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आयुर्वेद चिकित्सा : सेवा के साथ कमाई

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसमें किसी बीमारी का इलाज प्राकृतिक तरीके से किया जाता है। इस पर लोगों का भरोसा कायम है, इसलिए यह क्षेत्र करिअर के लिहाज से भी काफी समर्थ होता जा रहा है।

Author Published on: July 16, 2020 2:57 AM
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग कर इलाज किया जाता है। यह पूरी तरह से सुरक्षित और बिना किसी साइड-इफेक्ट का होता है।

कोरोना विषाणु संक्रमण महामारी के इस दौर में आयुर्वेद चिकित्सा ने लोगों पर अपना प्रभाव और बढ़ाया है। संक्रमण से बचने के लिए लोग आयुर्वेदिक काढ़े पी रहे हैं और आयुर्वेद के विभिन्न नुस्खों को अपना रहे हैं। चिकित्सा की इस प्राचीन पद्धति पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है और इसको पसंद करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में यह करिअर के बेहतर विकल्प के रूप में भी सामने आया है। अगर आप भी अपना भविष्य इसमें संवारना चाहते हैं, तो आपके लिए अवसरों की कमी नहीं है।

आयुर्वेद को सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति माना जाता है। इसलिए, आयुर्वेद को जीवन का विज्ञान कहा जाता है। इस चिकित्सा पद्धति की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसमें किसी बीमारी का इलाज प्राकृतिक तरीके से किया जाता है। इस पर लोगों का भरोसा कायम है, इसलिए यह क्षेत्र करिअर के लिहाज से भी काफी समर्थ होता जा रहा है।

देश में आयुर्वेद पाठ्यक्रम और शिक्षण संस्थान भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद द्वारा संचालित है। आयुर्वेद के पाठ्यक्रम विशेषज्ञता के 17 क्षेत्र हैं। अगर आप आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपाधि लेना चाहते हैं, तो इन विषयों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं।

आयुर्वेद चिकित्सा के पाठ्यक्रमों की बात करें तो बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) की अवधि पांच साल छह महीने है। इसमें छह महीने की इंटर्नशिप भी शामिल है। बीएएमएस में दाखिला लेने के लिए आवेदक को किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड से भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान विषयों के साथ 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।

आयुर्वेद में स्नातकोत्तर उपाधि भी दी जाती है। इस पाठ्यक्रम की अवधि तीन साल है। बीएएमएस उपाधि धारक उम्मीदवार इस पाठ्यक्रम के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा आयुर्वेद चिकित्सा में पीएचडी, बैचलन आॅफ फॉर्मेसी इन आयुर्वेद और डिप्लोमा इन आयुष नर्सिंग एंड फॉर्मेसी का पाठ्यक्रम भी कर सकते हैं।
बीएएमएस पाठ्यक्रम में एमबीबीएस के लिए आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय प्रवेश एवं योग्यता परीक्षा (नीट) में प्राप्त अंकों से तैयार योग्यता सूची के आधार पर दाखिला दिया जाता है। दाखिले के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा में भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान से संबंधित साल पूछे जाते हैं।

एलोपैथी दवा की बढ़ती कीमत और दिन-प्रतिदिन इसके बढ़ते विपरीत प्रभावों की वजह से लोग एलोपैथी उपचार से दूरी बढ़ा रहे हैं और आयुर्वेद की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। आयुर्वेद चिकित्सा के विकास और विस्तार के लिए भारत सरकार द्वारा केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएस) को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान के रूप में गठित किया गया है। पिछले कुछ सालों में ऐसी कंपनियों की संख्या काफी बढ़ी है, जो आयुर्वेदिक दवाइयों के निर्माण और शोध में लगी हैं। आयुर्वेद चिकित्सा में काफी तेजी से बदलाव आ रहे हैं। विश्वसनीय चिकित्सा पद्धति होने के कारण लोग अब इसे काफी पसंद कर रहे हैं। कोरोना महामारी ने लोगों का विश्वास आयुर्वेद पर और अधिक बढ़ाया है।

आयुर्वेद की पढ़ाई करने के बाद उम्मीदवार सरकारी एवं निजी अस्पतालों में सेवाएं दे सकते हैं। इसके अलावा उम्मीदवार खुद का क्लीनिक खोलने का विकल्प भी आपके पास है। अगर उम्मीदवार अध्यापन के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, तो किसी आयुर्वेद कॉलेज में सेवाएं दे सकते हैं। इसके अलावा दवा कंपनियों में भी उम्मीदवारों के लिए तमाम अवसर हैं।

आयुर्वेद में स्नातक उपाधि हासिल करने के बाद किसी सरकारी अस्पताल या निजी अस्पताल में नौकरी मिलने पर 25-35 हजार रुपए प्रतिमाह आसानी से मिल जाते हैं। स्नातकोत्तर या पीएचडी करने के बाद वेतन और अधिक बढ़ता है। स्नातकोत्तर करने के बाद बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर ज्वॉइन करने पर 45-50 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिल सकता है। चाहे तो खुद का क्लिनिक या खुद की दवा कंपनी खोल मनचाहा मुनाफा कमाया जा सकता है।

ये गुण हैं जरूरी
आयुर्वेद में करियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थी के लिए सबसे जरूरी है कि उसे चिकित्सा में रुचि और काम करने की लगन व चाहत हो। विपरीत परिस्थितियों में भी संयम से काम लेने की क्षमता होना जरूरी है। हर पल कुछ नया जानने व करने की इच्छा हो। मेहनत के साथ लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहने के अलावा रिसर्च करने की क्षमता होना जरुरी है।

इस क्षेत्र में करियर बनाने वाले अभ्यर्थी को संस्कृत की अच्छी समझ होनी चाहिए।
इस क्षेत्र में काम करने का एक अलग सुकून है। लोगों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने पर अलग ही संतुष्टि मिलती है। खास बात है कि इस क्षेत्र में पद व प्रतिष्ठा भी सम्मानित होती है। मगर, काम करने के घंटों की कोई सीमा तय नहीं है। सबसे खास बात कि इस क्षेत्र में रहते हुए आपको ताउम्र पढ़ाई और रिसर्च करते रहना पड़ता है।

ऋ नेशनल इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद, जयपुर
ऋ डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, जोधपुर
ऋ इंस्टीट्यूट आफ पोस्ट ग्रेजुएट टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद, जामनगर (गुजरात)
ऋ फैकल्टी आफ आयुर्वेद, इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (बीएचयू), वाराणसी
ऋ आयुर्वेद एंड यूनानी तिब्बिया कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) अजमल खान रोड, करोल बाग, नई दिल्ली
ऋ डॉ. बीआरकेआर आयुर्वेद कॉलेज, एसआर नगर, हैदराबाद
ऋ एसवी आयुर्वेद कॉलेज टीटी देवस्थानम, तिरुपति
ऋ गवर्नमेंट आयुर्वेद कॉलेज जलुकबरी, गुवाहाटी
ऋ गवर्नमेंट आयुर्वेद कॉलेज, रायपुर

ऋ अगद तंत्र (मेडिकल ज्यूरिसप्रूडेंस एंड टॉक्सिकोलॉजी)
ऋ द्रव्य गुण ( मैटेरिया मेडिका एंड फामार्कोलॉजी)
ऋ काया चिकित्सा (इंटरनल मेडिसिन)
ऋ बाल रोग (पीडियाट्रिक्स)
ऋ मौलिक सिद्धांत (फंडामेंटल प्रिंसिपल)
ऋ पंचकर्मा (पेंटा बायो-प्यूरीफिकेशन मेथड)

ऋ प्रसूती एवं स्त्री रोग (आब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी)
ऋ रसशास्त्र व भेषज्य कल्पना या रस चिकित्सा (लैट्रोकैमिस्ट्री)
ऋ रोग व विकृति विज्ञान (पैथोलॉजी)
ऋ शलक्या तंत्र (आई एंड ईएनटी)
ऋ शल्य तंत्र (सर्जरी)
ऋ शरीर क्रिया (फिजियोलॉजी)
ऋ शरीर रचना (एनाटॉमी)
ऋ स्वस्थ वृत्त (प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन)

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