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दिल्‍ली हाईकोर्ट का फैसला, घर में बड़ी बेटी होने पर वही होगी मुखिया

कोर्ट के अनुसार मुखिया की गैर मौजूदगी में घर में जो सबसे बड़ा होगा वही उस घर का कर्ता होगा। फिर चाहे वो बेटी ही क्‍यों न हो।

Author नई दिल्‍ली | February 1, 2016 1:28 PM
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

दिल्‍ली हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार जिस घर में बड़ी बेटी होगी वहां पर कर्ता धर्ता वही होगी। पिता और तीन चाचाओं की मौत के बाद एक लड़की द्वारा अपने चचेरे भाइयों के खिलाफ दर्ज मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला दिया। इस मामले में चचेरे भाइयों ने बिना बड़ी बहन से पूछे खुद को मुखिया घोषित कर दिया। इस पर लड़की ने कोर्ट में चुनौती दी।

कोर्ट के अनुसार मुखिया की गैर मौजूदगी में घर में जो सबसे बड़ा होगा वही उस घर का कर्ता होगा। फिर चाहे वो बेटी ही क्‍यों न हो। जस्टिस नाजिक वजीरी ने कहा, यदि पहले पैदा होने पर कोई पुरुष मुखिया बन सकता है तो ऐसा ही औरत भी कर सकती है।

जस्टिस वजीरी के अनुसार हिंदू संयुक्‍त परिवार की किसी महिला को ऐसा करने से रोकने का कोई कानून नहीं है। अभी तक न जाने क्‍यों महिलाओं को कर्ता बनने लायक नहीं समझा गया। जबकि आजकल महिलाएं देश के सभी क्षेत्रों में कदम से कदम मिलाकर चल रही है। हालांकि कोर्ट ने माना कि मुखिया में रहते हुए पुरुषों के जिम्‍मे बड़े बड़े काम आ जाते हैं। वे प्रॉपर्टी, रीति रिवाज और मान्‍यताओं से लेकर परिवार के जटिल मुद्दों पर भी अपने फैसले लागू करने लगते हैं।

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