जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के जम्मू स्थित आधिकारिक आवास में शुक्रवार को एक 21 वर्षीय युवक के कथित तौर पर घुसने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना दिनदहाड़े हुई, हालांकि घटना के समय मुख्यमंत्री जम्मू में मौजूद नहीं थे।

अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवक नशे का आदी है और उसके किसी आतंकी संगठन से संबंध नहीं पाए गए हैं। पुलिस को फिलहाल ऐसा कोई संकेत भी नहीं मिला है कि वह मुख्यमंत्री को नुकसान पहुंचाने के इरादे से आवास में दाखिल हुआ था। पूछताछ के बाद उसके खिलाफ घुसपैठ और अतिक्रमण से संबंधित कार्रवाई की गई और उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया।

दिल्ली में थे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला

घटना के समय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दिल्ली में थे, जहां उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। बैठक में जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने, निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल के बीच कामकाज से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने तथा आरक्षण व्यवस्था के युक्तिसंगतीकरण सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। ऐसे समय में मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास की सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर किसी युवक का अंदर पहुंच जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।

नशे की हालत में मिला था युवक

अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी युवक रियासी का रहने वाला है। वह 3 अगस्त को अपने एक दोस्त के साथ जम्मू आया था। उसी शाम गुज्जर नगर पुलिस चौकी की टीम ने उसे कथित तौर पर नशे की हालत में घूमते हुए पाया था।

पुलिस उसे चौकी लेकर गई और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने उसके परिवार को सूचना दी। परिवार ने बताया कि उनका घर दूर है और वे अगले दिन जम्मू पहुंचेंगे।

4 अगस्त को युवक के माता-पिता पुलिस चौकी पहुंचे। चूंकि संबंधित अपराध जमानती था और इसमें अधिकतम छह महीने से एक साल तक की सजा का प्रावधान बताया गया, इसलिए पुलिस उसे जमानत पर छोड़ने की प्रक्रिया में थी।

पिता के बाहर जाते ही पहाड़ी से आवास में पहुंचा

अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने युवक के पिता से स्थानीय व्यक्ति को जमानत के लिए जमानती के तौर पर लाने को कहा। जब पिता स्थानीय संपर्क तलाशने के लिए चौकी से बाहर गए, तभी युवक वहां से निकल गया। इसके बाद वह पुलिस चौकी से सटे एक छोटे पहाड़ी क्षेत्र पर चढ़ गया और वहां से मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास की पिछली दीवार को पार कर परिसर में दाखिल हो गया।

हालांकि, उसकी गतिविधि जल्द ही मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए तैनात स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (SSG) के जवानों की नजर में आ गई। SSG कर्मियों ने युवक को पकड़ लिया और उसे आगे की पूछताछ के लिए पुलिस के हवाले कर दिया।

आतंकी कनेक्शन नहीं मिला

प्रारंभिक जांच में पुलिस को युवक के किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने का कोई सबूत नहीं मिला है। अधिकारियों का कहना है कि उसके मुख्यमंत्री को निशाना बनाने या किसी अन्य आपराधिक साजिश के तहत आवास में प्रवेश करने की बात भी सामने नहीं आई है। फिर भी, मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास की सुरक्षा में इस तरह की सेंध को गंभीर सुरक्षा चूक के तौर पर देखा जा रहा है।

पहले भी उठते रहे हैं सुरक्षा को लेकर सवाल

यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता पहले भी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता, पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) नेताओं का आरोप रहा है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में निर्वाचित सरकार की भूमिका सीमित हुई है। पार्टी नेताओं ने कई मौकों पर सुरक्षा व्यवस्था में कथित ढिलाई का मुद्दा उठाया है।

फारूक अब्दुल्ला पर भी हुआ था हमले का प्रयास

इससे पहले 11 मार्च को जम्मू में एक विवाह समारोह के दौरान फारूक अब्दुल्ला पर कथित तौर पर गोली चलाने का प्रयास किया गया था। एक व्यक्ति ने लाइसेंसी रिवॉल्वर से उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सका।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में दावा किया था कि वह करीब 30 वर्षों से फारूक अब्दुल्ला की हत्या करना चाहता था और कश्मीर में आतंकवाद के लिए उन्हें जिम्मेदार मानता था।

ऐसे में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास में एक युवक का पीछे की दीवार फांदकर पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से चल रही बहस को और तेज कर सकता है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि युवक आवास परिसर तक किस तरह पहुंचा और सुरक्षा घेरे में कहां चूक हुई।

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पंजाब में चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर चल रहा किसानों का धरना सोमवार को तब खत्म हो गया जब पंजाब सरकार की ओर से किसानों को लिखित आश्वासन दिया गया। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की अलग-अलग यूनियनों से जुड़े किसान इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे और यह धरना 1 सितंबर से शुरू हुआ था। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।