कोलंबिया यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी (IRI) ने अल नीनो को लेकर चिंता बढ़ाने वाला अनुमान जारी किया है। संस्थान के मुताबिक, अल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है और 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक यह ‘बहुत मजबूत’ स्थिति में पहुंच सकता है। इसका असर भारत के मौसम और मानसून पर पड़ सकता है।
आईआरआई ने 21 सितंबर को जारी अपनी ताजा ईएनएसओ रिपोर्ट में बताया कि प्रशांत महासागर के तापमान को मापने वाला नीनो 3.4 इंडेक्स सितंबर के मध्य में बढ़कर 3.0 डिग्री सेल्सियस हो गया है। संस्थान ने 22 अलग-अलग मौसम मॉडलों का अध्ययन किया। इनमें 13 गतिशील और नौ सांख्यिकीय मॉडल शामिल हैं। सभी मॉडलों ने 2026-27 की सर्दियों में बहुत मजबूत अल नीनो की संभावना जताई है।
फरवरी 2027 तक अल नीनो की 100% संभावना
आईआरआई के मुताबिक, फरवरी 2027 तक अल नीनो की संभावना 100 प्रतिशत है। हालांकि, 2027 के मध्य तक इसके घटकर 61 प्रतिशत रहने का अनुमान है। संस्थान ने यह भी कहा है कि मौजूदा स्थिति अब तक दर्ज की गई सबसे मजबूत अल नीनो घटनाओं में शामिल हो सकती है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भारत में अल नीनो का संबंध आमतौर पर कमजोर मानसूनी बारिश से माना जाता है। अगर मानसून कमजोर रहता है तो इसका असर खेती, फसल उत्पादन और पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है। इसके अलावा, भारत में गर्म और शुष्क मौसम की स्थिति भी बन सकती है। हालांकि, अल नीनो का असर हर बार एक जैसा नहीं होता। मौसम पर कई दूसरे कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।
आईओडी भी निभाएगा अहम भूमिका
आईआरआई ने अनुमान लगाया है कि भारतीय महासागर द्विध्रुव (IOD) सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच काफी सकारात्मक रह सकता है। 2027 की शुरुआत में इसके सामान्य स्थिति में लौटने की संभावना है। सकारात्मक आईओडी अक्सर अल नीनो के साथ देखा जाता है। कुछ परिस्थितियों में यह अल नीनो के कारण होने वाले कमजोर मानसून के प्रभाव को कम भी कर सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत में मौसम की स्थिति का अनुमान केवल नीनो 3.4 इंडेक्स के आधार पर नहीं लगाया जा सकता। आईओडी, मानसूनी हवाओं का रुख, समुद्र की सतह का तापमान और सर्दियों की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसलिए आईआरआई का अनुमान भारत के लिए बढ़ते जलवायु जोखिम का संकेत जरूर देता है, लेकिन इससे भारत में बारिश या फसल उत्पादन का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसमें प्रशांत महासागर के एक बड़े हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है। भारत में इसका असर कई बार कम मानसूनी बारिश, गर्म और शुष्क मौसम तथा फसलों और पानी की उपलब्धता पर दबाव के रूप में देखने को मिलता है।
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