कव‍ि मंगलेश डबराल नहीं रहे, 12 द‍िन पहले हुआ था कोरोना संक्रमण, द‍िल का दौरा पड़ने से न‍िधन

मंगलेश डबराल अपने पीछे कविताओं का ऐसा संसार छोड़ गए हैं, जो उनकी याद दिलाता रहेगा। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘नए युग में शत्रु’ और यात्रावृत्त ‘एक बार आयोवा’ आदि शामिल हैं।

Kumar Vishwas tributeसाहित्य अकादमी पुरस्‍कार से सम्‍मान‍ित मंगलेश डबराल की फाइल फोटो।

हिंदी के प्रख्यात कवि, पत्रकार एवं साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित मंगलेश डबराल का बुधवार (9 द‍िसंंबर) को कोरोना विषाणु संक्रमण से निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे। वे करीब 12 दिन पहले संक्रमित हुए थे। उन्होंने दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली।

जनसंस्कृति मंच से जुड़े और उनके नजदीकी रहे संजय जोशी ने बताया, ‘वे पिछले कुछ दिनों से गाजियाबाद के वसुंधरा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती थे और हालत बिगड़ने के बाद उन्हें उपचार के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था।’ उनके फेफड़े में संक्रमण था। मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी डबराल जनसंस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे। मंगलेश डबराल ने लंबे समय तक जनसत्ता के साहित्य पृष्ठ का संपादन किया। इससे पहले वे प्रतिपक्ष, पूर्वग्रह, अमृत प्रभात आदि पत्रिकाओं से जुड़े रहे। इस समय वे नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़े हुए थे।

जोशी ने बताया कि रघुबीर सहाय और मंगलेश डबराल दोनों पत्रकारिता से जुड़े थे, लेकिन डबराल का अपना सृजन कविता में था। पहाड़ के विस्थापन के अलावा उन्होंने शहरी जीवन पर काफी लिखा।

मंगलेश डबराल अपने पीछे कविताओं का ऐसा संसार छोड़ गए हैं, जो उनकी याद दिलाता रहेगा। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘नए युग में शत्रु’ और यात्रावृत्त ‘एक बार आयोवा’ आदि शामिल हैं।

डबराल को साहित्य अकादेमी पुरस्कार के अलावा शमशेर सम्मान, स्मृति सम्मान, पहल सम्मान और हिंदी अकादमी दिल्ली के साहित्यकार सम्मान से सम्मानित किया गया था।

उनके निधन की खबर पर साह‍ित्‍य व पत्रकार‍िता जगत में शोक है। कवि कुमार विश्वास दुख जताया और ट्विटर पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अलविदा श्री मंगलेश डबराल… विदा कवि।

पूर्व आप नेता ने आगे लिखा, ‘कितने सारे पत्ते उड़कर आते हैं, चेहरे पर मेरे बचपन के पेड़ों से, एक झील अपनी लहरें, मुझ तक भेजती है। लहर की तरह काँपती है रात और उस पर मैं चलता हूँ, चेहरे पर पत्तों की मृत्यु लिए हुए, लोग जा चुके हैं, रोशनियाँ राख हो चुकी हैं…।’

प्रख्यात कवि के निधन की जानकारी उनके कवि मित्र असद जैदी ने फेसबुक पर साझा की। उनका निधन दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलेश डबराल पिछले कई दिनों से काफी बीमार चल रहे थे। उन्हें इलाज के लिए गाजियाबाद के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। सांस लेने में तकलीफ के बाद एम्स में रेफर कर दिया। इस बीच उनकी हालत में कुछ सुधार हुआ मगर वो पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए। हालात ज्यादा खराब होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।

डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। बुधवार शाम को जब उन्हें डायलिसिस के लिए ले जाया गया तभी उनको दिल के दो दौरे पड़े। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की खूब कोशिश की मगर कामयाबी नहीं मिली।

मंगलेश डबराल वर्ष 2012 से गाजियाबाद स्थित वसुंधरा में जनसत्‍ता सोसायटी अपार्टमेंट के एक फ्लैैट में रहते थे। पत्नी संयुक्ता डबराल और बेटी अलमा डबराल (30) के साथ वह रह रहे थे। उनका बेटा मोहित (36) गुरुग्राम की एक कंपनी में स्क्रिप्ट राइटर हैं। वह पत्नी और बेटी के साथ गुरुग्राम में ही रहते हैं।

अलमा के मुताब‍िक 27 नवंबर को मंगलेश डबराल की तबीयत खराब हुई थी। उन्हें वसुंधरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी कोविड-19 टेस्ट रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी।

इलाज के बाद वह थोड़े ठीक हुए थे, लेकिन किडनी में बढ़ते इंफेक्शन से उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। तब चार दिसंबर की रात में एंबुलेंस से दिल्ली के एम्स में उन्‍हें भर्ती कराया गया था।

पांच दिसंबर को मंगलेश को वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया था। इस बीच ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण किडनी ने काम करना बंद कर दिया था। अस्पताल में बुधवार की शाम करीब साढ़े छह बजे उन्हें पहली बार दिल का दौरा पड़ा था और 07:10 बजे एक और दौरा पड़ा। यह उनकी जान ले गया।

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