चुनाव का असर? नुकसान सह कर भी नहीं बढ़ाया पेट्रोल-डीजल का दाम, अब क‍िया कुछ सस्‍ता

पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दामों में करीब एक महीने तक तेल कंपन‍ियों ने कोई बदलाव नहीं क‍िया।

petrol, dieselऑइल मार्केटिंग कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में कमी की है। (Indian Express)।

पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दामों में करीब एक महीने तक तेल कंपन‍ियों ने कोई बदलाव नहीं क‍िया। बताया जाता है क‍ि इस बीच कच्‍चे तेल की कीमत में बढ़ोत्‍तरी भी हुई, पर तेल कंपन‍ियों ने इसकी समीक्षा नहीं की और दाम यथावत रहे। अब 24 मार्च को दाम में मामूली कमी का ऐलान क‍िया गया। जानकार मानते हैं क‍ि तेल कंपन‍ियों ने कीमतों की समीक्षा की न‍ियम‍ित प्रक्र‍िया पर अस्‍थायी रूप से रोक लगा दी थी। इसकी एक वजह यह मानी जाती है क‍ि पांच राज्‍यों में हो रहे चुनाव में पेट्रोल-डीजल की महंगाई बड़ा मुद्दा बन रहा था।

दरअसल तेल कंपनियों ने गुरुवार को लगभग छह महीने बाद लगातार दूसरे दिन पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की। बता दें कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं और देश भर में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच रही थीं। तेल कंपनियों ने गुरुवार को पेट्रोल की कीमत में 21 पैसे की कटौती की जिससे कीमत 90.78 रुपये प्रति लीटर हो गई। वहीं, डीजल की कीमत भी 20 पैसे घटकर 81.1 रुपये हो गई। मालूम हो कि इस महीने की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल थी जो गुरुवार को गिरकर $ 63.5 प्रति बैरल हो गई।

तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों को 24 दिनों तक यथावत रखने के बाद भी कटौती कर रही हैं। इस बीच दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता देखी गई है। सूत्रों ने बताया कि तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। मालूम हो कि ईंधन की कीमतें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम के आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन गई हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो दामों के संशोधन में आई रुकावट के कारण ढाई से तीन रुपए प्रति लीटर का मार्जिन, जो तेल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) पेट्रोल-डीजल से कमाती हैं, वह खत्म हो गया था। ऐसा तब हुआ था, जब कच्चे तेल का भाव अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। पर ओएमसी ने उस नुकसान की भरपाई तब कर ली होगी, जब कच्चे तेल का भाव दोबारा नीचे आ गया था और कीमतों में गिरावट का मतलब यह भी है कि उन कंपनियों के मार्जिन सामान्य स्तर पर वापस आ गए होंगे।

हालांकि, केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2020 के दौरान सरकारी राजस्व को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी को अभी तक नहीं बदला है। केंद्र सरकार ने पिछले साल पेट्रोल पर 13 रुपये और डीजल पर करों में 16 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।

अब कच्चे तेल की कीमतें क्यों गिर रही हैं?: कच्चे तेल की बढ़ती सप्लाई और मांग को लेकर चिंताओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में हालिया सुधार हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें यूरोप में कोविड -19 पाबंदियों और अमेरिकी द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी से कम हुई हैं। इस बीच तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन जारी रखने का भी फैसला किया है।

पिछले साल अक्टूबर से इस साल मार्च की शुरुआत तक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि जारी रही क्योंकि तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक ने उत्पादन में कटौती जारी रखने का फैसला किया था। इस बीच अमेरिका में भी कच्चे तेल के उत्पादन में भारी गिरावट आई थी। हालांकि विशेषज्ञों ने कहा है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने अमेरिका से कच्चे तेल की आपूर्ति को तेज कर दिया है। इसके अलावा, यूरोप में धीमे पड़ते वैक्सीनेशन ने तेल की मांग को कम किया।

भारत द्वारा सऊदी अरब से तेल आयात में कटौती करने से अमेरिका में कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ावा मिला है। अमेरिका भारत के लिए कच्चे तेल का दूसरा सबसे अहम स्रोत बनकर उभरा है।

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