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राष्ट्रपति चुनाव पर कांग्रेस ने नहीं खोले पत्ते, दलित नेता और पूर्व स्पीकर मीरा कुमार को बना सकती है उम्मीदवार!

मीरा कुमार बड़े दलित नेता और भूतपूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं। वो विदेश सेवा की अधिकारी भी रह चुकी हैं।
बिहार के सासाराम से जीतने वालीं मीरा कुमार 15वीं लोकसभा की अध्यक्ष रह चुकी हैं।

बीजेपी द्वारा बिहार के मौजूदा गवर्नर और दलित नेता राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब कांग्रेस भी राष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा कर सकती है। कोविंद के नाम के एलान के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने नाम का एलान करने से पहले सहमति नहीं ली, जबकि ऐसा करने का वादा किया था। लिहाजा, माना जा रहा है कि बीजेपी के दलित कार्ड के जवाब में कांग्रेस भी दलित नेता को राष्ट्रपति चुनाव में उतारेगी।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को इस पद के लिए चुनावी मैदान में उतार सकती है। मीरा कुमार बड़े दलित नेता और भूतपूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं। वो विदेश सेवा की अधिकारी भी रह चुकी हैं। बिहार के सासाराम से जीतने वालीं मीरा कुमार 15वीं लोकसभा की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्हें देश की पहली महिला स्पीकर होने का गौरव हासिल है।

मीरा कुमार का जन्म बिहार के भोजपुर जिले में हुआ है। वह देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं। मीरा कॉन्वेन्ट एडुकेटेड हैं। उनकी शिक्षा देहरादून, जयपुर और दिल्ली में हुई है। उन्होंने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज और मिरांडा हाउस से एमए और एलएलबी किया है।1970 में उनका चयन भारतीय विदेश सेवा के लिए हुआ। इसके बाद उन्होंने कई देशों में अपनी सेवा दी है। वो यूपीए-1 की मनमोहन सिंह सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री रह चुकी हैं। वो 8वीं, 11वीं, 12वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा की सदस्य रह चुकी हैं।

2014 के लोकसभा चुनाव में सासाराम संसदीय सीट पर मीरा कुमार का चुनाव प्रचार करने के दौरान उनसे बात करती सोनिया गांधी।
Express Photo By Prashant Ravi

मीरा कुमार ने साल 1985 में राजनीति में प्रवेश किया था। उस वक्त उन्होंने यूपी के बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव जाता था और प्रमुख दलित नेता और आज के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और बसपा सुप्रीमो मायावती को हराया था। इसके बाद वो 8वीं, 11वीं और 12वीं लोकसभा में दिल्ली के करोलबाग से सांसद चुनी गई थीं। 1999 में उन्हें करोलबाग से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने  अपने पिता की पारंपरिक सीट बिहार के सासाराम की ओर रुख किया, जहां से उन्होंने साल 2004 और 2009 का लोकसभा चुनाव जीता। हालांकि, 2014 के चुनाव में उन्हें वहां से भी हार का सामना करना पड़ा। उन्हें भाजपा के छेदी पासवान ने 63 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।

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