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राष्ट्रपति चुनाव: नामांकन प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग ने जारी किया नोटिफिकेशन

राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग ने आज नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

राष्ट्रपति चुनाव 2017 बेहद करीब है। चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। नए राष्ट्रपति के नाम को लेकर सभी बैठकें और विचार-विमर्श में जुटे हैं। तो आइए जानते हैं कि इस बार के चुनाव में दिख सकती है कुछ इस तरह की तस्वीर।

राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग ने आज नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसका मतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया अब शुरू हो जाएगी। नोटिफिकेशन जारी करने के साथ ही नामांकन भरने की प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। बता दें चुनाव आयोग ने बीते 7 जून को राष्ट्रपति चुनाव के शेड्यूल और प्रक्रिया की जरूरी जानकारी दी थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस वार्ता कर पूरी जानकारी दी थी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इस साल 24 जुलाई को खत्म हो जाएगा। राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग 17 जुलाई 2017 को होगी। वोटिंग सीक्रेट बैलेट पेपर के जरिए होगी। वहीं बैलेट पेपर पर लिखने के लिए खास तरह के पेन का इस्तेमाल किया जाएगा। अगर इस पेन के सिवा किसी दूसरे पेन से लिखा जाएगा तो वह वोट रद्द माना जाएगा।

चुनाव के लिए उम्मीदवार नामांकन करने 28 जून 2017 तक ही कर सकेंगे। नामांकन वापिस लेने की आखिरी तारीख 1 जुलाई 2017 होगी और 17 जुलाई को वोटिंग के बाद, 20 जुलाई 2017 को मतगंणना होगी। राष्ट्रपति चुनाव के लिए ईवीएम मशीन का इस्तेमाल नहीं होगा। वहीं चुनाव आयोग ने यह भी घोषणा की थी कि वोटिंग के लिए किसी भी पार्टी को व्हिप जारी करने का अधिकार नहीं होगा। इसका मतलब यह हुआ कि हर विधायक या सांसद अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट दे सकेगा। वे पार्टी या पार्टी समर्थित उम्मीदवार को ही वोट देने के लिए बाध्य नहीं होंगे। उम्मीदवारों के लिए भी कई जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं। उम्मीदवार को 15 हजार रुपये की सिक्योरिटी जमा करानी होगी। इसके अलावा उम्मीदवार अगर किसी तरह के भ्रष्टाचार में दोषी पाया जाता है तो उसकी दावेदारी रद्द हो जाएगी।

बता दें राष्ट्रपति चुनाव में बैलेट व्यवस्था के बजाय खास तरीके से मतदान होता है, जिसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम कहा जाता है। सरल शब्दों में समझें तो एक मतदाता एक ही मत दे सकता है, लेकिन वह कई उम्मीदवारों में प्राथमिकता बताता है। मसलन मान लें कि पांच उम्मीदवार हैं, तो मतदाता उनमें अपनी प्राथमिकता के हिसाब से बताएगा कि कौन उसकी पहली पसंद है और कौन आखिरी। अगर पहली पसंद वाले मत से विजेता तय नहीं हो पाता, तो मतदाता की दूसरी पसंद को नए सिंगल वोट के रूप में ट्रांसफर कर दिया जाता है। राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी यह भी रोचक बात है कि सर्वाधिक मत हासिल करने से यहां जीत नहीं मिलती। राष्ट्रपति उसे चुना जाता है, जो मतदाताओं (विधायकों और सांसदों) के मतों के कुल वेटेज का आधा से अधिक हिस्सा हासिल करे। मतलब राष्ट्रपति चुनाव में पहले से तय होता है कि जीतने वाले को कितना वेटेज पाना होगा।

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