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NDA में एक और खटपट, LJP के बाद सबसे पुराने साथी अकाली दल ने दिखाए बागी तेवर

शिअद किसानों के मुद्दे पर केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार से नाराज है।

Sukhbir Singh Badal,शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल। (पीटीआई)

बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनडीए के घटक दल एलजेपी की नाराजगी के बीच भाजपा को अब पुराने सहयोगी दल शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। शिअद किसानों के मुद्दे पर केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार से नाराज है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने परोक्ष रूप से बुधवार (16 सितंबर, 2020) को भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी पार्टी किसानों के हित के लिए कुछ भी कुर्बान कर सकती है। दरअसल उन्होंने संसद में पेश किए गए कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन विधेयकों को जबर्दस्त विरोध किया और केंद्र सरकार से किसानों की चिंताएं दूर करने के लिए कहा।

सुखबीर बादल ने कहा शिअद केंद्र से अनुरोध करता रहा है कि कृषि से संबंधित इन तीनों विधेयकों पर जबतक कृषक संगठनों, किसानों और कृषि मजदूरों की सभी आपत्तियों का निराकरण नहीं हो जाता तब तक वह इन्हें संसद की मंजूरी के लिए पेश नहीं करे। इससे पहले मंगलवार को पंजाब के फिरोजपुर से सांसद बादल ने लोकसभा में आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 के खिलाफ यह कहते हुए वोट डाला कि यह प्रस्तावित कानून किसानों के हितों के विरूद्ध है।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने बीते सोमवार को कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक, किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन समझौता विधेयक और कृषि सेवा अध्यादेश और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक पेश किए। ये विधेयक अध्यादेशों का स्थान लेने के लिए पेश किए गए हैं।

बादल ने कहा, ‘इन विधेयकों को पेश करने से पहले उन्हें अपने सहयोगियों एवं कम से कम उन दलों से संवाद कर लेना चाहिए था जो निश्चित तौर पर किसानों की पार्टी है। जब मंत्रिमंडल की बैठक में यह विषय उठा था तब हमारी मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपनी आपत्ति प्रकट की थी।’ प्रस्तावित कानूनों पर अपनी चिंता प्रकट करतते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरे कृषि क्षेत्र एवं खरीद प्रणाली पर असर डालेंगे।

पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘यदि विधेयक संसद के विचारार्थ रखे जाते हैं तो शिअद उनका विरोध करेगा और वह किसानों के हितों के लिए कोई भी बलिदान देने को तैयार है क्योंकि यह हमारी राजनीति के केंद्र में है।’बादल ने कहा कि इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले सरकार को किसानों के साथ बैठक करनी चाहिए और उनकी चिंताओं का निराकरण करना चाहिए। देश के कुछ हिस्सों में किसान संगठन इन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि बिहार में एनडीए के घटक दल जेडीयू और एलजेपी के बीच तकरार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान के तेवर नरम नहीं पड़ रहे हैं। (एजेंसी इनपुट)

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