ताज़ा खबर
 

यूपी के एनकाउंटर्स का सच: न FIR की कॉपी दी और न ही पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट, उलटा परिजन को फर्जी केस में फंसाया

यूपी की मुठभेड़ों का सच जानने के लिए इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर राज्य भर में 27 परिवारों के यहां पहुंचे। पढ़ें मनीष साहू, हमजा खान, अदिति वत्स, अभिषेक अंगद, सारा हफीज और अपूर्वा की रिपोर्ट के प्रमुख अंश।

जय हिंद यादव के परिजन, जो आजमगढ़ में हुए एनकाउंटर में मारा गया था। (एक्सप्रेस फोटो)

उत्तर प्रदेश में होने वाले एनकाउंटर्स से जुड़ा हैरान करने वाला सच सामने आया है। अधिकतर मामलों में मारे गए कथित अपराधियों के परिजन की शिकायत है कि पुलिसिया कार्रवाई के दौरान उन्हें प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा। न तो उन्हें दर्ज कराई गई एफआईआर की कॉपी दी गई। न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट सौंपी गई। कुछ मामलों में तो परिजन के हवाले शव भी नहीं किया गया। जब सही कार्रवाई करने पर परिजन ने जोर दिया, तो पुलिस ने उल्टा उन्हीं को फर्जी मामलों में फंसा दिया। कई परिवार तो इसी चक्कर में पैतृक निवास स्थानों को लौट गए और वहीं बस गए।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की पड़ताल में ये बातें हाल ही में सामने आईं हैं। हमारे रिपोर्टर राज्य के 27 उन परिवारों से मिले, जिनकी संतानें एनकाउंटर में मारी गईं। 63 लोगों के एनकाउंटरों के मामले में 20 से अधिक परिवारों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), राज्य अधिकार पैनल (एसएचआरसी), राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) और अन्य फोरमों में मदद की गुहार लगाई। वहीं, 39 मामलों में पुलिस जांच जारी है। एनएचआरसी इनमें से 17 की जांच करा रही है, जबकि चार की जांच का जिम्मा एसएचआरसी के पास है।

HOT DEALS
  • Samsung Galaxy J6 2018 32GB Black
    ₹ 12990 MRP ₹ 14990 -13%
    ₹0 Cashback
  • Sony Xperia XZs G8232 64 GB (Warm Silver)
    ₹ 34999 MRP ₹ 51990 -33%
    ₹3500 Cashback

आजमगढ़ में आठ जनवरी को छन्नू सोनकर (24) का एनकाउंटर हुआ। लेकिन परिजन को न तो एफआईआर की कॉपी मिली न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट। परिजन के मुताबिक, छन्नू पर बाइक व जेवर चोरी का आरोप था। पर वह बाइक उसी की थी। पुलिस से लाश मांगी गई, तो डांट कर भगा दिया गया। वहीं, लखीमपुर खीरी के बग्गा सिंह का एनकाउंटर 17 जनवरी को हुआ था, जिसके बाद परिजन गांव छोड़कर पंजाब चले गए थे।

ग्रेटर नोएडा में सुमित गुर्जर का एनकाउंटर अक्टूबर 2017 में हुआ। पुलिस ने उसके चचेरे भाई को रेप के फर्जी केस में फंसा दिया। पुलिस ने दावा किया किया उसने कुछ चोरियां भी पूर्व में कीं। मगर परिजन ने इन आरोपों से इन्कार किया।

सहारनपुर के शमशाद का एनकाउंट भी पिछले साल हुआ था। परिजन बोले- हमें जब लाश मिली तो उस पर छह-सात गोलियों के निशान थे। साथ ही गले, कमर और पैरों के पास रस्सी से बंधे होने के निशान पड़े थे। ऐसा लग रहा था कि जैसे उसे लटका कर टॉर्चर किया गया हो।

मेरठ में सिंतबर 2017 में मंसूर का एनकाउंटर किया गया था। एफआईआर के मुताबिक, पूछताछ की रात ही वह मार दिया गया था। उस पर गाड़ी चुराने का आरोप था। रात में घर से पुलिस ने उसे उठा लिया था। अगले दिन पुलिस घर पर आई और कुछ कागजों पर परिजन के दस्तखत ले कर चली गई। घर वालों को तब पता लगा था कि मंसूर मार दिया गया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App