महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। शिंदे ने कहा कि जो लोग कभी रामभक्तों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करते थे और कांग्रेस के साथ गठबंधन में थे। अब वह भगवान राम और हिंदुत्व के बारे में बात कर रहे हैं।

उद्धव ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर में चंदे के कथित गबन के खिलाफ ‘राम रक्षा’ आंदोलन शुरू किया है। इससे पहले दिन में उन्होंने नागपुर के एक राम मंदिर में पूजा-अर्चना की और आरती की। साथ ही एक सभा को संबोधित करते हुए भाजपा और शिंदे पर निशाना साधा।

एकनाथ शिंदे ने कहा कि जिन लोगों के साथ शिवसेना (यूबीटी) ने गठबंधन किया है। उन्होंने बार-बार हिंदुत्व, वी.डी. सावरकर और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की विचारधारा का विरोध किया है। शिवसेना प्रमुख शिंदे ने कहा कि ऐसे लोगों से हाथ मिलाकर शिवसेना (यूबीटी) ने पहले ही हिंदुत्व का मार्ग त्याग दिया था।

शिंदे ने कहा कि अगर शिवसेना (यूबीटी) वाकई राम रक्षा आंदोलन आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है, तो उन्हें सबसे पहले राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अखिलेश यादव जैसे अपने गठबंधन सहयोगियों को आमंत्रित करना चाहिए। उसके बाद ही उन्हें आरएसएस प्रमुख और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को निमंत्रण भेजना चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे हमेशा कहते थे, “गर्व से कहो, हम हिंदू हैं।” इतने वर्षों बाद, यूबीटी गुट को अचानक यह नारा याद आ गया है। शिंदे ने कहा कि हिंदुत्व कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे सुविधा के अनुसार त्याग दिया जाए और राजनीतिक हितों के अनुकूल होने पर फिर से धारण कर लिया जाए। इसलिए, राम रक्षा के बारे में बोलने से पहले उन्हें पहले अपनी पार्टी की रक्षा करनी चाहिए और अपनी विचारधारा को सुरक्षित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे हमेशा ‘गर्व से कहो हम हिंदू हैं’ का नारा देते थे।

शिंदे ने कहा कि इतने वर्षों बाद शिवसेना (यूबीटी) गुट को अचानक यह नारा याद आ गया है। हिंदुत्व कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे सुविधा के अनुसार त्याग दिया जाए और राजनीतिक हितों के अनुकूल होने पर फिर से अपना लिया जाए। इसलिए, ‘राम रक्षा’ के बारे में बोलने से पहले, उन्हें पहले अपनी पार्टी की रक्षा करनी चाहिए और अपनी विचारधारा को सुरक्षित रखना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम ने अपने पिता के वचन को पूरा करने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। शिंदे ने कहा, “हालांकि, उद्धव ने अपने पिता के आदर्शों और सिद्धांतों को बीच में ही त्याग दिया, इसलिए उन्हें भगवान राम के आदर्शों का प्रचार करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”

उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि ‘राम रक्षा’ आंदोलन “भगवान राम की रक्षा करने का प्रयास नहीं है, बल्कि अपनी राजनीतिक पार्टी की रक्षा करने का प्रयास है”।

शनिवार को नागपुर में अपने संबोधन में ठाकरे ने अयोध्या मुद्दे पर भाजपा को निशाना बनाते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण हो चुका है और अब इसकी रक्षा के लिए एक नया आंदोलन शुरू करने का समय आ गया है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी हमला करते हुए उनसे यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या वे मंदिर के “लूटपाट करने वालों” का समर्थन करते हैं या राम की “रक्षा” करने वालों का।

टाइगर, शेर, कुत्ता और फिल्म शोले के डायलॉग: शिंदे-उद्धव की जुबानी जंग ने पकड़ा जोर

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग दावे किए। एक ने टाइगर, शेर, भौंकते कुत्तों और एक ऐसे राजनीतिक “ट्रेलर” की बात की जिसका पूरा चित्र अभी सामने आना बाकी है। वहीं दूसरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि अगर उनका उन पर भरोसा खत्म हो जाए तो वे पद छोड़ देंगे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि शिवसेना को “चोरों और गद्दारों” के हाथों में नहीं पड़ने देना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर।