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आवश्यक वस्तु अधिनियम : क्या होगी तस्वीर, किसे होगा लाभ

फोरम ऑफ ट्रेडर्स आर्गनाइजेशन के मुताबिक, कानून में संशोधन से बड़े कारोबारी अनाज, दाल, खाद्य तेल, प्याज और आलू जैसे जरूरी जिंस की जमाखोरी कर सकते हैं, जिससे कीमतें बढ़ेंगी। फोरम के सचिव रबीन्द्रनाथ कोले के मुताबिक, विधेयक के पारित होने के एक दिन के भीतर ही प्याज के दाम 10 रुपए किलो बढ़ गए। आलू के दाम भी बढ़े हैं।

आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020 के कानून बनते ही जरूरी सामानों के दाम बढ़ गए।

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के दायरे से आलूू, प्याज, दाल-चावल, खाद्य तेल-तिलहन जैसी वस्तुएं निकल गई हैं। आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020 को संसद ने मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि आवश्यक वस्तुओं की सूची से इन सब्जियों और अनाज को निकालने से किसानों की आमदनी तेजी से बढ़ सकेगी। किसानों को उनकी उपज की बेहतर कीमत मिलेगी। कारपोरेट जगत अब खुल कर कृषि क्षेत्र में पूंजी लगाने में रुचि लेंगे। हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि धीरे-धीरे सब चीजें निजी क्षेत्र के हवाले की जा रही हैं। इससे आम आदमी महंगाई की चक्की में पिसेगा।

देश में 1950 के दौर में आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करने की जरूरत समझी गई। तब देश में गेहूं और धान की किल्लत थी। कुछ अन्य आवश्यक वस्तुओं की भी कमी थी। ऐसे माहौल में आवश्यक वस्तुओं या उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा उन्हें जमाखोरी एवं कालाबाजारी से रोकने के लिए वर्ष 1955 में आवश्यक वस्तु अधिनियम बनाया गया था। इसमें सिर्फ दाल, चावल, आलू, प्याज, दवाएं, रासायनिक खाद, दलहन और खाद्य तेल, पेट्रोलियम पदार्थ शामिल किए गए। समय- समय पर सरकारें इसमें बदलाव करती रही हैं।

आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत किसी वस्तु को ‘आवश्यक वस्तु’ घोषित करने से सरकार उस वस्तु के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है, साथ ही सरकार उस वस्तु के संबंध में एक स्टॉक सीमा भी लागू कर सकती है। इस अधिनियम की सूची में नामित वस्तु के भंडारण और आपूर्ति की लिमिट सरकार तय कर देती है। तय लिमिट से ज्यादा भंडारण होने पर जुर्माना, जेल और अन्य कार्रवाई की जाती है। कोरोना संक्रमण के दौर में सरकार ने फेस मास्क और सेनेटाइजर की अंधाधुंध बढ़ती कीमतों को इसी कानून के जरिए नियंत्रित किया था।

उस दौरान 10 रुपए वाले मास्क की कीमत 150 रुपए और 100 मिलीलीटर की सैनेटाइजर की शीशी 100 से 200 रुपए तक पहुंच गई थी। इसके बाद उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने इन चीजों के दर तय कर दिए थे।

अब इस अधिनियम में किए गए बदलाव के मुताबिक, इस सूची से अनाज, दाल-दलहन, खाद्य तेल-तिलहन, आलू और प्याज को हटा दिया है। इसका मतलब है कि इन वस्तुओं के भंडारण की सीमा हट गई है। अब इन वस्तुओं का ज्यादा भंडारण करने पर जेल नहीं होगी। कंपनियां या कोई व्यापारी इन वस्तुओं को किसी भी सीमा तक जमा करने को स्वतंत्र होंगे। सरकार ने जून में ही एक अध्यादेश के जरिए आलू-प्याज, दलहन-तिलहन आदि को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया था।

सरकार का कहना है कि जब देश में भुखमरी थी, अकाल पड़ता था, हमलोग बाहर से आए अनाज पर निर्भर थे, तब अनाज, दलहन, तिलहन, आलू-प्याज आदि को इस अधिनियम के तहत रखने की जरूरत थी। हरित क्रांति के बाद देश में अनाज, फल-सब्जियों की पैदावार काफी बढ़ी है। अब देश निर्यात करने की स्थिति में है।

पुराने कानून से हर जगह भंडारण पर पाबंदी लग जाती है, इस कारण आपूर्ति शृंखला की दिशा में निजी निवेश नहीं हो पाया। बड़े शीत भंडारण और भंडारण केंद्र नहीं बन पाए। क्योंकि, उन्हें पाबंदी लगने का डर था। नए नियम से निजी निवेश बढ़ेगा। फल-फूल सब्जियों की आपूर्ति शृंखला बेहतर होगी। दूसरी ओर, अर्थशास्त्रियों को भय है कि इससे ग्रामीण गरीबी बढ़ सकती है। आवश्यक वस्तु अधिनियम में किए गए बदलाव से जन वितरण प्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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