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पूर्व जनरल का दावा: सेना को रोके नहीं रखा गया होता तो 2002 गुजरात दंगों में बच सकती थीं 300 जानें

गुजरात दंगों के दौरान सेना का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट जनरल जमीर उद्दीन शाह ने दावा किया कि यदि हमें समय पर सभी संसाधन मिल जाते तो कम से कम 300 लोगों की जान बचायी जा सकती थी।

पूर्व जनरल जमीर उद्दीन शाह (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

गुजरात में हुए वर्ष 2002 के दंगों के दौरान सेना का नेतृत्व कर रहे पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल जमीर उद्दीन शाह ने दावा किया है कि सेना को एक दिन तक रोके रखा गया। यदि उन्हें राज्य सरकार की तरफ से तत्काल वाहन व अन्य सुविधाएं मिल जाती तो करीब 300 लोगों की जान बच सकती थी। अपनी एक नई किताब के माध्यम से शाह ने कहा कि सेना के 3000 जवान एक मार्च को सुबह सात बजे अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचे। यहां उन्होंने पूरे एक दिन हवाई अड्डे पर वाहन और अन्य संसाधनों का इंतजार किया। लेकिन राज्य सरकार द्वारा देर से सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। एनडीटीवी के अनुसार, शाह ने कहा, “मैं और मेरी सेना करीब 34 घंटे तक एयरपोर्ट पर असहाय होकर पड़े रहे। हम गोलियों की आवाज सुन सकते थे, लेकिन कुछ नहीं कर सकते थे।” जल्द की शाह का एक संस्मरण ‘द सरकारी मुसलमान’ जारी होने वाला है। इसके माध्यम से वे यह बताने वाले है कि कैसे उन्होंने नरेंद्र मोदी के गृह राज्य में सेना का नेतृत्व किया।

पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल कहते हैं कि वे एक मार्च की सुबह 2 बजे तत्कालिन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के घर पहुंचे और पाया कि वहां रक्षा मंत्री जार्ज फार्नांडिज भी मौजूद थे। दोनों ने एक साथ देर रात खाना खाया था और उन्हें भी आमंत्रित किया था। वे कहते हैं, “मैंने भी डिनर किया लेकिन तुरंत ही नीचे चला आया। मेरे पास गुजरात का एक पर्यटन मानचित्र था और मुश्किल जगहों के बारे में पूछा गया था। मैंने राज्य में कानून-व्यवस्था लागू करने के लिए सेना को उतारने संबंधी कुछ जरूरी संसाधनों से संबंधित लिस्ट भी सौंपी और तत्काल मुहैया करने को कहा। इसके बाद मैं वापस हवाई अड्डे लौट आया। 1 मार्च 2002 को सुबह सात बजे तक सेना के 3000 जवान आ चुके थे, लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं करवाए गए थे। हमने उस कीमती समय को खो दिया। हमारे पास 2 मार्च को सिविल ट्रक, पुलिस गाइड, मजिस्ट्रेट और नक्शे पहुंचे।”

शाह कहते हैं कि दोनों नेताओं को देखकर मुझे काफी राहत मिली थी। मैनें कहा, “साहब ट्रॉप्स आने वाले हैं और मैं यहां हूं। मैं इस आश्वासन के साथ तुरंत वापस लौट गया कि सभी चीजें तत्काल भेजी जा रही है। उन्होंने सभी जरूरी चीजें मुहैया करवाई, लेकिन एक दिन बाद। वह एक प्रशासनिक विफलता थी। यदि समय पर सभी संसाधन मिल जाते तो हम राज्य को दंगा से एक दिन बचा लेते। तीन दिनों में 1044 जानें गई। हम 300 तो बचा ही सकते थे।”

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