केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को जल जीवन मिशन (JJM) को 2028 तक बढ़ाने की मंज़ूरी दे दी है। इसके लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2025-26 पेश करते हुए जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाने की घोषणा की थी, जिसमें बजट आवंटन में बढ़ोतरी की बात भी कही गई थी।
1.51 लाख करोड़ रुपये हुए आवंटित
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट द्वारा जल जीवन मिशन के लिए मंज़ूर किया गया 1.51 लाख करोड़ रुपये का आवंटन, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पहले मांगी गई राशि से कम है। जल शक्ति मंत्रालय ही जल जीवन मिशन को लागू करने के लिए ज़िम्मेदार नोडल मंत्रालय है। इंडियन एक्सप्रेस ने 21 अप्रैल, 2025 को रिपोर्ट किया था कि जल शक्ति मंत्रालय ने 2028 तक की अवधि के लिए जल जीवन मिशन के लिए 2.79 लाख करोड़ रुपये के आवंटन की मांग की थी। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने ग्रामीण नल जल योजना के कार्यान्वयन में अनियमितताओं की चिंताओं के चलते इस मांग को खारिज कर दिया था। यानी मंत्रालय ने जितना मांगा था, उसका आधा ही धन मिला।
निर्मला सीतारमण ने पिछले साल अपने बजट में मौजूदा वित्त वर्ष (2025-26) के लिए जल जीवन मिशन के लिए 67,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन संशोधित अनुमानों (RE) में इस राशि को घटाकर 17,000 करोड़ रुपये कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि यह राशि भी अभी तक खर्च नहीं हो पाई है, क्योंकि मंज़ूरी वित्त वर्ष के आखिरी महीने में मिली थी।
क्या है जल जीवन मिशन?
अगस्त 2019 में शुरू किए गए जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक देश के सभी ग्रामीण परिवारों को ‘फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शंस’ (FHTC) उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें प्रतिदिन प्रति व्यक्ति (lpcd) 55 लीटर पीने का पानी मिल सके।
अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से घिरे जल जीवन मिशन में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कई तरह की कार्रवाई देखने को मिलीं। पिछले साल मई में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के कार्यों का ज़मीनी निरीक्षण करने के लिए अधिकारियों की 100 से ज़्यादा टीमें भेजी थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे जल जीवन मिशन में अनियमितता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें और किसी को भी न बख्शें।
‘जल जीवन मिशन’ में पाई गई गड़बड़ी
10 नवंबर 2025 को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट किया कि केंद्र सरकार के ‘जल जीवन मिशन’ के तहत ग्रामीण घरों तक नल के कनेक्शन से पीने का पानी पहुंचाने के काम में वित्तीय अनियमितताओं और काम की गुणवत्ता की शिकायत मिली। इसके बाद 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 596 अधिकारियों, 822 ठेकेदारों और 152 थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसियों (TPIAs) के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
21 मई 2025 को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जल जीवन मिशन डैशबोर्ड पर अपलोड किए गए डेटा की अपनी जांच के परिणाम प्रकाशित किए। इस जांच में पता चला कि तीन साल पहले मिशन के दिशानिर्देशों में किए गए बदलावों ने खर्च पर होने वाली एक अहम जांच को हटा दिया, जिसके कारण लागत में बढ़ोतरी हुई। एक्सप्रेस की जांच में पाया गया कि इसके कारण 14,586 योजनाओं के लिए कुल 16,839 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत आई, जो उनकी अनुमानित लागत से 14.58 प्रतिशत अधिक थी। पढ़ें लुक आउट सर्कुलर पर MHA का नया नियम
(यह भी पढ़ें- राष्ट्रपति और राज्यपाल के मुद्दे पर टीएमसी-बीजेपी आमने-सामने)
पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति और ज्यादा गरमा गई है। पिछले एक हफ्ते में ऐसी घटनाएं हुईं जिनसे राज्यपाल और यहां तक कि राष्ट्रपति के पद भी सियासी बहस के केंद्र में आ गए। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर
