West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनाव हो चुके हैं, अब दूसरे चरण के चुनाव 29 अप्रैल को होने जा रहे हैं। इस लेकर पहली बार वोट डालने की तैयारी कर रही एक युवती ने कहा, जब हमें कोई समस्या होती है तो हम दीदी के पास जाते हैं। अब अगर भाजपा सत्ता में आ जाती है तो क्या हम मदद के लिए दिल्ली जाएंगे?
यह बातचीत दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर इलाके में हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित ममता बनर्जी के दो कमरों वाले घर से बेहद करीब हो रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ममता बनर्जी यहीं रहती हैं। पिछले एक माह से चले आ रहे लंबे चुनाव प्रचार और पिछले कुछ हफ्तों की जोरदार गहमागहमी के बाद राज्य में चुनाव प्रचार सोमवार को समाप्त हो जाएंगे।
अहम है भवानीपुर सीट
कोलकाता में भवानीपुर एक छोटा-सा शहरी इलाका है, जिसने साल 2011 के उपचुनाव में ममता बनर्जी को विधानसभा भेजा और इसी के साथ वाम दल का 34 वर्षों की सत्ता खत्म की और फिर पांच साल बाद भी उन्हें यहीं से चुना गया। 2021 में जब ममता बनर्जी अपने पूर्व सहयोगी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम में हार गई थीं तब भी भवानीपुर विधानसभा में उन्हें उपचुनाव में जीत दिलाई और विधानसभा भेजा
भवानीपुर राज्य के एक और विधानसभा सीट से कहीं अधिक अहम है। एल्गिन रोड पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के घर है, इसी के पास ज्योति बसु मुख्यमंत्री बनने से पहले रहते थे। एक और बड़ी से बिल्डिंग के पास कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय का भी निवास स्थान था। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पुश्तैनी घर भी यहीं हैं। साथ ही फिल्म स्टार उत्तम कुमार का भी घर यहीं है। इसके अलावा प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर भी यहीं है। इससे साफ है कि भवानीपुर एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जिसने राज्य की सोच और इतिहास को प्रभावित किया है।
मुख्यमंत्री के कई पड़ोसी आज भी उस अंदाज को याद करते हैं, जब दीदी बारिश के दौरान पानी से लबालब सड़कों से गुजरते हुए मदद के लिए आगे आ जाती थी या फिर उस वाकये को जब वह पड़ोस की एक महिला के बेटे के शव के पास पूरी रात बैठी रही थीं।
लेकिन, थोड़ी दूर महिलाओं का एक ग्रुप कहता है, “4 मई को क्या होगा, यह तो भगवान ही जाने।” फिर एक महिला फुसफुसाते हुए कहती है कि हमें बदलाव चाहिए और इसका कारण सभी को पता है। ठीक उसी समय एक बूढ़ी महिला तेजी से कहती है कि इस बार तो वह बाहर होने वाली है।
मजबूती से खड़ा है मुस्लिम वोट बैंक
पश्चिम बंगाल का चुनाव ममता बनर्जी के बारे में हैं, और उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों के लिए यही मुख्य मुद्दा है। चुनाव किस ओर जा रहा है, इसे समझने के लिए द इंडियन एक्सप्रेस ने कोलकाता और दक्षिण 24 परगना की कैनिंग पुरबा और कैनिंग पश्चिम विधानसभा सीटों के गांवों में महिलाओं से बात की। दक्षिण 24 परगना टीएमसी का गढ़ है और इस बार महिला वोट ममता बनर्जी के लिए ज्यादा अहम है। दीदी का एम+एम यानी महिला और मुस्लिम वोट बैंक पहले भी उन्हें जीत दिलाता रहा है और इस बार भी मुस्लिम वोट मजबूती से उनके साथ खड़ा दिख रहा है।
महिलाएं कर रहीं दीदी की तारीफ
हालांकि कई महिलाएं ‘दीदी’ की तारीफ करते हुए कहती है कि वह कभी हार नहीं मानती तो कुछ उन कई योजनाओं के लिए, जिसे दीदी ने गरीबों की भलाई के लिए शुरू किया। रसेल स्ट्रीट पर ‘भाड़ की चाय’ यानी कुल्हड़ की चाय पीते हुए 39 साल की एक एचआर प्रोफेशनल ने कहा कि ममता दीदी सरकार चलाती है और इतनी आलोचनाओं के बावजूद भी वह मजबूती से पद पर बनी हुई हैं।
भवानीपुर की प्यारा बागान झुग्गी बस्ती में रहने वाली महिला ने कहा कि वह टीएमसी को वोट करेगी क्योंकि ममता दीदी ने उन्हें बहुत सुविधाएं दी हैं। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि शायद कुछ महिलाएं पिछली बार की तरह ही उन्हें वोट न दें। पर यह भरोसा जताया कि दीदी वापस आएंगी, सरकार बदलेगी पर धीरे-धीरे।
एसएसकेएम सरकारी अस्पताल में चार महिलाएं रोजगार के अवसरों की कमी से नाखुश दिखीं। उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार पैदा करने के पर्याप्त कदम नहीं उठा रही। उनमें से एक ने कहा, “मेरी बेटी ने ग्रेजुएशन कर ली है,लेकिन उसे कहीं भी नौकरी नहीं मिल रही है।”
कैनिंग की महिलाओं ने भी इस बात पर सहमति दी। उन्होंने भी कहा कि मंहगाई ने सरकार से मिलने वाले 1500 रुपये के लाभ को खत्म कर दिया है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई की सरकार ने आरजी कर रेप और हत्या मामले में कैसे काम किया और महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया।
किसी को नहीं पता कि वोटर लिस्ट का एसआईआर और 91 लाख नामों को हटाना, राजनीतिक रूप से असल में कैसा साबित होगा या फिर 23 अप्रैल पहले चरण में 93.2 प्रतिशत की वोटिंग से किस पार्टी को फायदा होगा।
जनता में टीएमसी के प्रति नाराजगी
लेकिन एक बात है जिसमें किसी को कोई शक नहीं कि टीएमसी से लोगों में असंतोष है शायद यह उससे भी अधिक है जितना सोचा गया था। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि टीएमसी से नाराजगी के बावजूद ममता के प्रति व्यक्तिगत तौर पर लोगों में वैसा गुस्सा नहीं देखने को मिलता। लोग टीएमसी और दीदी के बीच फर्क करते हैं। जब भी महिलाएं बदलाव की बात करती है तो वे यह भी बताती है कि दीदी ने उनके लिए क्या-क्या किया है।
ऐसा लगता है कि ममता बनर्जी उस तूफान के सामने चट्टान की तरह खड़ी है, जो टीएमसी को सत्ता से हटाना चाहता है। टीएमसी के गुंडों की गुंडागर्दी, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार की आलोचना के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति लोगों के कुछ वर्गों में अब भी सहानुभूति बनी हुई है।
इस चुनाव में ममता की जीत हो या हार वह एक ऐसी हस्ती है, जैसा देश ने पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने सबसे पहले कांग्रेस से अलग होकर पश्चिम बंगाल में अपनी जगह बना ली और महज 13 सालों के अंदर उन्हंने लेफ्ट फ्रंट सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया, जो 34 साल से सत्ता पर काबिज थी। उन्होंने लगातार आगे बढ़ रही भाजपा के विजयरथ को अब तक पांच चुनावों (विधानसभा और संसदीय चुनाव को मिलाकर) में रोककर रखा है।
यह भी पढ़ें: जहां मां काली को चढ़ता है नॉन-वेज प्रसाद, उस थांतानिया कालीबाड़ी के मंदिर पहुंचे पीएम मोदी, जानें अनोखा इतिहास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उत्तरी कोलकाता में अपने रोड शो की शुरुआत करने से पहले ऐतिहासिक थांतानिया कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। यह मंदिर मांसाहारी प्रसाद चढ़ाने की अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
