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इस बार जल्दी नहीं कम होंगे कोरोना केस? युवाओं में तेजी से फैल रहा संक्रमण

देश के जाने-माने वायरॉलजिस्ट डॉ शाहिद जमील ने कहा कि सरकार ने भी जनवरी में यह मानने की चूक कर दी कि कोविड भाग गया और अस्थायी अस्पताल तक खत्म कर दिए।

वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर शाहिद जमील ने कहा कि युवाओं में कोरोना तेजी से फैलने की वजह से फिलहाल कोरोना ग्राफ की लाइन फ्लैट हो पाई है। (फोटो- PTI)

क्या कोरोना संक्रमण पीक यानी शिखर को छू चुका है? हो सकता है। कुछ आंकड़े ऐसा संकेत देते मालूम होते हैं। लेकिन अगर यह पीक वाली बात सही है, तो भी इतना जान लीजिए कि इस बार संक्रमण संख्या एकदम से नीचे नहीं गिरने वाली। यह बात कही है देश के जाने-माने वायरॉलजिस्ट (वायरस विशेषज्ञ) डॉ शाहिद जमील ने। वे कहते हैं कि कोरोना संक्रमण के ग्राफ की लकीर फ्लैट तो होती दिख रही है लेकिन यह मत भूलिए कि लकीर कितनी ऊंचाई पर समतल हो रही है। औसतन, चार लाख केस प्रतिदिन!

इस बीच यूपी के आंकड़े बताते हैं कि हालांकि मरने वालों में ज्यादा संख्या पचास पार वालों की ही है, लेकिन संक्रमित वालों में आधे युवा हैं। आंकड़े यह भ्रम भी तोड़ते हैं कि बच्चे कोविड से इम्यून हैं क्योंकि एक साल के अंदर 80 बच्चे भी कोरोना की चपेट में जान गंवा चुके हैं। डॉ शाहिद जमील ने इंडियन एक्सप्रेस के एक्सप्लेन्ड लाइव कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण ग्राफ के फ्लैट होने के कुछ संकेत मिल रहे हैं। लेकिन यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि संक्रमण पीक पर है।

उन्होंने कहा, “ग्राफ फ्लैट हुआ भी है तो चार लाख प्रतिदिन पर। इस हालत में यह नहीं कहा जा सकता कि कोरोना के केस एकदम से घटेंगे—-ग्राफ की लाइन एकदम से नीचे को छलांग नहीं लगाने वाली। डॉ जमील अशोका यूनिवर्सिटी में बायोसाइंस स्कूल के निदेशक हैं।”

हम पीक-पीक-पीक जपे जा रहे हैं कि मानो पीक आते ही सब खत्म हो जाएगा। जी नहीं। पीक का मायने है कि आधा काम बाकी है। पीक के बाद दैनिक संक्रमण बहुत धीमी रफ्तार से कम होना शुरू होंगे। यह क्रम जुलाई और यहां तक कि अगस्त तक चल सकता है। वायरस विशेषज्ञ कहते हैं कि मान लीजिए कुछ हफ्तों में दैनिक संक्रमण संख्या दो लाख या एक लाख पर आ गई। सवाल यह है कि क्या एक लाख की संख्या छोटी है?

हालात बिगड़ते क्यों चले गए? इस सवाल के जवाब में डॉ जमील ने कहा कि यह ढील देने का नतीजा है। सितंबर से जुलाई के बीच जब मामले घट रहे थे, हम लापरवाह हो गए। अरे भई, क्रिकेट का नया खिलाड़ी भी जानता है कि गेंद से नज़र एक पल के लिए भी नहीं हटानी। सच तो यह है कि लोग पहली लहर में ज्यादा सावधान थे जब दैनिक संक्रमण 40 से 50 हजार के बीच हुआ करते थे। दूसरी लहर में तो जब रोज के मामले दो लाख हो गए, हम तब भी सचेत नहीं हुए।

उन्होंने कहा कि सरकार ने भी जनवरी में यह मानने की चूक कर दी कि कोविड भाग गया और अस्थायी अस्पताल तक खत्म कर दिए। डॉ जमील ऑक्सीजन सप्लाई के लिए बनी सुप्रीम कोर्ट की टास्क फोर्स की भी तारीफ नहीं कर सके। हमारे पास डाक्टरों की कमी है और हमने टास्क फोर्स में देश के सर्वोत्तम चिकित्सक डालकर उनसे ऑक्सीजन- ऑक्सीजन खिलवा रहे हैं। अरे, ये डॉक्टर हैं। इलाज करना जानते हैं। इन्हें सप्लाइ चेन और लॉजिस्टिक्स का क्या ज्ञान!

एक अन्य रिपोर्ट में यूपी के आंकड़ों के आधार पर इस सोच को बेमानी बताया गया है कि बच्चों या युवाओं पर कोरोना कम असर कर रहा है। योगी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक यूपी में कुल संक्रमण संख्या 15 लाख हो चुकी है और मृतक संख्या 16 हजार। एक अध्ययन के मुताबिक संक्रमित होने वालों में लगभग आधे युवा वर्ग के हैं। हालांकि मरने वालों में ज्यादा संख्या पचास पार वालों की ही है। इंडियन एक्सप्रेस द्वारा इकट्ठे किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि संक्रमित होने वालों में बच्चों की संख्या काफी है। एक साल के अंदर 80 बच्चे मरे भी हैं जिनकी उम्र दस साल या कम थी।

ये आंकड़े इस धारणा को झुठलाते हैं कि स्वस्थ युवकों को कोविड से कम खतरा है। 11 मई तक दर्ज हुए 15.45 लाख मामलों में 7.12 लाख वे लोग थे जो 21 से 40 साल की आयु वर्ग के थे। युवाओं की यह संख्या 46 प्रतिशत होती है। संक्रमित टीनेजरों और बच्चों की संख्या भी 1.39 लाख, यानी कुल का 9.02 प्रतिशत पाई गई है।

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