दुनिया के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलने वाला अल नीनो और मजबूत हो रहा है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत हाई रिस्क वाले देशों की सूची में रखा है। दक्षिण एशिया के ज्यादातर हिस्सों में अगस्त से अक्टूबर के बीच सामान्य से कम बारिश और ज्यादा गर्मी पड़ने का अनुमान है।

WHO ने 5 सितंबर को जारी अपनी रिपोर्ट ‘Global Public Health Situation Analysis – El Nino 2026’ में यह आकलन किया है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब भारत के कई हिस्सों में मच्छर से फैलने वाली बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में अगस्त के दौरान डेंगू के 90 मामले सामने आए जो इस साल किसी एक महीने में सबसे ज्यादा हैं। इसके साथ ही 29 अगस्त तक राजधानी में डेंगू के कुल मामलों की संख्या 311 पहुंच गई थी। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, मलेरिया के मामले भी जुलाई के 17 से बढ़कर अगस्त में 53 हो गए। इस साल अब तक दिल्ली में मलेरिया के 119 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

WHO ने हालांकि भारत में डेंगू या मलेरिया के मौजूदा मामलों को सीधे तौर पर एल नीनो से नहीं जोड़ा है। संगठन के मुताबिक, अल नीनो को स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाने वाले एक कारक के तौर पर देखा जाना चाहिए। इसका असर किसी क्षेत्र के स्थानीय मौसम, लोगों की संवेदनशीलता और स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता पर निर्भर करेगा।

गर्मी बनी बड़ी चिंता

भारत के लिए बढ़ता तापमान WHO की प्रमुख चिंताओं में शामिल है। ज्यादा गर्मी से हीट एग्जॉशन और हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा पहले से मौजूद हृदय, सांस, किडनी और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारियां भी गंभीर हो सकती हैं।

बहुत ज्यादा गर्मी का असर गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। WHO ने कुपोषण, खाद्य असुरक्षा और नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों के बढ़ने की आशंका भी जताई है।

बारिश और पानी की उपलब्धता में बदलाव का असर खाद्य उत्पादन पर पड़ सकता है। वहीं कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बनने पर लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां साफ-सफाई और जल निकासी की व्यवस्था कमजोर है।

भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा पर भी नजर

WHO ने भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमावर्ती क्षेत्रों को भी जोखिम वाले इलाकों में शामिल किया है। संगठन के मुताबिक, मौसम संबंधी घटनाओं के कारण लोगों के विस्थापित होने की स्थिति में सीमा पार संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

एल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय हिस्से के समुद्री पानी का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है। इसका असर केवल प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।

आने वाला है 70 साल का सबसे ताकतवर अल नीनो? भारत के मौसम पर क्या पड़ेगा असर

प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में एक संभावित ऐतिहासिक अल नीनो (El Niño) डिवेलप हो रहा है। अमेरिका की नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, इस बात की 69 फीसदी संभावना है कि यह अल नीनो 1950 के बाद दर्ज किसी भी अल नीनो से ज्यादा शक्तिशाली साबित हो सकता है।