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नेशनल हेराल्ड केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले ईडी ने कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से की पूछताछ

National Herald case: जांच एजेंसी की ओर से कहा गया है कि उनके द्वारा दिए गये बयान को धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act ) के तहत दर्ज किया जाएगा।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे (फोटो : एएनआई)

सोमवार 11 अप्रैल को प्रर्वतन निदेशालय ने नेशनल हेराल्ड केस से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से पूछताछ की। सूत्रों के हवाले से अधिकारियों ने बताया कि 79 वर्षीय विपक्ष के नेता और राज्यसभा के सांसद को केस की जांच के लिए पेश होने को कहा गया था। जांच एजेंसी की ओर से कहा गया है कि उनके द्वारा दिए गये बयान को धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act ) के तहत दर्ज किया जाएगा।

 क्या नेशनल हेराल्ड केस?: 2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी की शिकायत पर कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड केस की जांच शुरू की थी। भाजपा नेता की ओर से कोर्ट में अर्जी दाखिल कर गांधी परिवार पर घोटाला करने का आरोप लगाया था। स्वामी ने कहा था कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया। 2008 में कांग्रेस का मुखपत्र का प्रकाशन वाली कंपनी एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) ने अपने तीनों अखबारों का प्रकाशन बंद कर दिया था। इस दौरान एजेएल पर 90 करोड़ रुपए का कर्ज हो गया था, जिसके बाद कांग्रेस के शीर्ष ने ‘यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से एक अव्यवसायिक कंपनी बनाई।

इस कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया। इस नई कंपनी में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पास करीब 76 फीसदी शेयर है जबकि बाकी अन्य के पास करीब 24 फीसदी शेयर है। 

इस कंपनी ने आगे चलकर एजेएल का अधिग्रहण किया, जिसके लिए कांग्रेस पार्टी की तरफ से  ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ को 90 करोड़ रुपए का लोन दिया गया। इस पैसे से ही कंपनी ने एजेएल का अधिग्रहण किया। वहीं, भाजपा नेता स्वामी की तरफ से ये आरोप लगाया गया कि इस अधिग्रहण से एजेएल की करीब 5 हजार करोड़ की संपत्ति गांधी परिवार के पास चली गयी।

नेशनल हेराल्ड  का इतिहास: नेशनल हेराल्ड  की स्थापना देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के द्वारा 1938 में की गई थी। इसके तहत हिंदी में नवजीवन, उर्दू में कौमी आवाज़ और अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड प्रकाशित किया जाता था। 2008 में इनका प्रकाशन बंद कर दिया गया।

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