राज्यसभा में पेश निजी विधेयक में दो बच्चों के परिवार पर जोर

भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने पेश किया है ‘जनसंख्या विनियमन विधेयक-2019’, 30 जुलाई या छह अगस्त को उच्च सदन में चर्चा होने की संभावना

Population Control Bill
बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के लिए लंबे समय से नीतियां बनाने की मांग हो रही हैं। (फोटो- रॉयटर)

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर राज्यसभा में एक निजी सदस्य विधेयक पर 30 जुलाई या छह अगस्त को चर्चा होने की संभावना है। राज्यसभा में ‘जनसंख्या विनियमन विधेयक-2019’ पेश किया गया है। यह निजी सदस्य विधेयक (प्राइवेट मेंबर बिल) राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने सदन के उच्च सदन में पेश किया है। सिन्हा ने बताया कि सदन में पेश इस विधेयक पर 30 जुलाई या छह अगस्त को सदन में बहस हो सकती है। यह विधेयक हालांकि 2019 में पेश किया गया था लेकिन तब से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था।

हाल में उत्तर प्रदेश सरकार ने जनसंख्या नीति 2021-30 जारी की है जो विवादों में आ गई है। इसमें जनसंख्या स्थिरीकरण का लक्ष्य तय किया है। यूपी के विधि आयोग ने सरकार को एक कानून का मसविदा भेजा है जिसमें दो से ज्यादा बच्चों वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक, सरकारी नौकरी में रोक, इत्यादि का प्रस्ताव हैं। राकेश सिन्हा द्वारा राज्यसभा में पेश विधेयक के माध्यम से देश में छोटा परिवार यानी दो बच्चों वाले परिवार के मानकों को लागू करने और उनके प्रभावों को, कानून के प्रारूप, लागू करने वाली एजंसियों आदि की रूपरेखा सरकार के सामने रखी गई है। राकेश सिन्हा ने बताया कि इस विधेयक को अगस्त 2019 में पेश किया गया था और अब एक बार फिर से इसे सदन में लाया गया है।

उन्होंने बताया कि राज्यसभा में प्राइवेट मेंबर बिल व प्रस्ताव के लिए होने वाली लॉटरी के माध्यम से उन्हें यह कानून राज्यसभा में पेश करने का मौका मिला है। अब इस विधेयक पर चर्चा होनी है। इसके अतिरिक्त प्रस्ताव के जरिए भी इस मामले को सदन के सामने लाया गया है। इस प्रक्रिया में सांसद सिन्हा का पहला नाम आया था, जिसमें भी उन्होंने इस प्रस्ताव को चुना है।

राज्यसभा की कार्यसूची में बताया गया है कि इस विधेयक का उदेश्य देश में एक दपंति के दो बच्चों का परिवार यानी छोटे और सुखी परिवार को बढ़ावा देना है। इसका उद्देश्य देश मेंं दो बच्चों के बीच अंतराल, बच्चों की उचित देखभाल, उनका स्वस्थ माहौल में जन्म व प्रसूता को उचित सुविधा और पोषण उपलब्ध कराना है।

विधेयक में राज्यों, केंद्र सरकारों की ओर से प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं की हर व्यक्ति तक उपलब्धता, उनकी पहुंच और उसके सामर्थ्य के हिसाब से करने पर जोर दिया गया है। कहा गया है कि इसके अतिरिक्त सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, पोषण, महामारी विज्ञान, पर्यावरण और विकासात्मक आवश्यकताओं के साथ जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य को भी इस कानून के माध्यम से प्राप्त किया जा सकेगा।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।