कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम ने गुरुवार को उस अपीलीय ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया, जिसमें उन्हें पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत न्यायिक अधिकारियों के फैसलों के निर्णयों के खिलाफ आने वाली अपीलों की सुनवाई के लिए नियुक्त किया गया था। इस बात की जानकारी इंडियन एक्सप्रेस को मिली है। इस ट्रिब्यूनल में 19 रिटायर्ड जजों को नियुक्त किया गया था
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस शिवगणनम को कलाकार नंदलाल बोस के पोते सुप्रबुद्ध सेन और कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख की अपीलों पर विशेष सुनवाई करने को कहा था। मोताब शेख बाद में फरक्का विधानसभा सीट से चुनाव जीत गए थे।
अदालत ने शेख और सेन समेत कुछ अपीलकर्ताओं की याचिकाओं पर जल्दी सुनवाई का आदेश दिया था। अपीलें जस्टिस शिवगणनम के पास भेजी गईं, जिन्हें उन्होंने स्वीकार कर लिया।
जस्टिस शिवगणनम ने पिछले साल सितंबर में कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल की सिफारिश पर चुने गए 19 पूर्व जजों में शामिल किया गया था। चुनाव आयोग ने 20 मार्च को उन्हें एकल सदस्यीय अपीलीय ट्रिब्यूनल के रूप में नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की थी।
इंडियन एक्सप्रेस को यह भी जानकारी मिली है कि जस्टिस शिवगणनम ने गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश पॉल को अपना इस्तीफा भेज दिया। भारत निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी इसकी सूचना दे दी गई है। संपर्क करने पर जस्टिस शिवगणनम ने कहा कि मैंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया है।
एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को बंगाल में लाखों मतदाताओं की पात्रता पर निर्णय लेने के लिए जिला न्यायाधीश और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रैंक के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया। न्यायालय ने पाया कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच विश्वास का अभाव है।
चुनाव आयोग द्वारा कुल 60.06 लाख मतदाताओं की सूची की समीक्षा की गई। 700 न्यायिक अधिकारियों द्वारा समीक्षा के बाद, 27.16 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय व्यवस्था स्थापित करने का आदेश दिया। बंगाल में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के खिलाफ 34 लाख से ज्यादा अपीलें दायर की गई थीं। इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 13 अप्रैल को यह जानकारी दी।
बाद में अदालत ने आदेश दिया कि बंगाल में मतदान से दो दिन पहले तक (पहले चरण के लिए 21 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 27 अप्रैल तक) न्यायाधिकरणों द्वारा निपटाए गए सभी अपीलों को मतदाता सूची में फिर से जोड़ा जा सकता है और मतदाताओं को मतदान करने की अनुमति दी जा सकती है। समय सीमा से पहले ऐसी 2,000 से भी कम अपीलों पर सुनवाई हुई। निर्णय प्रक्रिया के दौरान हटाए गए शेष 27.16 लाख मतदाता इस बार अपना वोट नहीं डाल सके।
राज्यपाल ने भंग की बंगाल विधानसभा, ममता बनर्जी ने नहीं दिया है सीएम पद से इस्तीफा
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने विधानसभा को भंग करने की घोषणा कर दी है। आज ही बंगाल विधानसभा का कार्यकाल भी पूरा हो रहा था। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभी तक अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया था। बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आए थे, जिसमें बीजेपी को 207 और टीएमसी को 80 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। पढ़ें पूरी खबर।
