देशभर में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में कमी के संकेत जरूर मिले हैं लेकिन स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को घरेलू और यौन हिंसा का सामना शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक करना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार गांवों में 18-49 उम्र की लगभग हर चौथी विवाहित महिला अपने पति द्वारा हिंसा का शिकार हुई है जबकि शहर में यह आंकड़ा हर छठी महिला का है।
सर्वेक्षण में देशभर के 679238 परिवार शामिल किए गए जिसमें 716397 महिलाएं और 100977 पुरुष रहे। इसमें 18 से 49 वर्ष आयु वर्ग की विवाहित महिलाओं में से 22.3 फीसद ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी न कभी पति द्वारा की गई हिंसा का सामना किया है। हालांकि यह आंकड़ा एनएफएचएस-5 के 29.2 फीसद की तुलना में कम है फिर भी यह एक बड़ी सामाजिक चुनौती की ओर इशारा करता है।
शहरी और ग्रामीण महिलाओं के साथ वैवाहिक हिंसा
नए सर्वेक्षण में शहरी क्षेत्र में यह आंकड़ा 17.5 फीसद रहा जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 24.4 फीसद महिलाओं ने वैवाहिक हिंसा का अनुभव होने की बात कही है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली शारीरिक हिंसा के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है। एनएफएचएस-6 के अनुसार 2.7 फीसद महिलाओं ने बताया कि उन्हें गर्भावस्था के दौरान शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा। हालांकि पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 3.1 फीसद था।
नए सर्वेक्षण में शहरी क्षेत्रों में यह फीसद 2.3 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.9 फीसद दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली हिंसा नe केवल महिलाओं के स्वास्थ्य बल्कि नवजात शिशुओं के विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
युवा महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में भी कुछ कमी देखने को मिली है। 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग की 0.7 फीसद महिलाओं ने बताया कि 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले वे यौन हिंसा का शिकार हुई थीं। एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 1.2 फीसद था। नए सर्वेक्षण में शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 0.4 फीसद और ग्रामीण क्षेत्रों में 0.8 फीसद दर्ज किया गया है।
राज्यों में भी अलग-अलग स्थिति
हरियाणा में 18-49 साल की 13.6 फीसद महिलाओं ने एनएफएचएस-6 सर्वेक्षण में जीवनसाथी द्वारा हिंसा की सूचना दी। जबकि एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 17.9 फीसद था। नए सर्वेक्षण के दौरान हरियाणा में शहरी क्षेत्र में 16.1 फीसद और ग्रामीण क्षेत्र में 12.1 फीसद महिलाओं ने हिंसा की सूचना दी।
हिमाचल में 4.3 फीसद महिलाओं ने हिंसा की सूचना दी। पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 8.6 फीसद का था। नए सर्वेक्षण में शहरी क्षेत्र में आंकड़ा 3.1 फीसद और ग्रामीण क्षेत्र में 4.4 फीसद रहा। पंजाब में यह आंकड़ा 8.7 फीसद रहा जबकि पिछले सर्वेक्षण में आंकड़ा 11.6 फीसद था।
नए सर्वेक्षण में शहरी क्षेत्र में आंकड़ा 7.2 फीसद और ग्रामीण क्षेत्र में 9.7 रहा। उत्तर प्रदेश में हिंसा का आंकड़ा 28.5 फीसद रहा। जबकि पिछले सर्वेक्षण में आंकड़ा 34.9 फीसद था। नए सर्वेक्षण में आंकड़ा शहरी क्षेत्र में 20.7 फीसद और ग्रामीण क्षेत्र में 30.7 फीसद रहा।
उत्तरखंड में यह आंकड़ा 13.7 फीसद रहा। जबकि पिछले सर्वेक्षण में 15.3 फीसद था। नए सर्वेक्षण में शहरी क्षेत्र में आंकड़ा 16.5 फीसद और ग्रामीण क्षेत्र में 12.4 फीसद रहा। पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 19.0 फीसद रहा। जबकि पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 26.9 फीसद था।
नए सर्वेक्षण में शहरी क्षेत्र में आंकड़ा 19.1 फीसद और ग्रामीण क्षेत्र में 19.0 फीसद रहा। चंडीगढ़ में यह आंकड़ा 8.5 फीसद रहा। जबकि पहले यह आंकड़ा 9.7 फीसद था। वहीं दिल्ली में यह आंकड़ा 12.3 फीसद दर्ज किया गया जो पिछले सर्वेक्षण में 22.5 फीसद था।
54 साल में 5.2 से घटकर 1.9 हुई भारत की प्रजनन दर
1971 में भारत की कुल प्रजनन दर 5.2 थी। इसका मतलब था कि औसतन एक भारतीय महिला अपने जीवनकाल में पांच से ज्यादा बच्चों को जन्म देती थी। आज यह संख्या 1.9 रह गई है। पांच दशकों में यह गिरावट भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। SRS की रिपोर्ट में कई अलग-अलग पहलुओं पर जानकारी दी गई है। लेकिन इससे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर टीएफआर होती क्या है, इसके मायने क्या हैं और क्यों इसका कम होना देश मे चिंता की एक बड़ी वजह है।
