अब अपने घरों से दूर रहने वाले भी वहीं डाल सकेंगे वोट, चुनाव आयोग बना रहा बड़ी योजना

सरकारी अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार प्रवासी आबादी का आंकड़ा उपलब्ध होने के आधार पर आने वाले समय में रिमोट वोटिंग मशीन अलग अलग जगहों पर रखा जाएगा ताकि अपने घर से दूर रहने वाले वाले लोग भी वोट डाल सकें

चुनाव आयोग अपने घर से दूर रहने वाले लोगों के मताधिकार को सुनिश्चित करने के लिए रिमोट वोटिंग शुरू करने की योजना बना रहा है। (एक्सप्रेस फोटो)

अनिशा दत्ता

वोट डालना 18 वर्ष से ऊपर के हर व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार होता है। लेकिन कई लोग अपने घर से दूर रहने के कारण वोट नहीं डाल पाते हैं। लेकिन अब चुनाव आयोग ऐसी योजना बना रहा है जिससे घर से दूर रहने वाले लोग भी वोट डाल सकेंगे। इसके लिए चुनाव आयोग ने अलग अलग राज्यों में बसे प्रवासी लोगों की आबादी का सही आंकड़ा प्राप्त करने की भी योजना बनाई है।

द इंडियन एक्सप्रेस को सरकारी अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार प्रवासी आबादी का आंकड़ा उपलब्ध होने के आधार पर आने वाले समय में रिमोट वोटिंग मशीन अलग अलग जगहों पर रखा जाएगा ताकि अपने घर से दूर रहने वाले वाले लोग भी वोट डाल सकें। साथ ही उन्होंने कहा कि यह अभी शुरूआती चरण में ही है और यह हाल ही में केंद्रीय कानून मंत्रालय को चुनाव आयोग की तरफ से भेजे गए सुधार प्रस्तावों का भी हिस्सा है।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि जल्दी ही प्रवासी आबादी का सही आंकड़ा प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदमों की शुरुआत की जाएगी। हालांकि कुछ जरूरी कदम पहले ही उठाए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की बड़ी प्रवासी आबादी कुछ ही राज्यों में है और हमारे पास इसका आकलन है कि किसी ख़ास निर्वाचन क्षेत्र के प्रवासी मजदूर कहां रह रहे हैं। उदाहरण के तौर पर हम यह जानते हैं कि उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर निर्वाचन क्षेत्र के प्रवासी मजदूर ज्यादातर 5-7 मेट्रो शहरों में ही होंगे। हम रिमोट वोटिंग के मशीन डिज़ाइनिंग की प्रक्रिया में हैं और यह इसे पूरा करने में थोड़ा लंबा समय लगेगा। 

दरअसल इसी साल मार्च में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा था कि रिमोट वोटिंग साल 2024 में होने वाले आम चुनाव से पहले शुरू हो सकती है। चुनाव आयोग रिमोट वोटिंग के लिए आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है। इसको लेकर आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रोफेसर रजत मूना की अध्यक्षता में कमेटी भी बनाई गई है। जिसमें चुनाव आयोग के अधिकारी समेत आईआईटी-दिल्ली, आईआईटी-बॉम्बे, आईआईटी-मद्रास के विशेषज्ञ शामिल हैं।

रिमोट वोटिंग की तकनीकी सलाहकार कमेटी के अध्यक्ष रजत मूना ने कहा कि प्रवासी आबादी के सही आंकड़े जुटाना एक बड़ा अभ्यास है और इसे प्रशासन द्वारा किया जा सकता है। एक तरीका यह है कि ब्लॉक स्तर पर प्रवासियों की पहचान की जाए। घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जाए क्योंकि कई राज्यों के पास प्रवासियों का कोई आंकड़ा नहीं है। चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची है और वे जानते हैं कि मतदाता किन निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित हैं।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि इसमें इस्तेमाल होने वाला प्रोटोटाइप ईवीएम मशीन मौजूदा ईवीएम की तरह ही दिखेगा और हम इसे राजनीतिक दलों को भी दिखाएंगे। हम पहले ही चुनाव आयोग को यह दिखा चुके हैं और हम दिसंबर के पहले सप्ताह के आसपास चुनाव आयोग के सामने इसे फिर से प्रदर्शित करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि लोगों को रिमोट वोटिंग के विकल्प के लिए आवेदन भी करना होगा।

रजत मूना ने यह भी कहा कि पहले उपचुनाव में प्रोटोटाइप ईवीएम का उपयोग किया जाएगा और  फिर मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा चुनाव में भी लगाया जाएगा। हमारा लक्ष्य 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में इसका उपयोग करना है। हमें कम से कम एक लाख मशीन की आवश्यकता होगी और यह खुद में बहुत लंबी प्रक्रिया है। हमने इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की है।

वहीं पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने कहा कि इसकी प्रमुख चुनौती सार्वजनिक स्वीकार्यता होगी। क्योंकि वीवीपैट होने के बावजूद साधारण डमी मशीन पर सवाल उठाया जाता है और राजनीतिक दलों को इसे स्वीकार करना होगा। सरकारी अधिकारियों ने भी कहा कि यह प्रक्रिया काफी लंबी होगी। हमने कानून मंत्रालय को सुधार प्रस्ताव भेजे हैं जिसमें आधार लिंकिंग और एकल मतदाता सूची शामिल है। हम पहले कुछ निर्वाचन क्षेत्रों के उपचुनाव में प्रोटोटाइप ईवीएम का परीक्षण करेंगे । इसके बाद इसे संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा और फिर इसको लेकर राजनीतिक दलों से परामर्श लिया जाएगा। 

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट