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‘बाबरी मस्जिद विध्वंस को रोक सकते थे नरसिम्हा राव, लेकिन नहीं मानी बात’, तत्कालीन गृह सचिव ने राजीव गांधी को बताया दूसरा कारसेवक

पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में केंद्रीय गृह सचिव रहे माधव गोडबोले ने कहा- यदि राजीव गांधी ने एक्शन लिया होता तो इस मसले का हल निकल जाता क्योंकि दोनों पक्षों में राजनीतिक स्थिति उतनी दृढ़ नहीं थी, उस समय फैसला सभी को मंजूर हो सकता था।

पूर्व गृह सचिव माधव गोडबोले, फोटो सोर्स- एएनआई

Ayodhya Land Dispute, Supreme Court Decision: अयोध्या के जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ठीक पहले बयानों का दौर जारी है। दिसंबर 1992 में बाबरी विध्वंस के समय केंद्र सरकार में गृह सचिव रहे माधव गोडबोले ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और नरसिम्हा राव को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा, ‘हमने आर्टिकल-355 (Article 355 of Indian Constitution) के जरिये मस्जिद को कब्जे में लेने का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसके जरिये केंद्रीय सुरक्षा बलों को उत्तर प्रदेश भेजकर मस्जिद को बचाया जा सकता था और फिर राष्ट्रपति शासन (President Rule) लगाया जा सकता था।’ बता दें कि अयोध्या के जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसी महीने इसे सार्वजनिक किया जा सकता है। इसके मद्देनजर अयोध्या समेत सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अपनी किताब, ‘द बाबरी मस्जिद-राम मंदिर डिलेमा: एन एसिड टेस्ट फॉर इंडियन कॉन्स्टीट्यूशन’ में गोडबोले ने कहा, ‘राज्य सरकार का सहयोग नहीं मिलने के चलते हमने तत्काल व्यापक योजना तैयार की थी। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव इस बात को लेकर असमंजस में थे कि ऐसी परिस्थिति में उनके पास राष्ट्रपति शासन लागू करने का संवैधानिक अधिकार है या नहीं? उन्होंने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।’

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राजीव गांधी भी निशाने परः गोडबोले ने यह भी कहा, ‘यदि राजीव गांधी ने एक्शन लिया होता तो इस मसले का हल निकल जाता क्योंकि दोनों पक्षों में राजनीतिक स्थिति उतनी दृढ़ नहीं थी, उस समय फैसला सभी को मंजूर हो सकता था। राजीव गांधी बाबरी मस्जिद का ताला खोलने गए थे, उनके प्रधानमंत्री रहते हुए ही मंदिर का शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया था। मैंने उन्हें आंदोलन का दूसरा कारसेवक बताया था, पहले कारसेवक वो डीएम थे जिन्होंने यह सब शुरू करने की अनुमति दी थी।’

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