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चुनावी गणित की वजह दम तोड़ रही कल्याणकारी योजनाएं, अमेरिकी एक्सपर्ट ने बताई ये वजह

सर्वे में इस बात को भी शामिल किया गया है कि बीडीओ को किसी कल्याणकारी योजना को लागू करने में कितना समय लगा और उसे कितने संसाधन जैसे कंप्यूटर, वाहन और स्टाफ आदि मुहैया कराए गए।

mgnrega, bhar election 2020, bdoसर्वे का आधार मनरेगा में हुए काम को बनाया गया है। (फाइल फोटो)

भारत में होने वाले चुनाव में अक्सर राजनेता जनता से बड़े बड़े वादे करते हैं। राजनैतिक पार्टियों के घोषणा पत्र में कई कल्याणकारी योजनाओं का खाका खींचा जाता है लेकिन धरातल पर उतरने से पहले ही कई योजनाएं दम तोड़ देती हैं। अब अमेरिकी एक्सपर्ट ने इसकी वजह बतायी है। अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी विशेषज्ञों ने बताया है कि कल्याणकारी योजनाओं के पूरा नहीं होने की मुख्य वजह चुनावी गणित है।

दरअसल अमेरिका के दो शिक्षाविदों आदित्य दासगुप्ता और देवेश कपूर ने एक सर्वे किया है। जिसमें देश के 400 ब्लॉक डेवलेपमेंट ऑफिसर्स (BDO) से बात की गई है। सर्वे में इस बात को भी शामिल किया गया है कि बीडीओ को किसी कल्याणकारी योजना को लागू करने में कितना समय लगा और उसे कितने संसाधन जैसे कंप्यूटर, वाहन और स्टाफ आदि मुहैया कराए गए।

अमेरिकी एक्सपर्ट ने यह सर्वे मनरेगा योजना को लागू करने के आधार पर किया गया है। जिसमें पता चला है कि जिस बीडीओ को योजना को लागू करने के लिए ज्यादा संसाधन मिले उसने योजना की प्लानिंग और उसे लागू करने की दिशा में बेहतर काम किया। इतना ही नहीं वहां मनरेगा के तहत लोगों को ज्यादा भत्ता और काम के ज्यादा दिन दिए गए।

वहीं जिस बीडीओ को योजना को लागू करने के लिए संसाधन पूरे और समय पर नहीं मिल पाए, वहां के बीडीओ का प्रदर्शन कमजोर रहा। इस सर्वे में यह भी पता चला कि जिस ब्लॉक में स्थानीय विधायक सत्ताधारी पार्टी के हैं, वहां बीडीओ को ज्यादा संसाधन मिले। वहीं जहां विपक्षी पार्टी के नेता जनप्रतिनिधि चुने गए वहां बीडीओ को अपेक्षाकृत कम संसाधन मिल सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन जगहों पर स्थानीय विधायक सत्ताधारी पार्टी का होता है, वहां विकास कार्य तेजी से होने की वजह चुनावी गणित है। दरअसल विधायक इन विकास कार्यों से चुनावी फायदा उठाते हैं और इन्हें जनता के सामने बतौर उपलब्धि पेश करते हैं। वहीं विपक्षी पार्टी के जनप्रतिनिधि के होने की स्थिति में सत्ताधारी पार्टी को डर होता है कि विकास कार्यों का फायदा स्थानीय विधायक को मिलेगा, इसलिए उस इलाके में बीडीओ को पर्याप्त संसाधन नहीं मिलते, जिससे विकास कार्य बाधित होते हैं।

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