दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से देशभर से आए छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक, बार-बार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर सरकार सवालों के घेरे में है। बीते एक दशक में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की खबरें सामने आ चुकी हैं जिससे करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। ऐसे समय में यह सवाल और अहम हो जाता है कि क्या शिक्षा वास्तव में केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है?
इस सवाल का जवाब सिर्फ बयानों में नहीं बल्कि बजट के आंकड़ों में भी तलाशा जा सकता है। किसी भी मंत्रालय को आवंटित राशि का वास्तविक महत्व इस बात से तय होता है कि उसे केंद्र सरकार के कुल बजट में कितनी हिस्सेदारी मिल रही है। पिछले 12 वर्षों के बजटीय आंकड़े बताते हैं कि शिक्षा मंत्रालय की हिस्सेदारी लगातार घटी है जबकि सड़क और हाईवे जैसे बुनियादी ढांचे पर खर्च का अनुपात तेजी से बढ़ा है। ऐसे में जब छात्र बेहतर शिक्षा व्यवस्था, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। तब ये आंकड़े सरकार की प्राथमिकताओं पर एक नई बहस खड़ी करते हैं।
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शिक्षा पर खर्च का हिस्सा लगातार घटा
किसी भी मंत्रालय की अहमियत सिर्फ इस बात से नहीं मापी जाती कि उसे कितने रुपये मिले बल्कि इस बात से तय होती है कि कुल केंद्रीय बजट में उसका हिस्सा कितना है।
देखिए क्या कहते हैं आंकड़े
2013-14: शिक्षा मंत्रालय को कुल केंद्रीय बजट का 4.6% हिस्सा मिला
2025-26: यह घटकर 2.5% रह गया
12 साल में शिक्षा मंत्रालय की बजट हिस्सेदारी लगभग आधी हो गई।
स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों प्रभावित
सिर्फ मंत्रालय ही नहीं, उसके दोनों प्रमुख विभागों की हिस्सेदारी भी घटी है। स्कूल शिक्षा विभाग का हिस्सा 2013-14 की तुलना में आधे से भी कम रह गया। उच्च शिक्षा विभाग की हिस्सेदारी भी करीब 40% घट चुकी है।
इसका मतलब है कि प्राथमिक शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालयों तक, बजट में शिक्षा की प्राथमिकता लगातार कम हुई है।
सड़कों पर खर्च तीन गुना
बजट में शिक्षा का हिस्सा घटा जबकि सड़क और हाईवे निर्माण पर खर्च तेजी से बढ़ा।
2013-14: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को कुल बजट का 1.8% मिला
2025-26: यह बढ़कर 5.8% हो गया
यानी 12 साल में सड़कों पर बजट हिस्सेदारी लगभग तीन गुना हो गई।
शिक्षा और स्वास्थ्य से ज्यादा सड़कों पर खर्च
2013-14 में शिक्षा और स्वास्थ्य और सड़क एवं राजमार्ग पर हुआ खर्च
शिक्षा + स्वास्थ्य = 6.5%
सड़क एवं राजमार्ग = 1.8%
2025-26 में शिक्षा और स्वास्थ्य और सड़क एवं राजमार्ग पर हुआ खर्च
शिक्षा + स्वास्थ्य = करीब 4.5%
सड़क एवं राजमार्ग = 5.8%
यानी अब सिर्फ सड़क मंत्रालय को शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों मंत्रालयों को मिलाकर मिलने वाले बजट से ज्यादा हिस्सा मिल रहा है।
स्किल इंडिया पर भी सीमित निवेश
सरकार ने 2015 में अलग कौशल विकास मंत्रालय बनाया लेकिन बजट में उसकी हिस्सेदारी बेहद कम रही।
शुरुआत में हिस्सा: 0.06%
2025-26 में: 0.05%
ये आंकड़े बताते है कि स्किल डेवलपमेंट पर भी बजट में कोई भारी बढ़ोतरी नहीं हुई।
| संकेतक | आंकड़ा |
| शिक्षा मंत्रालय की हिस्सेदारी | 4.6% → 2.5% |
| सड़क मंत्रालय की हिस्सेदारी | 1.8% → 5.8% |
| शिक्षा + स्वास्थ्य (2013-14) | 6.50% |
| शिक्षा + स्वास्थ्य (2025-26) | करीब 4.5% |
| स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय | 0.06% → 0.05% |
| पिछले 10 वर्षों में पेपर लीक | 150+ प्रतियोगी परीक्षाएं |
| शिक्षा बजट में गिरावट | करीब 46% (हिस्सेदारी के आधार पर) |
पेपर लीक और बजट का संबंध
देश में पिछले एक दशक में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे समय में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुरक्षा और संस्थागत सुधारों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और संस्थानों की क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त निवेश जरूरी होता है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
शिक्षा मंत्रालय की हिस्सेदारी: 4.6% से घटकर 2.5%
स्कूल शिक्षा का हिस्सा: आधे से भी कम
उच्च शिक्षा का हिस्सा: करीब 40% कम
सड़क मंत्रालय की हिस्सेदारी: 1.8% से बढ़कर 5.8%
स्किल डेवलपमेंट: 0.06% से घटकर 0.05%
आंकड़े बताते हैं कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार के कुल बजट में शिक्षा की हिस्सेदारी लगातार घटी। वहीं सड़क और हाईवे निर्माण पर खर्च का अनुपात तेजी से बढ़ा। बजट आवंटन किसी भी सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत माना जाता है। ऐसे में शिक्षा पर घटती हिस्सेदारी और लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों के बीच यह बहस और तेज हो गई है कि भारत की युवा आबादी की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए शिक्षा क्षेत्र में निवेश पर्याप्त है या नहीं।
