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जस्टिस रंजन गोगोई को क्या मिलेगा, इस पर अटकलें थीं, पर इतनी जल्दी! क्या अंतिम किला भी ढह गया है? सहयोगी जज की टिप्पणी

दो साल पहले जनवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जजों जस्टिस गोगोई, जस्टिस लोकुर, जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोला था।

Author Edited By प्रमोद प्रवीण नई दिल्ली | Updated: March 17, 2020 8:01 AM
SC के पूर्व जज जस्टिस (रिटायर्ड) मदन बी लोकुर। (एक्सप्रेस फोटो- कमलेश्वर सिंह)

देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा में नामांकित किए जाने पर उनके पूर्व सहयोगी जस्टिस (रिटायर्ड) मदन बी लोकुर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। द इंडियन एक्सप्रेस से जस्टिस लोकुर ने कहा, “कुछ समय से अटकलें लगाई जा रही थीं कि जस्टिस गोगोई को क्या सम्मान मिलेगा। तो, ऐसे में उनका नामांकन आश्चर्यजनक नहीं है लेकिन जो आश्चर्य की बात है, वह यह है कि यह फैसला इतनी जल्दी आ गया। यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और अखंडता को फिर से परिभाषित करता है। क्या आखिरी किला भी ढह गया है?”

दो साल पहले जनवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जजों जस्टिस गोगोई, जस्टिस लोकुर, जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोला था और उनके आचरण पर सवाल उठाए थे। इन जजों ने विशेषकर महत्वपूर्ण मुकदमों के आवंटन को लेकर आपत्ति जताई थी।

जस्टिस गोगोई ने ऐसा कर तब अन्य जजों को आश्चर्यचकित किया था क्योंकि तब वो सीजेआई बनने की कतार में थे। प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान चारों जजों ने तब एक पत्र भी सार्वजनिक किया था जिसे उनलोगों ने तत्कालीन CJI को लिखा था। उस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने उन सवालों को उठाया था, जो सरकार और मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के बीच के रिश्ते को उजागर कर रहे थे।

प्रेस कॉन्फ्रेन्स करने वाले और जस्टिस गोगोई के साथ गौहाटी हाईकोर्ट में काम करने वाले दूसरे जज जस्टिस (रिटायर्ड) जे चेलमेश्वर ने जस्टिस गोगोई के राज्यसभा नामांकन पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। पीसी करने वाले चौथे जज जस्टिस (रिटायर्ड) कूरियन जोसेफ से संपर्क नहीं हो सका। हालांकि, पद पर रहते हुए ही जस्टिस जोसेफ और जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा था कि सेवानिवृत्ति के बाद वे सरकार द्वारा दिए गए किसी भी पद को स्वीकार नहीं करेंगे।

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