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मानसी : पैर गंवाया पर बैडमिंटन में कीर्तिमान रच बनीं ‘बार्बी डॉल’

मानसी ने बैडमिंटन की विश्व प्रतियोगिता में सोना जीता है और ऐसा कीर्तिमान रचने वाली वे देश की पहली पैरा शटलर हैं। अक्तूबर 2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए एशियाई पैरा गेम्स में उन्होंने भारत के लिए कांस्य पदक जीता।

स्विटजरलैंड के बेसेल में हुई पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली मानसी जोशी।

कभी सड़क हादसे में पैर गंवा बैठी थी इंजीनियर मानसी जोशी। लगा सब कुछ खत्म हो गया। लेकिन हार नहीं मानी और शोहरत और कामयाबी का ऐसा नया रास्ता खुला, जिससे मिसाल कायम हो गया। बैडमिंटन के खेल में कीर्तिमान रचने वाली मानसी को टाइम पत्रिका ने ‘नेक्स्ट जनरेशन लीडर 2020’ सूची में शामिल किया ही है, मशहूर ‘बार्बी डॉल’ बनाने वाली कंपनी ने उनके जैसी गुड़िया बनाकर उनकी तमाम उपलब्धियों का सम्मान किया है।

मानसी ने बैडमिंटन की विश्व प्रतियोगिता में सोना जीता है और ऐसा कीर्तिमान रचने वाली वे देश की पहली पैरा शटलर बन गई हैं। मानसी जोशी की जिंदगी वक्त के बेरहम और मेहरबान हो जाने की बड़ी दिलचस्प दास्तान है। 2011 में अपना पांव गंवाने वाली मानसी अपनी कड़ी मेहनत और कुछ कर गुजरने के जज्बे के दम पर टाइम पत्रिका की सूची में शामिल हुई हैं और पत्रिका के एशिया संस्करण के आवरण पर अपनी जगह बना चुकी हैं।

मानसी इस सूची में शामिल दुनिया की पहली पैरा एथलीट और भारत की पहली एथलीट हैं। इस सम्मान पर मानसी जोशी ने कहा, ‘टाइम की सूची में शामिल होना मेरे लिए सम्मान की बात है। मुझे लगता है कि एक पैरा एथलीट को इतनी प्रतिष्ठित पत्रिका के कवर पर देखकर लोगों की दिव्यांग्यता के प्रति सोच बदलेगी और भारत तथा एशिया में पैरा स्पोर्ट्स के प्रति भी लोगों का रवैया बदलेगा।’

वर्ष 2011 में हुई सड़क दुर्घटना को लेकर वे कहती हैं कि मैंने विषम परिस्थितियों को अपने हक में मोड़ना सीख लिया। ग्यारह जून 1989 को जन्मी मानसी जोशी छह साल की उम्र से अपने पिता के साथ बैडमिंटन खेला करती थीं। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद मानसी ने 2010 में मुंबई विश्वविद्यालय के केजे सोमैया कॉलेज आफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग में पढ़ाई पूरी की और साफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करने लगी, लेकिन दिसंबर 2011 में वह अपनी मोटरबाइक से काम पर जाते हुए एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गईं और उनकी एक टांग काट देनी पड़ी।

निराशा और हताशा के उस दौर से निकलने के लिए मानसी ने बैडमिंटन को अपना सहारा बनाया और पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी नीरज जार्ज की सलाह पर उन्होंने प्रतिस्पर्धा के स्तर पर खेलने का फैसला किया और कड़ी मेहनत करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के बाद स्पेन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पहली बार हिस्सा लिया। वर्ष 2015 में इंग्लैंड के स्टोक मैंडविल में मानसी ने पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप की मिश्रित युगल स्पर्धा में रजत पदक जीता।

अक्तूबर 2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए एशियाई पैरा गेम्स में मानसी ने भारत के लिए कांस्य पदक जीता। 2018 में ही उन्होंने बैडमिंटन के जादूगर पुलेला गोपीचंद की हैदराबाद स्थित अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया। 2019 में इस प्रशिक्षण का असर दिखाई देने लगा और अगस्त में स्विटजरलैंड के बेसेल में हुई पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।

हाल ही में बॉर्बी डॉल बनाने वाली कंपनी ने उनके जैसी गुड़िया बनाकर उनकी तमाम उपलब्धियों का सम्मान किया है। मानसी जोशी ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, धन्यवाद बार्बी। यह अतुलनीय है कि एक बार्बी डॉल मुझसे प्रेरित होकर बनी है।

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