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महाराष्ट्र में कांग्रेस व राकांपा के बीच हुआ चुनावी गठबंधन

लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस-राकांपा ने हाथ मिलाया था लेकिन भाजपा-शिवसेना गठबंधन के सामने यह गठबंधन नहीं टिक पाया।

Author नई दिल्ली | Published on: September 17, 2019 2:40 AM
फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस।

कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अगले महीने होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगे। राकांपा प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को दोनों दलों के बीच चुनावी गठबंधन की औपचारिक घोषणा की। पवार हाल में दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले थे। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की इस मुलाकात के बाद ही चुनावी गठबंधन पर मोहर लगाई गई। राकांपा प्रमुख पवार ने कहा कि उनकी पार्टी और कांग्रेस अगले महीने होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 125-125 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगी। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस के साथ उनके गठबंधन के तहत सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

राकांपा अध्यक्ष ने अपने एक ट्वीट में इस चुनावी गठबंधन का एलान करते हुए जानकारी दी कि बाकी बची 38 सीटें गठबंधन सहयोगियों के लिए छोड़ी जाएंगी। महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीटें हैं। पवार ने कहा कि राकांपा इस चुनाव में नए चेहरों को मौका देगी। कुछ सीटें कांग्रेस के साथ बदली भी जाएंगी।
दोनों दलों ने 2014 में राज्य विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़े थे। उस चुनाव में कांग्रेस ने 42 तो राकांपा ने 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी भाजपा को 122 सीटें मिली थीं।

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के महाराष्ट्र के प्रभारी मल्लिकार्जुन खड़गे और राकांपा नेताओं के बीच महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर पहले ही कई दौर की बातचीत हो चुकी थी। कांग्रेस व राकांपा के प्रदेश स्तर के नेता भी इस मुद्दे पर कई बैठकें कर चुके थे। लेकिन सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच कुछ मतभेद थे। पिछले दिनों दिल्ली में जब शरद पवार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर उनसे मिले तो समझा जाता है कि दोनों नेताओं की बातचीत में कुछ सीटों को लेकर आ रही अड़चनों को दूर कर लिया गया।

लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस-राकांपा ने हाथ मिलाया था लेकिन भाजपा-शिवसेना गठबंधन के सामने यह गठबंधन नहीं टिक पाया। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा चुनाव में यह सियासी जोड़ी कितनी कारगर साबित होती है। इस मामले में कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग लड़े थे जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिला। अब इस चुनाव में दोनों दल एक बार फिर से साथ आ गए हैं तो दोनों को इसका फायदा भी जरूर मिलेगा।

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