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जानें-समझें: नए संसद भवन की परियोजना,क्यों पड़ी जरूरत और विरोध क्यों

वर्ष 2026 में लोकसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन किया जाना है। इसके बाद सदन में सांसदों की संख्या बढ़ सकती है। इस बात को ध्यान में रखकर नई इमारत बनाई जा रही है।

parliamentनये संसद भवन का शिलान्‍यास (उपर)! बाएं कमल हासन और दाएं बिमल पटेल।

संसद की नई इमारत के निर्माण की कवायद शुरू हो चुकी है। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधारशिला रखी। इस इमारत के 2022 तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है। इसके बनने में करीब 971 करोड़ रुपए खर्च होंगे। नया भवन 64,500 वर्ग मीटर में बनाया जाएगा। निर्माण शुरू होने से पहले विरोध भी शुरू हो गया है। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने परियोजना की मंजूरी के तरीके पर नाराजगी जताई है और कहा है कि ‘सेंट्रल विस्टा परियोजना’ के तहत कोई निर्माण, तोड़फोड़ या पेड़ काटने का काम तब तक नहीं होना चाहिए, जब तक कि लंबित याचिकाओं पर फैसला न सुना दिया जाए।

क्या है परियोजना

नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के बीच के तीन किलोमीटर लंबे क्षेत्र को ‘सेंट्रल विस्टा’ कहते हैं। राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, उपराष्ट्रपति आवास, राष्ट्रीय संग्रहालय, नेशनल आर्काइव्ज, इंदिरा गांधी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आइजीएनसीए), उद्योग भवन, बीकानेर हाउस, हैदराबाद हाउस, निर्माण भवन और जवाहर भवन इस सेंट्रल विस्टा का हिस्सा हैं। सितंबर 2019 में केंद्र सरकार ने इसके पुनर्विकास की योजना बनाई।

इस क्षेत्र में नए संसद भवन समेत 10 नई इमारतें बनाने की योजना है। नई संसद पालिर्यामेंट हाउस स्टेट के प्लॉट नंबर 118 पर बनाई जाएगी। राष्ट्रपति भवन और मौजूदा संसद भवन पहले की ही तरह रहेगा। इसी पुनर्विकास योजना को ‘सेंट्रल विस्टा परियोजना’ कहा जा रहा है। संसद की मौजूदा इमारत को पुरातत्व धरोहर में बदला जाएगा। 1921 में इसे एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने बनाया था। उस समय यह इमारत छह साल में बनकर तैयार हुई थी। इसे बनाने में 83 लाख रुपए लगे थे।

क्यों पड़ी जरूरत

वर्ष 2026 में लोकसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन किया जाना है। इसके बाद सदन में सांसदों की संख्या बढ़ सकती है। इस बात को ध्यान में रखकर नई इमारत बनाई जा रही है। अभी लोकसभा में 543 सदस्य हैं और राज्यसभा में 245 सदस्य। 1951 में जब पहली बार चुनाव हुए थे, तब देश की आबादी 36 करोड़ और 489 लोकसभा सीटें थीं। एक सांसद औसतन 7 लाख आबादी का प्रतिनिधित्व करता था। आज देश की आबादी 138 करोड़ से ज्यादा है। एक सांसद औसतन 25 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहा है। संविधान के अनुच्छेद-81 में हर जनगणना के बाद सीटों का परिसीमन मौजूदा आबादी के हिसाब के करने का नियम था। लेकिन 1971 के बाद से परिसीमन नहीं हुआ। दूसरे, मार्च 2020 में सरकार ने संसद को बताया कि पुरानी इमारत खराब हो रही है।

विरोध क्यों हो रहा

परियोजना का विरोध करने वालों का तर्क है कि प्राधिकारों ने नियमों की अनदेखी करके मंजूरी दी है। इसमें जमीन के इस्तेमाल में बदलाव को मंजूरी भी शामिल है। पूरे निर्माण के दौरान कम से कम एक हजार पेड़ काटे जाएंगे। इसके कारण पहले से ही प्रदूषण से जूझ रही दिल्ली में हालात और खराब हो जाएंगे। पर्यावरणविद कहते हैं कि परियोजना का पर्यावरण आॅडिट तक नहीं कराया गया। वहीं जो इतिहासकार इसका विरोध कर रहे हैं, उनका कहना है कि परियोजना के लिए कोई ऐतिहासिक या विरासत आॅडिट भी नहीं हुआ है। इसे बनाने के लिए राष्ट्रीय संग्रहालय जैसी ग्रेड-1 विरासत स्थल में भी तोड़फोड़ होगी। नई परियोजना के लिए वहां खड़ी 14 से 16 विरासत इमारतें ढहाई जाएंगी।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

इस परियोजना के खिलाफ कम से कम सात याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इन याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अदालत परियोजना की मंजूरी के तरीकों पर नाराजगी जता चुका है। अदालत ने महाधिवक्ता तुषार मेहता से कहा था कि आप शिलान्यास कर सकते हैं, आप कागजी करवाई कर सकते हैं लेकिन निर्माण, तोड़फोड़ या पेड़ काटना नहीं होगा।

दायर तमाम याचिकाओं में से एक याचिका वकील राजीव सूरी की है, जिसमें उन्होंने इमारतों के निर्माण और जमीन के इस्तेमाल पर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने जमीन के इस्तेमाल को लेकर किए गए कई बदलावों पर पर सवाल उठाए हैं। सरकार ने यूनेस्को से इस क्षेत्र को विश्व धरोहर का दर्जा देने के लिए 2013 में आवेदन किया था और कानून के तहत इस क्षेत्र के संरक्षण के लिए निर्माण पर कड़ी रोक और सख्त नियम बनाए गए थे। लेकिन परियोजना के साथ ही वे नियम अब अतीत बन जाएंगे।

क्या कहते
हैं जानकार

हम बड़े बदलाव करने जा रहे हैं। हमारी कोशिश होगी कि हम अतीत की विरासत को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएं। हम अतीत का सम्मान कर रहे हैं। हम उस विरासत को मजबूत कर रहे हैं। यह बदलाव अतीत से नाता जोड़े रखेगे। अगर सर एडवर्ड लुटियंस जीवित होते तो वे भी यही करते।
– बिमल पटेल, वास्तुकार, सेंट्रल विस्टा परियोजना

चीन की महान दीवार के निर्माण में हजारों लोग मारे गए। राजाओं ने कहा कि यह दीवार लोगों की रक्षा के लिए थी। जब आधा हिंदुस्तान भूखा है, कोरोना के कारण नौकरियां खोने के बाद भूख से मर रहा है, तो आप किसकी रक्षा के लिए 1,000 करोड़ रुपए की संसद का निर्माण कर रहे हैं?
– कमल हासन, अभिनेता और दक्षिण भारत की मक्कल निधि मय्यम पार्टी के नेता

नई संसद में क्या होगा खास

नई संसद की इमारत मौजूदा संसद भवन के बगल में होगी और दोनों इमारतों में एक साथ काम होगा। अभी लोकसभा में 590 लोगों के बैठने की क्षमता है। नई लोकसभा में 888 सीटें होंगी और आगंतुक दीर्घा में 336 से ज्यादा लोगों के बैठने का इंतजाम होगा। अभी राज्यसभा में 280 के बैठने की क्षमता है। नई राज्यसभा में 384 सीटें होंगी और आगंतुक दीर्घा में 336 से ज्यादा लोग बैठ सकेंगे। लोकसभा में इतनी जगह होगी कि दोनों सदनों के संयुक्त सत्र के वक्त लोकसभा में ही 1272 से ज्यादा सांसद साथ बैठ सकेंगे। नए भवन को हरित ऊर्जा से संचालित किया जाएगा। अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। महत्त्वपूर्ण लोगों के लिए भूमिगत प्रवेश, जबकि आम लोगों और अधिकारियों के लिए भूतल से प्रवेश होगा। दिव्यांग व्यक्ति को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसका खास ख्याल रखा जाएगा।

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