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Bhima Koregaon Case: वरवरा राव को HC से बेल, पर नहीं जा पाएंगे मुंबई से बाहर

उच्च न्यायालय ने राव को 6 महीने की जमानत दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें मेडिकल कारणों से यह राहत दी है, लेकिन उन्हें मुंबई से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई है।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: February 22, 2021 1:15 PM
Varavara Rao, Varavara Rao bail, Varavara Rao health, Varavara Rao elgaar parishadभीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार तेलुगु कवि और सामाजिक कार्यकर्ता वरवर राव को जमानत मिली। (express file photo)

बॉम्बे हाई कोर्ट ने भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार तेलुगु कवि और सामाजिक कार्यकर्ता वरवर राव को बेल दे दी है। उच्च न्यायालय ने राव को 6 महीने की जमानत दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें मेडिकल कारणों से यह राहत दी है, लेकिन उन्हें मुंबई से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई है।

एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के आरोपी राव का इस समय मुंबई के नानावटी अस्पताल में इलाज चल रहा है। राव को यहां अदालत के हस्तक्षेप के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भर्ती कराया है। एल्गार परिषद मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण (एनआईए) कर रही है।  जस्टिस एस एस शिंदे और मनीष पिटाले ने जमानत देते हुए आदेश दिया कि, जमानत के बाद वरवरा राव को मुंबई में ही रहना होगा और जांच के लिए उपस्थित होना होगा।

खंडपीठ ने कहा कि इसमें कुछ उचित शर्तें लागू होंगी। राव को 6 महीने के लिए नानावती अस्पताल से छुट्टी देने का निर्देश दिया गया है। पीठ ने कहा कि अस्पताल से छुट्टी के तुरंत बाद उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए।

उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर वह राव को चिकित्सा के आधार पर जमानत नहीं देता तो यह मानवाधिकार के सिद्धांत की रक्षा करने के उसके कर्तव्य एवं नागरिकों के जीवन एवं स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार से विमुख होने जैसे होगा।

पीठ ने जमानत देने के साथ कठोर शर्तें भी रखी हैं जिनमें जमानत की अवधि में वरवरा राव को मुंबई की एनआईए अदालत के न्यायाधिकार क्षेत्र में ही रहने का निर्देश भी शामिल है।

अदालत ने कहा कि राव को अपना पासपोर्ट एनआईए की अदालत में जमा कराना होगा और वह मामले के सह अभियुक्तों से किसी तरह का संपर्क स्थापित करने की कोशिश नहीं करेंगे।

अदालत ने यह भी कहा है कि वरवर राव को अपने नजदीकी पुलिस थाने में व्हॉट्सएप वीडियो कॉल कर अपनी उपस्थिति बतानी होगी। अदालत ने कहा कि राव को 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत बांड जमा करने के साथ-साथ ही इतनी ही राशि के दो मुचलके देने होंगे।

उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय में एक फरवरी को वरवरा राव को चिकित्सा आधार पर जमानत देने की याचिका पर बहस पूरी हो गई थी और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

यह रिट याचिका उनकी पत्नी हेमलता ने दाखिल की थी, उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया था कि उचित चिकित्सा सुविधा न देकर एवं कैद में रख वरवरा राव के मौलिक अधिकारों की अवहेलना हो रही है।

गौरतलब है कि यह मामला 31 दिसंबर 2017 में पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है। पुलिस का दावा है कि इस भाषण की वजह से अगले दिन कोरेगांव-भीमा में हिंसा फैली। पुलिस का दावा है कि इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले लोगों का माओवादियों से संबंध है।

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