Budget News: असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों से पहले केंद्रीय बजट में इन चुनावी राज्यों को न के बराबर धनराशि आवंटित की गई है। यह पिछले पांच साल की स्थिति के एकदम उलट नजर आता है। पिछले दो बजटों में बिहार पर विशेष जोर देने के कारण राजनीतिक विवाद पैदा हो गए थे।
इस साल असम में भी विधानसभा चुनाव होने वाला है। इससे पहले राज्य में बौद्ध सर्किट स्थापित किए जाएंगे, जबकि तेजपुर में एनआईएमएनएचएस का एक रीजनल सेंटर बनाया जाएगा। वहीं, उत्तरी बंगाल के चेन्नई और सिलीगुड़ी को हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के हब के रूप में घोषित किया गया है, जबकि केरल और तमिलनाडु रेयर अर्थ मेटल योजना का हिस्सा होंगे। ये घोषणाएं एनडीए और यूपीए सरकारों के कार्यकाल में हुए कई पिछले उदाहरणों की तुलना में फीकी पड़ जाती हैं, जब चुनाव वाले राज्यों को बड़े पैमाने पर आवंटन या स्पेशल प्रोजेक्ट मिले थे।
एनडीए के कार्यकाल का बजट
2014 से अब तक हुए 72 विधानसभा चुनावों (इस साल होने वाले चुनावों सहित) में, केंद्रीय बजट में 21 चुनाव वाले राज्यों के लिए विशेष आवंटन या घोषणाएं की गई हैं।
2025-26: दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, बजट में बिहार के लिए विशेष घोषणाएं की गईं। वहीं मिडिल क्लास को लुभाने के लिए दिल्ली का भी खास ख्याल रखा गया। बिहार को मखाना बोर्ड, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप और मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, मिथिलांचल क्षेत्र के किसानों के लिए पश्चिमी कोशी नहर ईआरएम परियोजना के लिए वित्तीय मदद और नए एयरपोर्ट और पटना एयरपोर्ट के विस्तार के लिए धनराशि दी गई।
2024-25: जहां अंतरिम बजट में चुनाव वाले आठ राज्यों के लिए कोई विशिष्ट आवंटन नहीं किया गया था, वहीं लोकसभा चुनावों में एनडीए की जीत के बाद पेश किए गए बजट में आंध्र प्रदेश और बिहार के लिए विशेष घोषणाएं की गईं, जहां एनडीए के घटक दलों टीडीपी और जेडीयू ने यह सुनिश्चित किया कि गठबंधन निचले सदन में बहुमत का आंकड़ा पार कर ले।
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बजट में आंध्र प्रदेश की राजधानी के विकास के लिए 15,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए और पोलावरम सिंचाई परियोजना और विशाखापत्तनम-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए धनराशि उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई गई। वहीं, बिहार में चुनाव होने में एक साल से ज्यादा का समय बचा होने के बावजूद, मेजर रोड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के लिए 26000 करोड़ रुपये, पावर प्रोजेक्ट्स के लिए 21400 करोड़ रुपये मिले। हालांकि, चुनाव वाले अन्य राज्यों – जम्मू और कश्मीर, हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में से किसी को भी कोई विशेष आवंटन नहीं मिला।
2023-24 : उस साल जिन नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने थे, उनमें से कर्नाटक और तेलंगाना के लिए बजट में कर्नाटक के सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सिंचाई के लिए अपर भद्रा प्रोजेक्ट के लिए 5300 करोड़ रुपये का विशेष आवंटन किया गया, साथ ही हैदराबाद में मौजूद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित किया गया। हालांकि, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए कोई विशिष्ट घोषणा नहीं की गई, इन सभी राज्यों में उस साल विधानसभा चुनाव होने थे।
2021-22 : पांच साल पहले इस साल चुनाव वाले राज्यों के लिए यह एक शानदार बजट था। बजट में असम में नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए 34000 करोड़ रुपये ज्यादा आवंटित किए गए, यह देखते हुए कि 19000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले से ही चल रही थीं। बजट में असम और पश्चिम बंगाल में चाय बागान श्रमिकों के कल्याण के लिए 1000 करोड़ रुपये भी दिए गए। साथ ही हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए भी 25000 करोड़ रुपये भी मिले।
केरल को अपने हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए 65000 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को कई हाईवे कॉरिडोर के लिए 1.03 लाख करोड़ रुपये और चेन्नई मेट्रो के दूसरे फेज के लिए 63246 करोड़ रुपये मिले। चेन्नई को उन पांच तटीय शहरों में से एक के रूप में भी चुना गया जहां प्रमुख मछली पकड़ने के बंदरगाह स्थापित किए जाएंगे।
2018-19 : कर्नाटक चुनावों से पहले बेंगलुरु में सब-अर्बन ट्रांसपोर्ट के विस्तार के लिए बजट में 17000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। लेकिन चुनाव वाले आठ अन्य राज्यों के लिए कोई घोषणा नहीं की गई।
2017-18 : उस साल जिन सात राज्यों में चुनाव होने थे, उनमें गुजरात भी शामिल था और बजट में केवल गुजरात पर ही ज्यादा फोकस किया गया। अन्य बातों के अलावा, राज्य को अपना एम्स मिला।
2016-17 : यह एक बंजर साल था क्योंकि असम, पश्चिम बंगाल, केरल, पुडुचेरी या तमिलनाडु में से किसी को भी कोई विशेष आवंटन नहीं मिला।
2015-16 : हालांकि दिल्ली के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई, लेकिन बजट में बिहार में एक एम्स स्थापित करने और वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार राज्य सरकार को मदद करने की घोषणा की गई।
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2014-15 : सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार के पहले बजट में चुनाव वाले राज्यों महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, हरियाणा और झारखंड का उल्लेख किया गया। जम्मू और कश्मीर को एक आईआईटी, महाराष्ट्र को एक आईआईएम और विदर्भ में एक एम्स दिया गया। सरकार ने हरियाणा में एक बागवानी विश्वविद्यालय और झारखंड में एक एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए। जम्मू और कश्मीर को पश्मीना प्रमोशन प्रोग्राम के लिए 50 करोड़ रुपये और नई खेल सुविधाओं के लिए 200 करोड़ रुपये भी मिले।
यूपीए के कार्यकाल का बजट
केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान हुए 70 विधानसभा चुनावों में, केंद्रीय बजट में 24 चुनाव वाले राज्यों के लिए विशेष आवंटन या घोषणाएं की गईं।
2014-15 : लोकसभा चुनाव से पहले पेश किए गए अंतरिम बजट में महाराष्ट्र एकमात्र ऐसा राज्य था जहां चुनाव होने थे और जिसका उल्लेख किया गया था। बजट में दिल्ली- मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ आठ नए मैन्युफैक्चरिंग जोन की घोषणा की गई। इनका मकसद अगले दशक में 10 करोड़ रोजगार पैदा करना था।
2013-14 : यूपीए सरकार का आखिरी पूर्ण बजट ऐसे साल में आया जिसमें नौ राज्यों में चुनाव हुए थे। छत्तीसगढ़ पर विशेष ध्यान दिया गया, सरकार ने चार पूर्वी राज्यों में हरित क्रांति को बढ़ावा देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए और रायपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोटिक स्ट्रेस मैनेजमेंट की स्थापना की। बजट में मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित 3000 किलोमीटर की सड़क परियोजनाओं की भी घोषणा की गई।
2011-12 : असम और पश्चिम बंगाल को धान की खेती में सुधार के लिए 400 करोड़ रुपये मिले, वहीं केरल और तमिलनाडु को कई नए विश्वविद्यालय मिले, जिनमें मलप्पुरम में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का एक केंद्र 50 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया गया। बंगाल के आईआईटी-खड़गपुर को भी 200 करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान मिला। बजट में कोलकाता और चेन्नई में मेट्रो प्रोजेक्ट्स के लिए भी धनराशि उपलब्ध कराने का वादा किया गया।
2008-09 : छत्तीसगढ़ और कर्नाटक उन पांच राज्यों में शामिल थे जिन्हें अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट मिले, राजस्थान को एक नए आईआईटी के स्थल के रूप में चुना गया, जबकि मध्य प्रदेश को एक नया आईआईएसईआर और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर मिला।
2006-07 : जम्मू और कश्मीर को विशेष सहायता के तहत 2300 करोड़ रुपये मिले। बजट में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को ध्यान में रखते हुए बेंगलुरु-चेन्नई और कोलकाता-धनबाद कॉरिडोर सहित 1000 किलोमीटर नए एक्सप्रेसवे की भी घोषणा की गई। चाय उत्पादक राज्यों असम, बंगाल, तमिलनाडु और केरल को 100 करोड़ रुपये भी मिले।
2005-06 : बिहार उन तीन राज्यों में से एक था जहां चुनाव होने थे और जिन्हें उस साल विशेष आवंटन मिला। राज्य को बाढ़ रोकथाम प्रयासों के लिए 232 करोड़ रुपये की धनराशि भी मिली।
