इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार सूचना प्रोद्यौगिकी अधिनियम 2000 के अनुच्छेद 69(ए) के तहत विदेश, रक्षा, गृह और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय को भी सोशल मीडिया कंटेंट ब्लॉक करने का अधिकार प्रदान कर सकती है। मौजूदा कानून में यह अधिकार केवल आईटी मंत्रालय के पास है।
अगर ऐसा आदेश पारित होता है, तो इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स को किसी एक मंत्रालय नहीं, बल्कि कई सरकारी संस्थानों से कंटेंट ब्लॉक करने के निर्देश मिल सकेंगे। दो वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस समय केंद्र सरकार इस मुद्दे पर अंतर-मंत्रालयी चर्चा कर रही है। सरकार का मानना है कि ऑनलाइन जनरेटेड कंटेंट कई बार गुमराह करने का काम करता है, इसलिए ऐसे मामलों पर रोक लगाना जरूरी है। यह भी बताया जा रहा है कि फिलहाल यह बदलाव पांच मंत्रालयों तक सीमित रह सकता है, लेकिन आगे चलकर इसका दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
सरकार क्या बदलना चाहती है?
सरकार भविष्य में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) को भी यह ताकत दे सकती है। दरअसल, लंबे समय से SEBI इस बात पर आपत्ति जताता रहा है कि इंटरनेट पर भ्रामक वित्तीय जानकारी साझा की जा रही है। ऐसे में, अगर उसे भी कंटेंट ब्लॉक करने की शक्ति मिलती है, तो वह सीधे कंपनियों को आदेश दे सकेगा।
देश में कैसे ब्लॉक होता है कंटेंट?
वर्तमान में भारत में कंटेंट ब्लॉक करने के दो प्रमुख तरीके हैं। पहला, आईटी एक्ट की धारा 69(ए) के तहत। इसके अंतर्गत वह कंटेंट, जो राष्ट्रीय सुरक्षा या भारत की संप्रभुता के लिए खतरा माना जाता है, उसे तुरंत हटाना होता है। विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के पास नोडल अधिकारी होते हैं, जो ऐसे कंटेंट की पहचान कर उसे आईटी मंत्रालय को भेजते हैं। इसके बाद मंत्रालय की ओर से ब्लॉकिंग के आदेश जारी होते हैं।
दूसरा तरीका Section 79 (3)(b) के प्रावधानों के तहत आता है, जिसके जरिए कुछ मंत्रालयों को सीधे कंटेंट ब्लॉक करने की शक्ति दी गई है। आमतौर पर गृह मंत्रालय सहयोग पोर्टल के माध्यम से ऐसे निर्देश जारी करता है।
पहचान छिपाने की शर्त पर एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सरकार दोनों व्यवस्थाओं के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश कर रही है। जिस तरह सहयोग पोर्टल के जरिए केंद्र और राज्य स्तर की विभिन्न एजेंसियां सोशल मीडिया कंपनियों को कंटेंट ब्लॉक करने के निर्देश भेजती हैं, उसी तरह आईटी एक्ट की धारा 69(ए) की प्रक्रिया को भी विकेंद्रीकृत करने पर विचार किया जा रहा है।
लंबे समय से तैयारी कर रही सरकार
पिछले कुछ समय से केंद्र सरकार इस दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। हाल ही में सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया गया था कि कंटेंट ब्लॉक करने का समय 24–36 घंटे से घटाकर 2–3 घंटे कर दिया जाए। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल आईटी एक्ट के तहत ब्लॉकिंग की प्रक्रिया मंत्रालय के स्तर पर केंद्रित है, जिससे काम का दबाव बढ़ रहा है। अभी अन्य एजेंसियों के नोडल अधिकारियों से इनपुट मिलते हैं और उसके बाद कार्रवाई होती है। लेकिन सरकार आईटी मंत्रालय का बोझ कम करना चाहती है और विभिन्न एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अधिक अधिकार देने की दिशा में काम कर रही है।
