दिल्ली दंगाः दुआ कर रहे थे कि मलबे में ही दबकर हमारी मौत हो जाए, शिव विहार के पीड़ित परिवार ने सुनाई आपबीती

उत्तर पूर्व दिल्ली में पिछले हफ्ते हुई हिंसा से शिव विहार का इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था, यहां ज्यादातर लोगों के घर जलाए गए या तबाह कर लूट लिए गए।

Delhi Violence
दिल्ली के शिव विहार का इलाका पिछले हफ्ते हुए सांप्रदायिक दंगों में सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। (फोटो- एक्सप्रेस)

Midhat Fatimah

Delhi Violence news: दिल्ली में पिछले हफ्ते हुई सांप्रदायिक हिंसा का दर्द अभी भी कई परिवारों के चेहरे से उतर पाया है। उत्तर-पूर्व दिल्ली का शिव विहार इलाका उन कुछ इलाकों में था, जो हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित थे। यहां रहने वाली मुमताज बेगम (40) की दुकान भीड़ ने हिंसा के दौरान ही जला दिया था। यही दुकान उनके पूरे परिवार के लिए कमाई का भी जरिया थी, क्योंकि यहीं से वे किराने का सामान बेचती थीं। मुमताज के मुताबिक, अपनी दुकान को पूरी तरह जला देख कर वे अपने आंसू नहीं रोक पाईं और रोना शुरू कर दिया।

मुमताज के मुताबिक, 25 फरवरी को हिंसक भीड़ ने उनके परिवार पर हमला किया था। वे सिर्फ लाठी-डंडों के साथ नहीं, बल्कि साथ में एसिड भी लेकर आए थे। इससे उनके 52 साल के पति मोहम्मद वकील का शरीर और चेहरा बुरी तरह जल गया। मुमताज का कहना है कि जब उनके घर पर पत्थरबाजी हो रही है, तो वे छत पर थीं। उनके घरों में भी आग लगाई गई, आसपास इतना धुआं था कि उन्हें अपने ऊपर फेंका गया एसिड तक नहीं दिखाई दिया। उसके पति को बाद में लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टर उसकी आंखों का इलाज कर रहे हैं।

मुमताज के मुताबिक, जब उपद्रवी उनके घर के अंदर घुस गए, तो किसी तरह वे और उनके परिवार के सभी छह लोग जलते घर से भाग कर मदीना मस्जिद में पहुंचने में सफल हुए। उन्होंने कहा, “जब भीड़ ने मस्जिद पर भी हमला कर दिया, तो हमारी सिर्फ एक ही प्रार्थना थी। हम भीड़ के हाथों नहीं मरना चाहते थे। हम या तो सही सलामत निकलना चाहते थे या मस्जिद के ही मलबे में दबकर मर जाना चाहते थे।” मुमताज ने बताया कि उन्होंने कई बार पुलिस को मदद के लिए फोन किया, लेकिन कोई नही आया। यहां तक की जब उन्होंने हिंसा खत्म होने के बाद पुलिस को देखा, तो उन्हें मदद के लिए न बुलाना ही ठीक समझा।

दिल्ली हिंसा के बीच शिव विहार सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहा। यहां रहने वाले ज्यादातर परिवार रातोंरात निकल गए और मुस्तफाबाद, चमन पार्क और बाबू नगर के इलाकों में शरण ले ली। इस बीच सैकड़ों लोगों ने उनके घरों में आग लगा दी। जब यहां रहने वाले परिवार वापस आए, तो उन्हें अपने घर जले, टूटे और लुटे मिले। मुमताज खुद भी 30 सालों से शिव विहार में रह रही हैं। उन्हें भी अपनी दुकान जली मिली।

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