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चुनाव आयोग ने किसी भी तरह के एग्जिट पोल पर लगाया बैन, ज्‍योतिषी से लेकर राजनैतिक पंडित भी नहीं कर सकेंगे चुनावी भविष्‍यवाणी

हाल ही में संपन्‍न हुए पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव के दौरान दैनिक जागरण के वेब-पोर्टल ने यूपी का एग्जिट पोल समय से पहले ही प्रकाशित कर दिया था।

मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त नसीम जैदी। (Source: PTI)

चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान नतीजों को लेकर किसी भी तरह की तरह की भविष्‍यवाणी के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया दिया है। ईसी ने गुरुवार शाम को राजनैतिक पंडितों, भविष्‍यवक्‍ताओं और टैरो कार्ड रीडर्स द्वारा चुनावी भविष्‍यवाणी करने पर रोक लगाने की घोषणा की। इसका अर्थ यह है कि चुनाव को लेकर ज्‍योतिषी और टैरो कार्ड रीडर भी कोई अनुमान नहीं लगा सकेंगे। न्यूज ब्रॉडकॉस्टर्स एसोसिएशन के महासचिव और भारतीय प्रेस परिषद के सचिव को भेजी चिट्ठी में निर्वाचन आयोग ने मीडिया (प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक) से भविष्य में संभावित चुनाव परिणाम या एक्जिट पोल का प्रसारण न करने के लिए कहा है। चिट्ठी में कहा गया है, “अनुच्छेद 126ए के प्रावधानों और निर्वाचन आयोग द्वारा चार मार्च को जारी अधिसूचना के तहत उस समयसीमा को स्पष्ट करने के बावजूद, जिसके अंदर एक्जिट पोल के लिए सर्वेक्षण करना या इसका प्रसारण प्रतिबंधित किया गया था, ऐसा पाया गया कि कुछ टेलीविजन चैनलों ने ऐसे कार्यक्रमों का प्रसारण किया, जिसमें किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी इसके अनुमान व्यक्त किया गया।”

आयोग ने कहा है, “निर्वाचन आयोग का मानना है कि प्रतिबंध की अवधि के भीतर ज्योतिषियों, टैरो कार्ड विशेषज्ञों, राजनीतिक विश्लेषकों या किसी भी अन्य तरीके से चुनाव का संभावित परिणाम बताने वाले कार्यक्रमों का प्रसारण आर. पी. अधिनियम की धारा 126ए का उल्लंघन है।” आयोग ने यह भी कहा कि ‘उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता और आचार संहिता एवं नियमों का पालन’ करने वाली मीडिया के सहयोग के बिना निर्वाचन आयोग भी ‘वह विश्वसनीयता हासिल नहीं कर सकेगा, जैसी इसने चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में पूरी दुनिया में अर्जित की है’।

हाल ही में संपन्‍न हुए पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव के दौरान दैनिक जागरण के वेब-पोर्टल ने यूपी का एग्जिट पोल समय से पहले ही प्रकाशित कर दिया था। 11 फरवरी को यूपी के पहले चरण के विधानसभा चुनाव के बाद शाम को दैनिक जागरण की वेबसाइट पर एग्जिट पोल पोस्ट किया गया था। चुनाव आयोग ने 15 जिलों के चुनाव अधिकारियों को दैनिक जागरण के संपादकीय प्रभारियों के खिलाफ अलग-अलग आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए कहा था। जागरण के ऑनलाइन संपादक शंशाक शेखर त्रिपाठी को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें स्थानीय कोर्ट में जमानत मिलने पर छोड़ दिया गया।

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