

खर्च के मामले में पंजाब और केरल के किसान आगे रहे। पंजाब के किसान हर महीने 13 हजार 311 रुपए और केरल के किसान 11 हजार 8 रुपए खर्च करते हैं। जबकि, यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों के किसान कमाई से ज्यादा खर्च करते हैं। औसतन पांच हजार 249 रुपए पश्चिम बंगाल एक किसान ने खर्च किए।

कितने दिन में कितनी बढ़ी आमदनी

किसानों की आमदनी को लेकर संप्रग और राजग की मौजूदा सरकार ने सर्वे कराए थे। सर्वे के आंकड़ों से पता चला कि डॉ. मनमोहन सिंह सरकार में किसानों की कमाई कुछ ज्यादा नहीं थी और नरेंद्र मोदी सरकार में भी नहीं रही। मनमोहन सरकार में हुए सर्वे में किसानों की हर महीने की कमाई 6,426 रुपए बताई गई थी। मोदी सरकार में हुए सर्वे में किसानों की कमाई 8,931 रुपए बताई। मनमोहन से लेकर मोदी सरकार तक किसानों की महीने की कमाई महज दो हजार 505 रुपए ही बढ़ी। केंद्र सरकार के नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) रिपोर्ट में कमाई और खर्च के आंकड़े दिए गए हैं।

क्या कहते
हैं जानकार

किसानों की उपज का बेहतर दाम दिलवा पाना चुनौती है। सरकार ने 2007 में वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाई थी। इसके तहत एक हजार गोदाम ही पंजीकृत हैं। अगर गोदामों में इलेक्ट्रिकल रसीद प्रणाली लागू हो जाए तो किसानों की आय पर फर्क पड़ेगा।
– सिराज हुसैन, पूर्व कृषि सचिव

किसानों की आय 2022-23 तक दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए कृषि क्षेत्र में 10.4 फीसद की वृद्धि दर हासिल करनी होगी। इस वक्त यह 2.9 फीसद है। लक्ष्य पाने के लिए बाकी के चार साल में 15 फीसद की विकास दर हासिल करनी होगी जो फिलहाल असंभव है।
– अशोक दलवाई, प्रमुख, विशेषज्ञ समिति (किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य)

कितनी बढ़ी कृषि उपज

रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कृषि उपज साल-दर-साल बढ़ रही है। वर्ष 2017-18 में दो हजार 850 लाख टन कृषि पैदावार थी। 2018-19 में तकरीबन वहीं थी, लेकिन 2019-20 में फिर चार फीसद बढ़ गई और दो हजार 967 लाख टन हो गई। कृषि उपज जिनमें मुख्य रूप से अनाज, दलहन और तिलहन आते हैं, वह दो साल में 117 लाख टन बढी है।

देश में सब्जियों और फलों की उपज बढ़ी है। रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, फलों और सब्जियों की पैदावार 2017-18 से 2019-20 के बीच दो साल में 2.81 फीसद बढ़ी है। वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में एक साल में यह तीन फीसद से ज्यादा बढ़ी है। एक साल में फलों और सब्जियों की पैदावार 87.58 लाख टन बढ़ी है और दो साल में यह 93 लाख टन से ज्यादा बढ़ी है।

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