पहले तेंदुए के अवैध शिकार का आरोप लगा था। अब नेपाल से हाथी की कथित खरीद का मामला सामने आया है। डब्ल्यूसीसीबी के रिकॉर्ड से पता चलता है कि वाइल्डलाइफ एसओएस नाम का एनजीओ, जिसके दो सदस्य तेंदुए के शिकार के मामले में मध्य प्रदेश वन विभाग की हिरासत में हैं और जिसके सीईओ कार्तिक सत्यनारायण भी जांच में शामिल होने वाले हैं, उसका संबंध चार साल पहले हुए हाथी के व्यापार के एक मामले से भी बताया जा रहा है।

मार्च 2022 में डब्ल्यूसीसीबी ने जयपुर में 30 किलो हाथीदांत के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपियों में से एक ने जांचकर्ताओं को बताया कि मथुरा के रहने वाले सूरज पाल आगरा के एक एनजीओ से जुड़ा है। उसने नेपाल से तस्करी करके लाई गई एक मादा हाथी खरीदी थी।

चैट में सूरज पाल के हाथी का था जिक्र

दूसरे आरोपी के मोबाइल फोन में SOS.Baigo.Agra नाम से सेव किए गए एक संपर्क से हुई चैट मिली। चैट में सूरज पाल के हाथी का जिक्र था और कॉन्टैक्ट ने लिखा था कि उसने कार्तिक सर को सूचित कर दिया था।

इंडियन एक्सप्रेस को पता चला है कि डब्ल्यूसीसीबी के रिकॉर्ड में एक जानकारी गायब है। वह “SOS.Baigo.Agra” के नाम से सेव किया गया नंबर वाइल्डलाइफ एसओएस के संरक्षण निदेशक बैजू राज का है। वाइल्डलाइफ एसओएस आगरा और मथुरा में भालू और हाथियों के लिए बचाव केंद्र चलाता है। सूरज पाल 2011 से इन केंद्रों में हाथी रक्षक के तौर पर काम कर रहे हैं।

चैट में कार्तिक सर के जिक्र के बारे में पूछे जाने पर सत्यनारायण ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मुझे कथित चैट रिकॉर्ड की कोई जानकारी नहीं है। इसलिए, मैं इस मामले की पुष्टि, आकलन या इस पर टिप्पणी करने में असमर्थ हूं।” संपर्क करने पर बैजू राज ने चैट के बारे में जानकारी होने से इनकार किया।

यह एक मनगढ़ंत कहानी

बैजू राज की सूरज पाल के हाथी से संबंधित चैट रिकॉर्ड्स पर सत्यनारायण ने कहा, “यह एक मनगढ़ंत कहानी प्रतीत होती है जिसे कुछ स्वार्थी और व्यक्तिगत द्वेष रखने वाले व्यक्तियों द्वारा फैलाया जा रहा है।”

जब पूछा गया कि पूछताछ के दौरान मिली जानकारी पर आगे कार्रवाई की गई या नहीं, तो तत्कालीन डब्ल्यूसीबी इंस्पेक्टर और मामले के अधिकारी देवेंद्र सिंह राठौर ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। डब्ल्यूसीसीबी ने इंडियन एक्सप्रेस के टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। डब्ल्यूसीसीबी के एक पूर्व अधिकारी ने इस अखबार को बताया कि एजेंसी को शायद इस बात की जानकारी नहीं थी कि पाल वाइल्डलाइफ एसओएस के लिए काम करता था और अनजाने में उन सुरागों को छोड़ दिया जिनसे सीमा पार तस्करी का मामला सुलझ सकता था।

13 मार्च 2022 को, डब्ल्यूसीसीबी की एक टीम ने जयपुर में यूपी पुलिस के सब-इंस्पेक्टर नज़ुद्दीन खान, उनके बेटे गुलाम खान और साथी नासिर अली को लगभग 30 किलो हाथीदांत और एक लाइसेंसी रिवॉल्वर के साथ गिरफ्तार किया।

नाजुद्दीन खान के फोन से सूरज पाल के हाथी से संबंधित चैट मिली

मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, नाजुद्दीन खान के फोन से सूरज पाल के हाथी से संबंधित चैट मिली हैं। दूसरे आरोपी अली ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने 2020 में पहले कोविड लॉकडाउन के दौरान हाथीहेवा (नेपाल) सीमा के रास्ते उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के काकरावा में 35-40 वर्ष की एक मादा हाथी की तस्करी की थी। अली के पूछताछ रिकॉर्ड के अनुसार, हाथी नेपाल के सौराहा में होटल मालिक रमेश खटोला का था, जिसने उसे कुशीनगर के दीनानाथ वर्मा को 40 लाख रुपये में बेच दिया था। अली ने जांचकर्ताओं को बताया कि वर्मा ने बदले में हाथी को सूरज पाल को 70 लाख रुपये में बेच दिया था।

खान, अली और तीसरे आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया गया है, जबकि मुकदमे की सुनवाई अभी लंबित है। खान से जुड़े कथित चैट रिकॉर्ड के बारे में पूछे जाने पर, बैजू राज ने कहा, “मैं नाजुद्दीन खान को नहीं जानता। मुझे उन कथित चैट रिकॉर्ड के बारे में कोई जानकारी नहीं है जिनका आप जिक्र कर रहे हैं।”

सूरज पाल 2016 तक थोड़े समय के लिए हमारे साथ जुड़े रहे- वाइल्डलाइफ एसओएस

एक ईमेल मे वाइल्डलाइफ एसओएस ने कहा, “सूरज पाल 2016 तक थोड़े समय के लिए हमारे साथ जुड़े रहे, जब उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई। इसलिए, वाइल्डलाइफ एसओएस उनके संगठन छोड़ने के बाद उनसे जुड़ी किसी भी गतिविधि पर टिप्पणी करने में असमर्थ है।”

वाइल्डलाइफ एसओएस की वेबसाइट पर 21 अगस्त, 2025 की तारीख वाला एक वेबपेज है, जिसमें एनजीओ के हाथी पालक सूरज पाल को दिखाया गया है। पिछले महीने, मध्य प्रदेश एसटीएसएफ ने वाइल्डलाइफ एसओएस के दो कर्मचारियों भगवान सिंह उर्फ सलीम और उनके साथी वसीम को शिवपुरी-मुरैना इलाके में 10 तेंदुओं के अवैध शिकार में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया। सत्यनारायण अब तक तीन बार जांचकर्ताओं के सामने पेश होने में नाकाम रहे हैं और गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की है। 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सत्यनारायण को अंतरिम सुरक्षा दी और उन्हें 28 सितंबर को जांचकर्ताओं के सामने पेश होने के लिए कहा।

इस बीच, कम से कम तीन जांचकर्ताओं ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वे लंबे समय से एनजीओ के बचाव और अवैध शिकार विरोधी तरीकों पर सवाल उठाते रहे हैं। उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “कुछ मौकों पर हमारे पास ठोस परिस्थितिजन्य सबूत थे, लेकिन कभी भी निर्णायक सबूत नहीं मिला।”

उनके अनुसार, जांच एजेंसियों को इस बात की जानकारी थी कि कम से कम 2007 से ही शिकारी वाइल्डलाइफ एसओएस की ओर से जंगल से भालू के शावकों को इकट्ठा कर रहे थे। एक केंद्रीय एजेंसी के पूर्व वरिष्ठ जांचकर्ता ने बताया, “हमारी दिलचस्पी इसलिए बढ़ी क्योंकि कई बार होटल के कमरों में भालू के बच्चे लावारिस पाए गए। कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाती थी क्योंकि वहां कोई देखभाल करने वाला मौजूद नहीं होता था।”

उन्होंने कहा कि ओडिशा, झारखंड और नेपाल सीमा के आसपास के इलाकों में सुरागों का पीछा किया गया, लेकिन फिर कोई सुराग नहीं मिला। पिछले महीने मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा तेंदुए के शिकार मामले में वाइल्डलाइफ एसओएस के लिए काम करने वाले दिल्ली पुलिस के पूर्व अधिकारी भगवान सिंह और उनके सहयोगी वसीम की गिरफ्तारी ने तमिलनाडु के नीलगिरी में 2023 में बाघ की खाल, तेंदुए की खाल और बाघ के कंकाल की जब्ती को लेकर सवाल फिर से खड़े कर दिए हैं।

उस समय, वाइल्डलाइफ एसओएस ने जब्ती और उसके बाद शिकारियों को सजा दिलाने में सहायता का श्रेय लिया था, तमिलनाडु वन विभाग के सूत्रों का कहना था कि जब्ती और गिरफ्तारी के समय सिंह और वसीम कथित तौर पर सत्यमंगलम वन क्षेत्र में मौजूद थे।

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