साल 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर भारी बहुमत से सरकार बनाई थी। पार्टी ने चुनाव के दौरान दिल्ली मॉडल की तर्ज पर “सिख्या क्रांति” यानी शिक्षा में बड़ा बदलाव लाने का वादा किया था। कहा गया था कि सरकारी स्कूलों को इतना बेहतर बनाया जाएगा कि माता-पिता अपने बच्चों को भरोसे के साथ वहां पढ़ा सकें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण, बराबरी और समावेशी शिक्षा मिल सके।

चार साल बाद पंजाब में पढ़ाई के स्तर में कुछ सुधार जरूर दिखाई दे रहा है और कई पैमानों पर राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर भी बताया जा रहा है। लेकिन एक जांच में यह सामने आया है कि खुद आम आदमी पार्टी के ज्यादातर विधायक अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकारी स्कूलों पर भरोसा नहीं जता रहे हैं।

पंजाब के 117 विधायकों से संपर्क करके यह जानने की कोशिश की गई कि वे अपने बच्चों को किस तरह के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। 114 विधायकों ने सीधे जवाब दिया जबकि तीन मामलों में उनके परिवार के सदस्यों ने जानकारी दी। इस पूरी जानकारी से जो तस्वीर सामने आई, वह काफी दिलचस्प है।

117 विधायकों में से कुल 36 ऐसे हैं जिनके बच्चे अभी स्कूल में पढ़ रहे हैं। इनमें 31 विधायक आम आदमी पार्टी के हैं, दो कांग्रेस के, एक शिरोमणि अकाली दल का, एक बहुजन समाज पार्टी का और एक निर्दलीय विधायक है। मौजूदा समय में विधानसभा में आम आदमी पार्टी के 94 विधायक हैं, कांग्रेस के 16, अकाली दल के 3, भाजपा के 2, बसपा का 1 और एक निर्दलीय सदस्य है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 31 आम आदमी पार्टी के विधायकों में से सिर्फ एक विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना ऐसे हैं जिनके बच्चे 2025-26 के शैक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूल में पढ़ रहे हैं। बाकी लगभग सभी 30 विधायकों ने अपने बच्चों को भारत के नामी निजी स्कूलों या विदेश के स्कूलों में पढ़ने भेज रखा है।

इनमें से कम से कम 25 विधायकों ने अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में पहले ही करा दिया था, यानी वे विधायक बनने से पहले से ही वहां पढ़ रहे थे। फिर भी यह आंकड़ा उस पार्टी के लिए चुनौती जरूर खड़ी करता है जिसने शिक्षा सुधार को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है। 31 में से 27 आम आदमी पार्टी के विधायकों ने साफ बताया कि उनके बच्चे देश के निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। यही स्थिति अन्य दलों के पांच विधायकों की भी है। इन बच्चों को देश के प्रतिष्ठित स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है, जैसे देहरादून का दून स्कूल, हिमाचल प्रदेश का लॉरेंस स्कूल सनावर और ग्वालियर का सिंधिया स्कूल।

इन 27 आम आदमी पार्टी के विधायकों में से 10 ने अपने बच्चों को चंडीगढ़ या पंजाब से बाहर के आवासीय स्कूलों में भेजा है। इनमें तीन मंत्री भी शामिल हैं। बाकी 17 विधायकों ने अपने ही विधानसभा क्षेत्रों के निजी स्कूलों में बच्चों को दाखिला दिलाया है, जिनमें अधिकतर अंग्रेजी माध्यम के कॉन्वेंट स्कूल हैं।

पार्टी के दो विधायकों के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं

दो आम आदमी पार्टी के विधायकों ने बताया कि उनके बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं। एक विधायक ने कहा कि उनकी पत्नी और बच्चे अमेरिका के नागरिक हैं और वहीं रहते हैं, इसलिए बच्चा वहीं पढ़ रहा है। दूसरे विधायक की पत्नी ब्रिटेन की नागरिक है और उनका बेटा लंदन के स्कूल में पढ़ता है। एक अन्य विधायक ने बताया कि उनके दो बच्चे होम स्कूलिंग कर रहे हैं।

दूसरी पार्टियों के पांच विधायकों में से तीन ने अपने बच्चों को राज्य से बाहर के बड़े निजी स्कूलों में पढ़ने भेजा है, एक ने चंडीगढ़ में दाखिला कराया है और एक विधायक के बच्चे उसके अपने क्षेत्र के निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं। जब आम आदमी पार्टी के विधायकों से पूछा गया कि उन्होंने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ाया, तो उन्होंने कई वजहें बताईं। इनमें सीमित अवसर, निजी स्कूलों की तुलना में गुणवत्ता की कमी, परिवार या समाज का दबाव, अंग्रेजी माहौल की कमी और राज्य बोर्ड में बच्चों को शिफ्ट करने की हिचक जैसी बातें शामिल थीं।

एक विधायक ने बताया कि उन्होंने शिक्षक की कमी के कारण अपने बच्चे को सरकारी स्कूल से निकालकर निजी स्कूल में डाल दिया। वहीं तीन विधायकों ने साफ कहा कि उनके बच्चों का दोस्ती का दायरा भी निजी स्कूलों में ही है।

एक विधायक ने कहा कि सरकारी और निजी स्कूलों के सिलेबस में ज्यादा फर्क नहीं है, लेकिन अवसर और एक्सपोजर में अंतर है। उनकी बेटी स्कूल की ओर से विदेश भी गई थी, जो शायद सरकारी स्कूल में संभव नहीं होता। वहीं एक अन्य विधायक ने कहा कि उनके अपने इलाके के कई सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब है कि देखकर रोना आ जाए। कहीं बिल्डिंग नहीं है, कहीं शिक्षक नहीं हैं और कुछ स्कूल एक ही कमरे में चल रहे हैं।

हालांकि सुखवीर सिंह मैसरखाना अपने दो बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जनप्रतिनिधि खुद अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाएंगे तो वे लोगों को वहां पढ़ाने के लिए कैसे प्रेरित करेंगे। पंजाब सरकार ने 9वीं से 12वीं कक्षा तक के लिए 117 ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ भी शुरू किए हैं, जिनमें आधुनिक सुविधाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने का वादा किया गया है। कम से कम 10 आम आदमी पार्टी के विधायकों के बच्चे इन कक्षाओं में पढ़ रहे हैं, लेकिन सभी निजी स्कूलों में ही हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब को कुछ उपलब्धियां भी मिली हैं। 2024 के राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण में पंजाब ने अच्छा प्रदर्शन किया और कई कक्षाओं में शीर्ष स्थान हासिल किया। वहीं ग्रामीण भारत पर आधारित असर 2024 रिपोर्ट में गणित के सवाल हल करने में सुधार दिखा, हालांकि पढ़ने की क्षमता अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले महीने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा था कि सिख्या क्रांति के ऐतिहासिक परिणाम मिल रहे हैं और बेहतर गुणवत्ता के कारण कई छात्र निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आ रहे हैं। उन्होंने यह भी माना कि यह केवल नीति का नहीं बल्कि नैतिक और राजनीतिक सवाल भी है कि जनप्रतिनिधि अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं।

राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 2026-27 के बजट में शिक्षा के लिए 19,279 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है, जो पिछले साल से 7 प्रतिशत ज्यादा है। साथ ही “सिख्या क्रांति 2.0” शुरू करने की घोषणा की गई है, जिस पर अगले छह साल में 3,500 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में दाखिले घटते दिख रहे हैं। 2024-25 में सरकारी स्कूलों में 26.69 लाख छात्र थे, जो पिछले साल के 28.23 लाख से कम हैं। वहीं निजी स्कूलों में इसी अवधि में दाखिला 29.81 लाख से बढ़कर 30.63 लाख हो गया।

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी बड़ी समस्या है। आधे से ज्यादा स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं, लगभग 30 प्रतिशत स्कूलों में हेडमास्टर नहीं हैं और 40 प्रतिशत से ज्यादा ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर के पद खाली पड़े हैं। कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी वही कर रही है जिसकी वह पहले दूसरों की आलोचना करती थी। वहीं पूर्व शिक्षा मंत्री और कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा कि अगर सच में शिक्षा क्रांति आ गई है तो फिर पार्टी के अपने नेता अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ा रहे।

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 पंजाब सरकार ने शनिवार को पंजाब विधानसभा में बजट 2026-27 पेश करते हुए महिलाओं के लिए एक बड़ी वित्तीय सहायता योजना की घोषणा की। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इस पहल का अनावरण किया और राज्य भर की महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता देने के लिए 9300 करोड़ रुपये आवंटित किए। इस योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये मिलेंगे। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ाना और घरेलू निर्णय लेने में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक