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इंदिरा गांधी नहीं, इस शख्स के दिमाग की उपज थी इमरजेंसी, पीएम से पहले राष्ट्रपति से कर ली थी बात

भारत में लगी इमरजेंसी के पीछे जिस शख्स का दिमाग था वह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी नहीं थी। यह पूर्व नौकरशाह उस समय पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे सिद्धार्थ शंकर राय के दिमाग की उपज थी।

इंदिरा गांधी एसएस रे पर पूरी तरह से विश्वास करती थीं। (फोटोः एक्सप्रेस आर्काइव्स)

25 जून, 1975 को भारत में आपातकाल यानि इमरजेंसी घोषित की गई थी। इसके बारे में आज की पीढ़ी को बहुत कुछ मालूम नहीं है। उस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। निजी सचिव के रूप में आर.के. धवन उनकी आंख-कान थे। उन्होंने 2015 में इंडियन एक्सप्रेस के आईडिया एक्सचेंज कार्यक्रम में इमरजेंसी से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए थे।

कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य रहे धवन 1962 से लेकर इंदिरा गांधी की 1984 में हत्या होने तक उनके साथ ही थे। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था कि इंदिरा गांधी के दिमाग में तो “इमरजेंसी’ थी ही नहीं। उन्हें यह आईडिया देने वाला कोई और था। दरअसल इसके पीछे पूर्व नौकरशाह और पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे थे।

इमरजेंसी लगाने पर किया था सहमतः धवन ने कहा कि एसएस रे ने ही इंदिरा गांधी को यह बात विस्तार से समझाई थी कि संविधान के जरिये इमरजेंसी घोषित की जा सकती है। उन्होंने इंदिरा गांधी से पहले इस संबंध में राष्ट्रपति से भी बात कर ली थी। शाम में इंदिरा गांधी, एसएस रे और आरके धवन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के पास गए। इंदिरा गांधी राष्ट्रपति अहमद से यह जानना चाहती थीं कि रे ने उनसे क्या कहा है। साथ ही क्या वह उनसे सहम हैं।

राष्ट्रपति ने इमरजेंसी का मसौदा तैयार करने को कहाः राष्ट्रपति ने इस पर सहमति जताते हुए एसएस रे से इमरजेंसी का मसौदा तैयार करने को कहा। हालांकि, इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में हार के बाद उन्होंने इमरजेंसी के खिलाफ बातें कही थीं। 16 मार्च को उन्होंने लिखा था कि वह प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा के बिना भारत की कल्पना नहीं कर सकते हैं। बाद में शाह आयोग के सामने पेश होने के बाद उन्होंने इसका विरोध किया था।

इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 में इमरजेंसी लगाने की घोषणा की थी। (फोटो-एक्सप्रेस आर्काइव्ज)

आप तो बिल्कुल ठीक हैंः जब इंदिरा गांधी शाह आयोग के समक्ष पेश हुईं तो एसएस रे भी वहीं मौजूद थे। इंदिरा गांधी को देखते ही उन्होंने कहा, ‘ओह, आप तो बिल्कुल ठीक दिखाई दे रही हैं।’ इस पर इंदिरा का जवाब था, ‘आप मुझे फिट रखने के लिए अपना बेहतर प्रयास कर रहे हैं।’ रे ने इंदिरा के खिलाफ बयान दिया था।

इंदिरा गांधी के एसएस रे की सलाह मानने के सवाल पर धवन ने कहा कि उनकी सलाह मानने के कारण ही वह परेशानियों में फंसी थीं। उनको (इंदिरा गांधी) लगता था कि एसएस रे प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं। गांधी परिवार उनके पिता, माता और दादा को जानता है। धवन ने कहा कि यदि वह धवन की बात नहीं सुनतीं तो वह इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करतीं।

इंदिरा को पत्र लिख बताया था इमरजेंसी में क्या करना हैः धवन के पास एसएस रे का हाथ से लिखा हुए एक पत्र था जिसमें इंदिरा गांधी को बताया गया था कि इमरजेंसी के दौरान उन्हें क्या कदम उठाने हैं। यह पत्र जनवरी 1975 में लिखा गया था। इसका मतलब है इमरजेंसी लागू होने के छह महीने पहले।

इससे पहले धवन की नेहरू-गांधी परिवार में एंट्री यशपाल कपूर के फर्स्ट कजन के रूप में हुई थी। धवन ने नेहरू के कार्यालय में स्टेनोग्राफर के रूप में शुरुआत की थी। इसके बाद वह इंदिरा गांधी का सहयोग करने के लिए तीन मूर्ति भवन में शिफ्ट हो गए थे।

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