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EC ने इन पार्टियों का चंदा किया पब्लिक, BSP और NCP के चंदे ने चौंकाया, जानिए किसी पार्टी को कैसे मिलता है राष्ट्रीय दल का दर्जा

शरद पवार की पार्टी एनसीपी को पांच गुना बढ़ोत्तरी के साथ मिले चंदे की वजह महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार बनना है। इसी का फायदा शरद पवार की पार्टी को हुआ है। दो क्षेत्रीय पार्टियों तमिलनाडु की AIADMK को 52.1 करोड़ रुपए का चंदा मिला। डीएमके कोे 48.3 करोड़ रुपए चंदा मिला है।

Amendmentनिर्वाचन आयोग का कार्यालय।फाइल फोटो।

चुनाव आयोग ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों के चंदे का ब्योरा पब्लिक कर दिया है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के चंदे के आंकड़ों ने हैरान कर दिया है। फिलहाल भाजपा, कांग्रेस, सीपीआई और तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के चंदे का डेटा चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद नहीं है। बीएसपी को 2020 में बीस हजार रुपए से कम चंदा मिला है, जबकि एनसीपी का चंदा पांच गुना बढ़कर 59.9 करोड़ रुपए का है।

इन दोनों पार्टियों के अलावा किसी भी राष्ट्रीय पार्टी का चंदा चुनाव आयोग ने अभी तक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया है। शरद पवार की पार्टी एनसीपी को पांच गुना बढ़ोत्तरी के साथ मिले चंदे की वजह महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार बनना है। इसी का फायदा शरद पवार की पार्टी को हुआ है। दो क्षेत्रीय पार्टियों तमिलनाडु की AIADMK को 52.1 करोड़ रुपए का चंदा मिला। डीएमके कोे 48.3 करोड़ रुपए चंदा मिला है। जदयू को 6 करोड़ रुपए का चंदा मिला है। चुनाव आयोग ने कुछ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों का चंदे की डेटा अपलोड किया है।

ये क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियां कौन सी होती है और ये कैसे तय होता है, इसके नियम कानून क्या हैं, भारत में फिलहाल तीन तरह की राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय और क्षेत्रीय पार्टियां हैं। इस समय देश में कुल सात राष्ट्रीय पार्टियां हैं। 35 राज्य स्तरीय दल हैं और 329 क्षेत्रीय दल हैं। किसी दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए कुछ शर्तें हैं। इसके तहत तीन शर्तें तय हैं, जिनमें कम के कम एक शर्त पूरा करने पर किसी पार्टी को राष्ट्रीय होने का दर्जा मिलता है।

पहली शर्त है कि कोई पार्टी तीन राज्यों के लोकसभा चुनाव में कम से कम 2 फीसदी सीटें जीती हो। दूसरी शर्त यह है कि कम से कम चार लोकसभा सीटों के अलावा पार्टी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में छह फीसदी वोट पाई हो। तीसरी शर्त यह है कि पार्टी की चार या इससे अधिक राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी के रूप में मान्यता हो। इन तीन शर्तों में जो पार्टी एक भी शर्त भी पूरा करती है उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाता है।

राज्यस्तरीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए भी तीन अहम शर्तें हैं। पार्टी राज्य विधानसभा की कुल सीटों में तीन फीसदी सीटें या कम से कम तीन सीटें जीते। लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कुल वैध वोटों में 6 फीसदी वोट प्राप्त करे। साथ ही एक लोकसभा सीट या दो विधानसभा सीटें जीते। इनमें से किसी एक शर्त को पूरा कर कोई पार्टी राज्य स्तरीय दल का दर्जा पा सकती है। कोई पार्टी किसी राज्य में लोकसभा या विधानसभा चुनाव में भले ही कोई सीट न जीते लेकिन कुल वैध मतों में कम से कम 8 फीसद वोट प्राप्त करे तब भी उसे क्षेत्रीय दल का दर्ज दिया जाता है।

भारत में इस वक्त भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, नेशलिस्ट कांग्रेस पार्टी और तृणमूल कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय पार्टियां हैं। बिहार की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) जैसी पार्टियां क्षेत्रीय दलों में आती हैं। पार्टी को दर्जे के हिसाब से सुविधाएं और चिन्ह मिलते हैं।

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