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पूर्व RBI गवर्नर का खुलासा- पीएमओ को भेजी थी बड़े घोटालेबाजों की लिस्ट, एक को भी नहीं पकड़ा

रघुराम राजन सितंबर 2013 से सितंबर 2016 तक आरबीआई के गवर्नर थे।

Raghuram Rajan, Raghuram Rajan RBI, Raghuram Rajan RBI Governor, Raghuram Rajan latest news, Raghuram Rajan newsएक कार्यक्रम के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फोटो)

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने संसदीय समिति को सौंपे एक रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने देश में हाई प्रोफाइल घोटालेबाजों की एक लिस्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी थी लेकिन उस पर क्या कार्रवाई हुई, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। अपनी रिपोर्ट में राजन ने कहा है कि बैंक अधिकारियों के अति उत्साह, सरकार की निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुस्ती तथा आर्थिक वृद्धि दर में नरमी डूबे कर्ज के बढ़ने की प्रमुख वजह है। इसके अलावा संसदीय समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को दिये नोट में उन्होंने कहा, ‘‘कोयला खदानों का संदिग्ध आवंटन के साथ जांच की आशंका जैसे राजकाज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के कारण यूपीए और एनडीए दोनों सरकारों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी हुई।’‘ राजन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।

राजन ने संसदीय समिति से कहा, “जब मैं गवर्नर था तब आरबीआई ने फ्रॉड मॉनिटरिंग का एक विभाग बनाया था ताकि छानबीन करने वाली एजेंसी को फ्रॉड केस की जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। मैंने तब पीएमओ को हाई प्रोफाइल फ्रॉड केस की लिस्ट भेजी थी और उनमें से किसी एक या दो घोटालेबाज की गिरफ्तारी के लिए कॉर्डिनेशन की गुजारिश की थी। मुझे नहीं मालूम कि उस बारे में क्या प्रगति हुई है। यह ऐसा मामला है जिस पर तत्परता से कार्रवाई होनी चाहिए थी।” राजन ने कहा कि दुर्भाग्यवश किसी भी एक बड़े घोटालेबाज की गिरफ्तारी नहीं हो सकी, इस वजह से ऐसे मामलों में कमी नहीं आ सकी। बता दें कि राजन सितंबर 2013 से सितंबर 2016 तक आरबीआई के गवर्नर थे।

राजन की रिपोर्ट पर कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है और पूछा है कि प्रधानमंत्री बताएं कि क्यों पीएमओ ने उन चिन्हित डिफाल्टरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के वक्त 2014 में एनपीए 2.83 लाख करोड़ का था जो मोदी सरकार में बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि, राजन ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में बैंकों का डूबा कर्ज या एनपीए 2006 से 2008 के दौरान बढ़ा जब देश की आर्थिक वृद्धि दर काफी तेज थी। राजन ने कहा कि यही वह समय था जब बैंकों ने गलतियां कीं। उन्होंने पीछे की वृद्धि और प्रदर्शन के आधार पर भविष्य का अनुमान लगा लिया और परियोजनाओं के लिए बड़ा कर्ज दिया, जबकि उनमें प्रवर्तकों की इक्विटी कम थी। राजन ने कहा कि कई बार बैंकों ने कर्ज देने के लिए प्रवर्तक के निवेशक बैंक की रिपोर्ट के आधार पर करार किया और अपनी ओर से पूरी जांच पड़ताल नहीं की।

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