दावा- बिना रजिस्ट्री कराए खरीद बेच कर करोड़ों कमाते थे रॉबर्ट वाड्रा, फरीदाबाद की लैंड डील में ED ने सीसी थंपी से निकाला कनेक्शन

इंडियन एक्सप्रेस ने 2005 के भूमि रिकॉर्ड देखे। इससे पता चला कि थंपी ने फरीदाबाद के अमीपुर गांव में वाड्रा के पूर्व सहयोगी महेश नागर से जमीन खरीदी थी। नागर ने वाड्रा के लिए जमीन खरीदी थी।

रॉबर्ट वाड्रा (फाइल फोटो)

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और भगोड़े हथियार डीलर संजय भंडारी के खिलाफ कथित मनीलाउंड्रिंग के मामले में संबंध होने के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दुबई के रहने वाले व्यवसायी सीसी थंपी को गिरफ्तार किया है। इससे पहले ईडी ने हरियाणा के फरीदाबाद जिले के अमीपुर गांव में भूमि सौदों की एक स्वतंत्र जांच की। थंपी के अलावा बैंकिंग लेनदेन और एक रियल एस्टेट डीलर हरबंस लाल पाहवा की कथित भूमिका की भी जांच ईडी ने जांच की थी। पाहवा पहले वाड्रा के स्वामित्व वाली कंपनी रियल अर्थ इस्टेट्स में निदेशक थे।

ईडी के अनुसार, थंपी वाड्रा का सहयोगी है और लंदन में रियल एस्टेट परिसंपत्तियों में निवेश करने में मदद की। थंपी दुबई में स्काईलाइट एफजेडई कंपनी चलाता है जो भारत में वाड्रा के स्वामित्व वाली कंपनी के साथ अपना नाम साझा करती है। लेकिन इससे काफी समय पहले दोनों के बीच एक और संबंध था। इंडियन एक्सप्रेस ने 2005 के भूमि रिकॉर्ड देखे। इससे पता चला कि थंपी ने फरीदाबाद के अमीपुर गांव में वाड्रा के पूर्व सहयोगी महेश नागर से जमीन खरीदी थी। नागर ने वाड्रा के लिए जमीन खरीदी थी। हरियाणा और राजस्थान में भूमि सौदों के सिलसिले में 2016 से ईडी की नजर उसके ऊपर है।

इंडियन एक्सप्रेस ने 2017 में एक रिपोर्ट की थी कि 2005 से 2008 के बीच थंपी, उसकी कंपनी हॉलिडे सिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गांधी वाड्रा ने अमीपुर में कृषि भूमि के आस-पास के इलाकों में जमीन खरीदी। जब थंपी के हॉलिडे सिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड ने इसे खरीदा था, तब इनमें से कम से कम एक प्लॉट नागर के कब्जे में था। नागर ने पिछले साल इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, “मैंने उसके (थंपी) के लिए कुछ जमीनें देखीं और कुछ सौदों में मदद की। लेकिन उन्होंने ने अपनी अधिकांश जमीन स्थानीय डीलरों के माध्यम से अमीपुर में खरीदी।” नागर ने थंपी और वाड्रा के बीच के संबंध पर किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। थंपी और वाड्रा ने भी इस मसले पर किसी सवाल का जवाब नहीं दिया।

ईडी ने पाया है कि 42 एकड़ जमीन पहले रियल एस्टेट डीलर पाहवा द्वारा 2005-2006 (तीन बार में) खरीदी गई थी और प्रत्येक बार खरीद के कुछ महीनों के भीतर वाड्रा को लगभग उसी कीमत पर बेची गई थी। अमीरपुर की यह जमीन साल 2010 में अक्टूबर और दिसंबर महीने में वाड्रा ने फिर से पाहवा को बेच दी लेकिन इस बार ‘पर्याप्त लाभ’ पर बेची गई। उदाहरण के तौर पर वाड्रा ने 12 एकड़ जमीन पाहवा से 32.4 लाख में खरीदी थी और फिर यही जमीन पाहवा को 95 लाख रुपये में बेची गई। इसी तरह 20 एकड़ जमीन वाड्रा ने 54 लाख में खरीदी और 1.55 करोड़ में फिर उसी के हाथों बेच दिया। 10 एकड़ जमीन 26.5 लाख में खरीद कर वाड्रा ने पाहवा को 50 लाख में बेचा।

ईडी ने पाहवा के बैंक खातों और अमीपुर के भूमि रिकॉर्ड की छानबीन करने के बाद निष्कर्ष निकाला है कि जमीन की रजिस्ट्री से पहले भी वाड्रा ने मुनाफा कमाया था, और यह कि पाहवा का अकाउंट बैलेंस निगेटिव (माइनस) में था, फिर भी उसने फिर से अपनी ही बेची हुई जमीन की खरीद की।

ईडी ने पाया कि जिस समय लेनदेन हो रहा था, उस समय थंपी ने पाहवा को एक बड़ा नकद भुगतान किया। ईडी ने निष्कर्ष निकाला, “सीसी थम्पी, जिसने संजय भंडारी के साथ वित्तीय लेनदेन किया था, ने एचएल पाहवा को 50 करोड़ रुपये का नकद भुगतान किया था। इस पैसे को कई भूमि सौदे के लिए इस्तेमाल किया गया था और रॉबर्ट वाड्रा सीसी थम्पी और संजय भंडारी दोनों के मित्र हैं।”

ईडी ने अमीपुर भूमि सौदे को अमीपुर में विकास परियोजनाओं के लिए डीएलएफ समूह के साथ किए गए समझौतों के साथ भी जोड़ा है। ईडी के निष्कर्ष बताते हैं, “यह रिकॉर्ड की बात है कि वाड्रा ने कंपनी के लिए अमीपुर गांव में भूमि की व्यवस्था के लिए DLF समूह से एडवांस के रूप में 5 करोड़ रुपये लिए थे।”

अप्रैल 2017 में इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था, डीएलएफ समूह ने वाड्रा से संबंधित भूमि पर प्रस्तावित परियोजनाओं की भी पुष्टि की थी, लेकिन कहा कि यह सौदा अंततः नहीं हुआ। इंडियन एक्सप्रेस ने भूमि की मूल खरीद के तुरंत बाद पाहवा से भी बात की थी और उन्होंने स्वीकार किया था कि वह थंपी ही था जिसने उसे वाड्रा से जमीन के टुकड़े खरीदने के लिए कहा था।

2017 में डीएलएफ ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक बयान में कहा था, “2008-09 में स्काईलाइट ग्रुप ने हमें फरीदाबाद में जमीन का एक टुकड़ा खरीदने का मौका दिया और इसलिए डीएलएफ ने किश्तों में 15 करोड़ रुपये एडवांस में दिए। इसके बाद हमने पाया कि भूमि कानूनी पचड़ों में फंसी हुई थीं। इसलिए हमने इसे नहीं खरीदने का निर्णय लिया और एडवांस में दिए पैसे वापस मांगे। यह पैसा स्काईलाइट समूह ने वापस कर दिया था।”

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट