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चुनाव आयोग का ऐलान- 17 जुलाई को होगा राष्ट्रपति चुनाव, जानिए कैसे होता है चुनाव

चुनाव आयोग ने बुधवार को राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा कर दी है।

राष्ट्रपति चुनाव 2017 बेहद करीब है। चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। नए राष्ट्रपति के नाम को लेकर सभी बैठकें और विचार-विमर्श में जुटे हैं। तो आइए जानते हैं कि इस बार के चुनाव में दिख सकती है कुछ इस तरह की तस्वीर।

चुनाव आयोग ने बुधवार को राष्ट्रपति पद के लिये निर्वाचन कार्यक्रम घोषित करते हुये कहा कि आगामी 20 जुलाई तक इस पद के लिये निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी। मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इस वर्ष 24 जुलाई को खत्म होने से पहले 20 जुलाई तक इस पद के लिये समस्त निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी। चुनाव आयुक्त एके ज्योति और ओपी रावत की मौजूदगी में जैदी ने बताया कि राष्ट्रपति पद के निर्वाचन की अधिसूचना आगामी 14 जून को जारी की जायेगी। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 324 और राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम 1952 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रपति के निर्वाचन की अधिसूचना जारी करने के साथ ही निर्वाचन प्रक्रिया की औपचारिक शुरच्च्आत हो जायेगी। निर्वाचन कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति पद के लिये उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 28 जून निर्धारित की गयी है। नामांकन करने वाले व्यक्ति को बतौर उम्मीदवार 15 हजार रच्च्पये जमानत राशि के रूप में जमा कराने होंगे। नामांकन पत्रों की जांच 29 जून तक पूरी कर ली जायेगी। वहीं नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि एक जुलाई नियत की गयी है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर 17 जुलाई को मतदान होगा और 20 जुलाई को मतगणना की जायेगी। जैदी ने स्पष्ट किया राष्ट्रपति चुनाव में राजनीतिक दल अपने सांसद और विधायकों को किसी खास उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने को बाध्य करने के लिये व्हिप जारी नहीं कर पायेंगे।

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जैदी ने निर्वाचन नियमों के हवाले से बताया कि संविधान के अनुच्छेद 55 के तहत राष्ट्रपति पद का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जायेगा। इस चुनाव के लिये प्रत्येक उम्मीदवार को 50 प्रस्तावकों और 50 अनुमोदकों के हस्ताक्षर युक्त नामांकन पत्र जमा करने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी प्रस्तावक या अनुमोदक किसी एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र पर ही हस्ताक्षर कर सकेगा। एक से अधिक नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर होने की स्थिति में हस्ताक्षर करने की तिथि और समय के मुताबिक पहले किये गये हस्ताक्षर को मान्यता दी जायेगी, शेष अन्य हस्ताक्षरों को अमान्य कर दिया जायेगा। इसके अलावा आयोग ने मतपत्र से होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में मतदान के लिये पहली बार विशेष पेन मतदाताओं को मुहैया कराने का इंतजाम किया है। जैदी ने बताया कि मतपत्रों में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिये मतदाता सिर्फ आयोग द्वारा मुहैया कराये गये पेन से ही मतपत्र पर अपने मतदान की जानकारी भरेंगे। खास किस्म की स्याही वाला यह पेन मतदान केन्द्र पर ही मतदाताओं को मुहैया कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि किसी अन्य पेन से भरा गया मतपत्र अमान्य घोषित कर दिया जायेगा।

राष्ट्रपति पद के लिये दिल्ली स्थित संसद भवन और राज्यों की विधानसभाओं में मतदान के लिये मतदान केन्द्र बनाये जायेंगे। राष्ट्रपति चुनाव के लिये योग्य मतदाता के रूप में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य संसद भवन स्थित मतदान केन्द्र में और दिल्ली एवं पुडुचेरी सहित सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य संबद्ध राज्य की विधानसभा में स्थित मतदान केन्द्र पर मतदान करेंगे। लेकिन जरूरत पड़ने पर संसद सदस्य किसी राज्य की विधानसभा में या विधानसभा सदस्य दिल्ली स्थित संसद भवन में भी मतदान कर सकेंगे बशर्ते उन्हें चुनाव आयोग को मतदान की तारीख से कम से कम दस दिन पहले इस बाबत आवेदन करना होगा।

जैदी ने बताया कि निर्वाचक मंडल में राज्यसभा की खाली हुयी रिक्तियों से कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यसभा की खाली हुयी 13 सीटों के लिये चुनाव स्थगित कर दिया गया है इसलिये इन सीटों के मौजूदा सांसद ही राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचक मंडल के सदस्य के रूप में मतदान कर सकेंगे।

जैदी ने आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के मताधिकार पर भी स्पष्ट किया कि इनके मामले अभी विचाराधीन हैं। इसलिये वर्तमान स्थिति में ये विधायक भी मताधिकार के योग्य हैं। उन्होंने कहा कि यदि मतदान के दिन तक इस मामले में कोई फैसला नहीं आता है तो मौजूदा स्थिति बरकरार रहेगी।

जानिए प्रणव मुखर्जी के उत्तराधिकारी का चुनाव कैसे होगा

राष्ट्रपति चुनाव की बात सुनने और देखने में जितनी आसान लगती है, असल में यह उतनी ही टेढ़ी खीर है। देश की सबसे ताकतवर कुर्सी के लिए जनता मतदान नहीं करती। जी हां, राष्ट्रपति को सीधे तौर पर लोग खुद नहीं चुन सकते। राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया में विधायक और सांसद वोट देते हैं। ऐसे गिने जाते हैं उनके मत।

ऐसे चुना जाता है राष्ट्रपति
राष्ट्रपति को सीधे तौर पर लोग खुद नहीं चुन सकते। राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया में विधायक और सांसद वोट देते हैं। राष्ट्रपति चुनाव में बैलट व्यवस्था के बजाय खास तरीके से मतदान होता है, जिसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम कहा जाता है। सरल शब्दों में समझें तो एक मतदाता एक ही मत दे सकता है, लेकिन वह कई उम्मीदवारों में प्राथमिकता बताता है। मसलन मान लें कि पांच उम्मीदवार हैं, तो मतदाता उनमें अपनी प्राथमिकता के हिसाब से बताएगा कि कौन उसकी पहली पसंद है और कौन आखिरी। अगर पहली पसंद वाले मत से विजेता तय नहीं हो पाता, तो मतदाता की दूसरी पसंद को नए सिंगल वोट के रूप में ट्रांसफर कर दिया
जाता है।

राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी यह भी रोचक बात है कि सर्वाधिक मत हासिल करने से यहां जीत नहीं मिलती। राष्ट्रपति उसे चुना जाता है, जो मतदाताओं (विधायकों और सांसदों) के मतों के कुल वेटेज का आधा से अधिक हिस्सा हासिल करे। मतलब राष्ट्रपति चुनाव में पहले से तय होता है कि जीतने वाले को कितना वेटेज पाना होगा।

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