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नरेंद्र मोदी सरकार का सूबों को निर्देश- श्रमिकों को सड़क या पटरियों पर चलने से रोकें

गृह मंत्रालय ने इसके अलावा चिकित्सकों, पराचिकित्सकों की आवाजाही पर कुछ राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से लगाई गई पाबंदियों पर आपत्ति जताई, कहा वे स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।

महाराष्ट्र के नागपुर में पैदल और ट्रक के जरिए गृह राज्यों के लिए रवाना होते प्रवासी मजदूर। (फोटोः पीटीआई)

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बावजूद देशभर में मजदूरों का गृह राज्यों की ओर पलायन फिलहाल जारी है। गृह मंत्रालय ने इसी पर राज्यों को सख्त निर्देश दिया है कि वे श्रमिकों और अन्य लोगों को सड़क या रेल पटरियों के रास्ते होकर घर-गांव जाने से रोकें। राज्यों को यह ही भी सलाह दी गई कि अगर मजदूर फिर भी ऐसा करते हैं, तब उन्हें भरोसे में लिया जाए। समझा-बुझाकर किसी तरह शेल्टर होम्स में ले जाया जाए। अब और श्रमिक ट्रेनें चलने वाली हैं। राज्यों से उन्हें आगमन की मंजूरी देने के लिए कहें।

सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में केन्द्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने उनसे प्रवासी मजदूरों के लिए और श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाने में रेलवे का सहयोग करने की अपील भी की है। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा के साथ रविवार को हुई बैठक का जिक्र करते हुए भल्ला ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के सड़कों और रेलवे की पटरियों पर चलने की घटनों पर गंभीरता से संज्ञान लिया गया।

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उन्होंने कहा, ‘‘ उनकों घरों तक ले जाने के लिए बसें और श्रमिक विशेष ट्रेनें शुरू हो गई हैं, इसलिए राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रवासी मजदूर सड़कों और रेलवे की पटरियों पर पैदल चल वापस लौटने की कोशिश ना करें।’’

गृह सचिव ने कहा कि उनके ऐसी स्थिति में मिलने पर, जब तक उनके घर लौटने के लिए श्रमिक विशेष ट्रेन या बस की सुविधा नहीं हो जाती है, उन्हें उचित परामर्श दिया जाना चाहिए, उन्हें नजदीकी आश्रयों में ले जाया जाना चाहिए और भोजन, पानी आदि प्रदान किया जाना चाहिए। भल्ला ने कहा कि कैबिनट सचिव के अनुरोध पर सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाने के लिए रेलवे का सहयोग करना चाहिए ताकि अधिक प्रवासी मजदूर जल्द से जल्द अपने घर लौट पाएं।

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उन्होंने कहा, ‘‘ मैं आप सभी से अपील करता हूं कि बिना किसी अवरोध के इन श्रमिक विशेष ट्रेनों को अपने राज्य में आने दें और फंसे हुए प्रवासी मजदूरों को जल्द से जल्द उनके घर पहुंचाने में मदद करें।’’ बता दें कि मध्य प्रदेश लौट रहे 16 प्रवासी मजदूर पिछले सप्ताह महाराष्ट्र के औरंगाबाद में ट्रेन से कट कर मारे गए थे। ये मजदूर पैदल अपने घर लौट रहे थे और थके होने के कारण पटरी पर ही सो गए थे।

गृह मंत्रालय ने इसके अलावा चिकित्सकों, पराचिकित्सकों की आवाजाही पर कुछ राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से लगाई गई पाबंदियों पर आपत्ति जताई, कहा वे स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।

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मंत्रालय के मुताबिक, चिकित्सा पेशेवरों की आवाजाही पर रोक लगाना कोविड, गैर कोविड सेवाओं को गंभीर रूप से बाधित करना है। सभी निजी क्लिनिकों, नर्सिंग होम, लैबों को तमाम चिकित्सा स्टाफ के साथ खोला जाना सुनिश्चित करें।

केंद्र का इस बाबत निर्देश तब आया है, जब हाल-फिलहाल में दिल्ली-एनसीआर में कई डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मचारियों को ड्यूटी पर जाने या घर लौटने के दौरान विभिन्न जगहों पर आपत्ति जताई गई थी।

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