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इनकम टैक्स के रडार पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की पत्नी, 14 साल पहले SBI से दे दिया था इस्तीफा 

अशोक लवासा ने लोकसभा चुनाव के दौरान आचारसंहिता उल्लंघन के दो मामलों में पीएम और तीन मामलों में अमित शाह को क्लीन चिट देने का विरोध किया था। हालांकि, दो-एक के बहुमत के आधार पर उन्हें क्लीनचिट मिल गई थी।

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा। (फाइल फोटो)

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की पत्नी नोवेल सिंहल लवासा कथित कर चोरी के आरोपों को लेकर आयकर विभाग की जांच के दायरे में आ गई हैं। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार (23 सितंबर) को यह जानकारी दी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आयकर विभाग ने लवासा की पत्नी को एक नोटिस जारी कर करीब 10 कंपनियों के निदेशक मंडल में रहने के सिलसिले में अपनी आयकर (आईटी) रिटर्न में दिये कुछ खास ब्योरे के बारे में बताने को कहा है।

अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच के बाद विभाग ने उनसे अपनी निजी वित्त (फाइनेंस) के बारे में और अधिक ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होंने बताया कि विभाग नोवेल सिंहल लवासा की आईटीआर को खंगाल रहा है ताकि यह पता चल सके कि क्या उनकी आय अतीत में आकलन से बच निकली थी या कर अधिकारियों से कुछ छिपाया गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व बैंकर के खिलाफ कथित कर चोरी की जांच और उनके कई कंपनियों के निदेशक मंडल में रहने की जांच 2015-17 की अवधि से जुड़ी हुई है। सिंहल भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत थीं लेकिन 2005 में उन्होंने बैंक की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वो कई कंपनियों में निदेशक बनी थीं।

बहरहाल, इस विषय पर चुनाव आयुक्त लवासा या उनकी पत्नी की कोई टिप्पणी नहीं मिल पाई है। केंद्रीय वित्त सचिव के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद अशोक लवासा को 23 जनवरी 2018 को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था। उल्लेखनीय है कि अप्रैल-मई में हुए आम चुनाव के दौरान चुनाव आचार संहिता के क्रियान्वयन पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा के साथ उनके (अशोक लवासा के) मतभेद की खबरें मीडिया में आई थीं।

दरअसल, चुनावी प्रचार के दौरान पीएम मोदी पर आदर्श आचारसंहिता के उल्लंघन के आरोप लगे थे। चुनाव आयोग ने तीनों मामलों में सुनवाई करते हुए पीएम को क्लीनचिट दिया था लेकिन दो मामलों में फैसले एकमत से नहीं हुए थे। अशोक लवासा ने उन दो मामलों में पीएम को क्लीन चिट देने का विरोध किया था। हालांकि, दो-एक के बहुमत के आधार पर पीएम को क्लीनचिट दे दी गई थी। लवासा ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को भी क्लीन चिट देने का विरोध किया था। इस तरह कुल पांच मौंकों पर लवासा मोदी-शाह को क्लीनचिट देने का विरोध कर चुके थे।

चुनाव आयोग एक्ट, 1991 की धारा 10 के मुताबिक ‘जहां तक संभव हो चुनाव आयोग में फैसले एकमत से होने चाहिए। यदि किसी मामले में चुनाव आयोग के सदस्यों के मत भिन्न हैं, तो  बहुमत के आधार पर फैसला होना चाहिए।’ जब से उपरोक्त कानून लागू हुआ है, तब से दुर्लभ मामलों में ही बहुमत से फैसला हुआ है अन्यथा चुनाव आयोग ने आचार संहिता उल्लंघन के मामलों पर अधिकतर फैसले एकमत से ही लिए हैं।

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