बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद ने फरवरी 2024 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला था। हालांकि, पिछले साल जुलाई में उन्हें अनिश्चितकालीन छुट्टी पर भेज दिया गया था। उन्होंने अपने खिलाफ की गई कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग की है। इस बात की जानकारी इंडियन एक्सप्रेस को मिली है।
ऐसा माना जा रहा है कि वाजेद ने पिछले आठ महीनों में इस मामले को विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके महानिदेशक टेड्रोस घेब्रेयेसस के सामने बार-बार उठाया है और फैसले में पारदर्शिता की मांग की है। एक पत्र पिछले महीने ही उनके कानूनी प्रतिनिधियों के जरिये भेजा गया था। इसमें कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
वाजेद को अनिश्चितकालीन छुट्टी पर भेज दिया था
डब्ल्यूएचओ ने 11 जुलाई, 2025 को वाजेद को जांच पूरी होने तक अनिश्चितकालीन छुट्टी पर भेज दिया था। बांग्लादेश एंटी-करप्शन कमीशन की ओर से उन पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप में दो मामले दर्ज करने के कुछ महीने बाद यह कदम उठाया गया। एक कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक नियुक्त किया गया था, जिनका कार्यकाल अब खत्म हो चुका है।
वाजेद ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की तत्कालीन अंतरिम सरकार के इशारे पर की गई थी। इसमें सही प्रक्रिया की अनदेखी की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि डब्ल्यूएचओ ने अपनी कार्रवाई का स्पष्टीकरण नहीं दिया है और पूछा है कि क्या कोई औपचारिक जांच की जा रही है, जबकि वह एक साल से अधिक समय से छुट्टी पर हैं। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने दुर्व्यवहार के अलावा डब्ल्यूएचओ पर पक्षपात और उत्पीड़न का भी आरोप लगाया है।
सूत्रों के अनुसार, डब्ल्यूएचओ ने उनके कुछ ईमेल को स्वीकार किया है, लेकिन उनके खिलाफ शिकायतों की चल रही समीक्षा के बारे में अभी तक कोई स्पष्टता नहीं दी है।
सूत्रों ने बताया कि वाजेद को छुट्टी पर भेजने का फैसला महानिदेशक के एक ईमेल के जरिये डब्ल्यूएओ के कर्मचारियों को बताया गया था। सूत्रों के मुताबिक, ईमेल में संकेत दिया गया था कि बांग्लादेश सरकार की आपत्तियां, उनके चुनाव की वैधता पर सवाल और एसीसी के मामले इस फैसले के पीछे के कारण थे।
डब्ल्यूएचओ ने छुट्टी की पुष्टि की
इंडियन एक्सप्रेस के ईमेल सवालों का जवाब देते हुए डब्ल्यूएचओ ने पुष्टि की कि वाजेद अभी भी छुट्टी पर हैं। ईमेल में डब्ल्यूएचओ ने कहा, “ऐसे कर्मचारियों के लिए स्थापित चैनल हैं जो सवालों में बताई गई प्रकृति की शिकायतें उठाना चाहते हैं। हालांकि, हम विशिष्ट मामलों पर टिप्पणी नहीं करते हैं, जहां गोपनीयता बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।”
सूत्रों ने बताया कि वाजेद ने कई चिंताएं जताई हैं। इनमें डब्ल्यूएचओ द्वारा बांग्लादेश की एसीसी और तत्कालीन अंतरिम सरकार के अन्य अधिकारियों के साथ कथित तौर पर सीधे संवाद और व्यवहार करना शामिल है। साथ ही, उन्होंने राजनयिक संचार के लिए सही प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
यह भी पता चला है कि उन्होंने सदस्य देशों के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है। इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, भारत ने सही चैनलों के जरिये डब्ल्यूएचओ के सामने यह मामला उठाया है, लेकिन उसने इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
एक सूत्र ने कहा, “राजनीतिक अनुरोध मिलते ही वाजेद को तुरंत छुट्टी पर भेजने का डब्ल्यूएचओ का फैसला, उस तरीके से काफी अलग है जिस तरह से संगठन ने तब प्रतिक्रिया दी थी जब खुद टेड्रोस को इथियोपिया से इसी तरह के हमलों का सामना करना पड़ा था।”
सूत्रों के अनुसार, यह विशेष रूप से संदिग्ध है क्योंकि वाजेद पर ढाका में उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया और उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया गया। सूत्र ने कहा, “डब्ल्यूएचओ ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि किसी निर्वाचित क्षेत्रीय निदेशक के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले बाहरी राजनीतिक पक्षों से मिली जानकारी का आकलन, सत्यापन और विश्लेषण कैसे किया गया।”
वाजेद ने क्या आरोप लगाया
वाजेद ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश सरकार के इशारे पर, हसीना की बेटी होने के कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उनकी योग्यताओं और कामों को नजर अंदाज किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें पहले वेतन सहित छुट्टी पर भेजा गया था, लेकिन कुछ महीनों बाद जब उन्होंने यह मामला उठाया, तो उन्हें बिना वेतन के प्रशासनिक अवकाश पर भेज दिया गया।
वाजेद ने कब संभाला था पदभार?
वाजेद ने 1 फरवरी 2024 को पांच साल के कार्यकाल के लिए पदभार ग्रहण किया और इस पद पर आसीन होने वाली बांग्लादेश की पहली और दूसरी महिला बनीं। उन्हें डाले गए कुल 10 वोटों में से आठ वोट मिले, जिनमें भारत का वोट भी शामिल था।
एक अन्य सूत्र ने कहा, “उस जनादेश को जल्दबाजी में लिए गए एक कार्यकारी फैसले से बदल दिया गया, जिसमें उन सदस्य देशों की भागीदारी नहीं थी जिन्होंने वाजेद को चुना था।” सूत्रों के अनुसार, वाजेद को घोषणा से केवल एक या दो दिन पहले ही सूचित किया गया होगा। इससे अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर और भी चिताएं बढ़ गई हैं। वाजेद के एक करीबी सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जब तक डब्ल्यूएचओ संबंधित दस्तावेज जारी नहीं करता और यह स्पष्ट नहीं करता कि यह कार्रवाई किस अधिकार के तहत की गई है, तब तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिलेंगे।
इस बीच, क्षेत्रीय निदेशक का पद खाली घोषित नहीं किया गया है। हालांकि, वाजेद निर्वाचित क्षेत्रीय निदेशक बनी हुई हैं। सूत्रों का आरोप है कि उन पर स्वेच्छा से पद छोड़ने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
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बांग्लादेश पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर पर लगातार जोर दे रहा है। बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने लगातार इसको लेकर भारत से मांग की है। वहीं भारत में टॉप सरकारी अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आग्रह भारतीय न्यायपालिका के सामने आने चाहिए और वही उन पर फैसला करेगा। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश के साथ इस तरह की कठोर नीति से दूर जाने के लिए गहरी बातचीत चल रही है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
