केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को खीरे की खेती के लिए 99 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी मिली। यह खुलासा द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में हुआ है। भागीरथ चौधरी अजमेर से लोकसभा सांसद हैं। मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) नाम की इस योजना के तहत उन्हें यह लाभ मिला। हालांकि सिर्फ मंत्री ही नहीं बल्कि एक सीनियर आईएएस अधिकारी की मां, पत्नी और बेटे को भी राजस्थान में इस स्कीम के तहत फायदा मिला।

यह स्कीम केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत कमर्शियल खेती को बढ़ावा देने के लिए है। रिकॉर्ड से पता चलता है कि 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में सचिव हैं। उनके परिवार के तीन सदस्यों को इस स्कीम के तहत पांच सालों में कुल 1.16 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी मिली।

Exclusive: केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी को मिली 99 लाख की सब्सिडी, अपने ही मंत्रालय की योजना से मिला लाभ 

NHB चलाता है योजना

‘बागवानी फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद के मैनेजमेंट के ज़रिए कमर्शियल बागवानी का विकास’ नाम की यह स्कीम केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तहत नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) चलाता है। रिकॉर्ड के मुताबिक नरेश गंगवार ने 2021-22 के लिए डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के पास अचल संपत्ति की जरूरी सालाना घोषणा में स्कीम के तहत मंज़ूर सिर्फ़ एक प्रोजेक्ट की जानकारी दी है।

नरेश गंगवार ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सर्विस रूल्स के मुताबिक उन्हें सिर्फ़ बड़े पैमाने पर प्रॉफ़िट के लिए ही जानकारी देनी होती है। इसमें कुछ खास सब्ज़ियों और फूलों की खेती मिशन फ़ॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ़ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत आती है, जिसे 2014-15 में लॉन्च किया गया था और इसे नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) मैनेज करता है। ये विभाग भगीरथ चौधरी के मंत्रालय के प्रशासनिक कंट्रोल में एक ऑटोनॉमस संगठन है।

सभी सब्सिडी जयपुर ज़िले के प्रोजेक्ट के लिए

रिकॉर्ड से पता चलता है कि उनके परिवार को मिली सभी सब्सिडी जयपुर ज़िले के प्रोजेक्ट्स के लिए हैं। नरेश गंगवार की मां बिंदुमती के जोरपुरा जोबनेर तहसील के भासिंगपुरा गांव में खीरे की खेती के एक प्रोजेक्ट के लिए जनवरी 2025 में उनके बैंक अकाउंट में 46.03 लाख रुपये की सब्सिडी आई। प्रोजेक्ट का एरिया 8,880 sq m है और लागत 99.38 लाख रुपये थी। उस समय नरेश गंगवार केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के तौर पर कार्यरत थे।

कब कहां मिली सब्सिडी?

नरेश गंगवार के बेटे कुमार रित्विक के जोरपुरा जोबनेर तहसील के ढाणी बोराज गांव में खीरे की खेती के एक प्रोजेक्ट के लिए मार्च 2023 में उनके बैंक अकाउंट में 46.49 लाख रुपये की सब्सिडी आई। प्रोजेक्ट का एरिया 8,736 sq m है और लागत 97.94 लाख रुपये है। तब भी नरेश गंगवार पर्यावरण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव है।

  • फुलेरा तहसील के ढाणी बोराज गांव में खीरे की खेती के लिए गंगवार की पत्नी डॉ. रंजीता सिंह और अन्य के नाम पर लिस्टेड एक प्रोजेक्ट को 2021-22 में उनके बैंक अकाउंट में 24.36 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। इस प्रोजेक्ट का एरिया 4,048 sq m है और लागत 49.31 लाख रुपये है। मई 2020 में जब एप्लीकेशन प्रोसेस शुरू हुआ, तब नरेश गंगवार राजस्थान सरकार में एग्रीकल्चर प्रोडक्शन कमिश्नर और प्रमुख सचिव थे। बाद में उन्होंने दिसंबर 2020 तक राज्य में प्रमुख सचिव, इंडस्ट्रीज़/MSME/ इन्वेस्टमेंट और NRIs, और OSD, भिवाड़ी इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट अथॉरिटी के तौर पर काम किया।

पत्नी, मां, बेटे और बेटी के नाम पर बताई संपत्ति

DoPT में 1 जनवरी, 2026 को फाइल किए गए 2024-2025 के लिए अपनी अचल संपत्ति की घोषणा में नरेश गंगवार ने ढाणी बोराज गांव में खसरा नंबर 1203/544 और 1205/544 में खेती की ज़मीन अपनी पत्नी, मां, बेटे और बेटी के नाम पर बताई।

नरेश गंगवार ने अपनी घोषणा में बताया, “मालिकों (रंजीता सिंह, बिंदुमती, कुमार रित्विक, चित्रांगदा सिंह) द्वारा संबंधित जमीन पर कमर्शियल बागवानी के लिए 50 लाख रुपये का एक प्रोजेक्ट NHB द्वारा ‘बागवानी फसलों के प्रोडक्शन और कटाई के बाद मैनेजमेंट के ज़रिए कमर्शियल बागवानी का विकास’ स्कीम के तहत मंज़ूर किया गया है। इस प्रोजेक्ट को बैंक लोन और NHB से सब्सिडी (प्रोजेक्ट लागत का 75%) और मालिकों के योगदान (प्रोजेक्ट लागत का 25%) से फंड किया जाएगा। मालिकों का योगदान मालिक अपनी बचत से जुटा रहे हैं। दूसरे डेवलपमेंट के काम और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे ऑफिस और रेसिडेंस वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, बाउंड्री वॉल (लगभग 40 लाख रुपये) अपनी बचत से करेंगे।”

ऑल इंडिया सर्विसेज़ कंडक्ट रूल्स क्या कहता है?

ऑल इंडिया सर्विसेज़ (AIS) कंडक्ट रूल्स, 1968 के अनुसार, क्लास I और क्लास II अधिकारियों को अपनी खरीदी या विरासत में मिली या लीज़ या मॉर्गेज पर रखी गई सभी अचल प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी देनी होती है, चाहे वह अपने नाम पर हो या परिवार के किसी सदस्य के नाम पर हो या किसी अन्य डिपेंडेंट के नाम पर हो। इंडियन एक्सप्रेस से ईमेल किए गए सवाल का जवाब देते हुए नरेश गंगवार ने कहा कि AIS (कंडक्ट) रूल्स, 1968 का सेक्शन 2 (b) ‘मेंबर ऑफ़ फ़ैमिली’ की परिभाषा देता है, जिसमें कहा गया है कि वे लोग (जिनमें माता-पिता या बेटा/बेटी शामिल हैं) जो पूरी तरह से सरकारी कर्मचारी पर निर्भर हैं, वे परिवार के सदस्य की परिभाषा में आते हैं।

नरेश गंगवार ने कहा कि मेरी मां (श्रीमती बिंदुमती) और मेरा बेटा (कुमार रित्विक) मुझ पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मेरे सर्विस रिकॉर्ड में भी यह साफ तौर पर लिखा है कि वे मुझ पर निर्भर नहीं हैं। क्योंकि वे मुझ पर निर्भर नहीं हैं, इसलिए AIS (कंडक्ट) रूल्स, 1968 के अनुसार, उनसे जुड़ी जानकारी एनुअल प्रॉपर्टी रिटर्न में भरने की ज़रूरत नहीं है।”